बागान
खिलता पुष्प
धरा के बागान में---
झूमते पक्षी.
बागान देख
नाचे मन मोर है---
बावरी होके.
आते तितली
सतरंगी बाग में--
मनवा लागे.
हुआ सवेरा
मुस्कुराता बागान---
कलियाँ देख
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छ. ग.
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें