शिक्षक
लक्ष्य का हमको ज्ञान कराते।
बिना इनके दीक्षा कहाँ पाते।
करने जग को रौशन यह जो,
बन दीपक स्वयं जल जाते।
महिमा जिनकी बर्नी न जाये।
वेद पुरान भी पार नहीं पाये।
सत्य असत्य का फर्क बताने,
सदा सज्जन के पथ अपनाये।
शिक्षक मेरे हैं राह दिखाते।
मानवता का है पाठ पढ़ाते।
जो भी इनका नित करता मान,
सदा जीवन में आशीष पाते।
गर्व जिनके मन नहीं होते।
सतत् कर्म में जुटे हैं होते।
खुद की चिंता नही है होती,
सत कर्म जीवन भर होते।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
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