गुरुवार, 7 जुलाई 2016

सपना


सपना कभू रोवाथे अऊ कभू हंसाथे।
सपना ह मोर मयारू संन भेंट कराथे।
झन बना तै कभू सपना ल शमशान,
सपना,एक दुसर ल जीएबर सिखाथे।।
-आचार्य तोषण

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