मानव मानव का केहे संगी
काखर कतका मांनव।
मानव होगे हे लबरा संगी
अऊ कतका मैं जानव।।
-आचार्य तोषण
काखर कतका मांनव।
मानव होगे हे लबरा संगी
अऊ कतका मैं जानव।।
-आचार्य तोषण
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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