जिनगी मा कभू घमंड झन करबे. माटी के बने हस माटी मा मिलबे.
पलता पल-पल प्रेम से,पुण्य प्रकृति परकाज! पुलके पुंज प्रताप के,पावन हो परवाज!!
तोषण कुमार चुरेन्द्र
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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