ग़ज़ल
मैं तेरा गम भुला नहीं सकती
दर्द अपना बता नहीं सकती
मैंने काटी कई रातें तन्हा
जिंदा हूँ क्यूँ बता नहीं सकती
ख़्वाब मेरे कई अधूरे है
पर उन्हें मैं भुला नहीं सकती
जागते रहना सीखा आँखों ने
मैं इन्हें अब सुला नहीं सकती
कौन किसका यहाँ पे है सरिता
वक्त को मैं दिखा नहीं सकती
सरिता कोहिनूर 💎
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