सोमवार, 5 अप्रैल 2021

कोरोना से जंग

एक बार फिर कोरोना से जंग है।
फीका- फीका फागुन का रंग है।

लगा भारत पर प्रतिबंध देखिये,
कोई मित्र नहीं किसी के संग है।

न ही कोई शोर शराबा नगर में,
न शराब पीये न ही कोई भंग है।

बरस बीता एक कोरोना कहर में,
फिर भी देखो अंतर्मन में उमंग है।

अमन  व सौहार्दभाव से मिलिये,
मिलकर  मनाये होली सतरंग है।

देवें परिचय एक्य सूत्र 'तोषण'
सतत जन-जन जीवन उमंग है।


तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौंडीलोहारा

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विशिष्ट पोस्ट

शिवनाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...