शुक्रवार, 23 अप्रैल 2021

लेखनी


कुण्डलियाँ
लिखती जाए लेखनी,बदले है इतिहास।
योगदान भी आपकी,महके बन मधुमास।
महके बन मधुमास,पवन देखो लहराये।
जले नवीन मशाल,गीत जोशीला गाये।
करते नाज समाज,गगन में तारा दिखती।
देता नव संदेश,कलम जो निशदिन लिखती।।
रचना-
तोषण कुमार चुरेन्द्र

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