बेरंग ही सही मना लिए
अब की बार होली फिर से
कोई लगाया नहीं गुलाल
न किसी मारी पिचकारी
ये कैसी है होली.....???
खुशियों में मानो ग्रहण लग गया
शैतान कोरोना काल सत्यानाश
बच्चों की चहचाहट नहीं थी
न ही नगाड़े की धुन कहीं
देखा न किसी के माथ रोली
ये कैसी है होली.....??
अबीर गुलाल का नहीं निशाँ
डी जे भी थे सब बंद पड़े
थिरकन नहीं थे पाँव पे
खड़े खड़े दूर से ताक रहे थे
एक दूजे को हमजोली
ये कैसी है होली.....??
ऐसा दिन न मिले किसी को
न छाये कभी गम के बादल
दुआ है परवरदिगार से मेरी
कुबुल करना सरकार अभी
भीगे बरस अगले सूखे चोली
ठीक से हो नित होली....√√
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौंडी लोहारा
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