कलम की सुगंध छंदशाला
नमन मंच
19/04/20
घनाक्षरी
-रंग जीवन के
अंग अंग भीगे रंग लेकर नई उमंग,
दिन रहे होली रात दिवाली मनाइये।
सरसो के रंग लिए हियरा जो भंग पिए,
आम बन डाल पर मन को लुभाइये।
हरी-हरी धरती ये शीतल जो करती है,
झरझर नदियों सा,तरंग जगाइये।
सुख दुख संग लिये,जीवन में रंग लिये,
बांट चले भाईचारा रंग ये चढ़ाइये।
-तोषण दिनकर
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