मंगलवार, 27 मार्च 2018

निषादराज के दोहे

निषाद राज के दोहे:-
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फूल खिले हैं बाग में,गेंदा अरु कचनार।
भँवरा गातें गीत हैं,कोयल कुहके डार।।

वन में देख बहार है ,परवत पे  हरियाय।
शीतल मंद समीर है, वर्षा खींचे  आय।।

नमन् करूँ गुरुदेव को,दे मुझको वरदान।
मन मेरा उज्ज्वल बने,मिटे मोह अज्ञान।।

शान तुम्हारी जाय ना,ना कर ऐसा काम।
जग में ऐसा तुम करो,चले हमेसा  नाम।।

माँ तो सागर प्यार का,डुबकी लेहु लगाय।
ऐसा अवसर ना मिले,समय बीत पछताय।।
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रचनाकार:-
बोधन राम निषाद राज
सहसपुर लोहारा,कबीरधाम (छ.ग.)
All Rights Reserved@bodhanramnishad

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