सुप्रभातम्
आदमी नहीं,आदमीयत को सलाम करता हूँ।
देख उसकी नेक नियत पे कलाम भरता हूँ।
यूं तो हजारो की भीड़ में मौजूद है आदमी,
सबका करे सजदा मैं उन्हें प्रणाम करता हूँ।।
बाबा तुलसीदास जी लिखते भी है.
"सियाराम मय सब जग जानि।
करहुँ प्रणाम जोरि जुग पाणि।"
"जड़ चेतन जग जीव सब सकल राम मय जानि ।
बन्दउं जिनके पद कमल सदा जोरि जुग पानि।।"
ध्यान मूलं गुरू:मुर्ति:पूजा मूलं गुरू पदम्।
मंत्र मूलं गुरू: वाक्यं मोक्ष मूलं गुरू कृपा।।
सीखने की है चाह अगर,रहे मन में ध्यान।
ध्यान है तब मिले गुरू,गुरू मिले तब ज्ञान।।
-आचार्य तोषण
फुल नही जो शाम ढलते मुरझाऊं"सियाराम मय सब जग जानि।
करहुँ प्रणाम जोरि जुग पाणि।"
"जड़ चेतन जग जीव सब सकल राम मय जानि ।
बन्दउं जिनके पद कमल सदा जोरि जुग पानि।।"
ध्यान मूलं गुरू:मुर्ति:पूजा मूलं गुरू पदम्।
मंत्र मूलं गुरू: वाक्यं मोक्ष मूलं गुरू कृपा।।
सीखने की है चाह अगर,रहे मन में ध्यान।
ध्यान है तब मिले गुरू,गुरू मिले तब ज्ञान।।
-आचार्य तोषण
मैं तो खुशबू हूँ हर सांस बसता जाऊं।
भुलना चाहो मुझको लाख मगर
मैं वो शख्स हूँ हर किसी को याद आऊं।।
-आचार्य तोषण
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