नशा नशा कहिथस, नशा नाश के जड़।
करके नशा आज, नरक रद्दा झन गढ़।
कोन बांचे कोन बांटे, अपन धन उरकाय।
नही पइसा हाथ मा,लोटा थारी बेंच खाय।।
करके नशा आज, नरक रद्दा झन गढ़।
कोन बांचे कोन बांटे, अपन धन उरकाय।
नही पइसा हाथ मा,लोटा थारी बेंच खाय।।
नशा में सबके जग म,दउलत इज्जत जाय।
नशा डर नशा जहर जीते यमपुर पहुचाय।।
-आचार्यतोषण
नशा डर नशा जहर जीते यमपुर पहुचाय।।
-आचार्यतोषण
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