बुधवार, 5 मई 2021

बेटी की बेटी हूँ

एक बेटी का एक माँ के लिए अल्फाज
👇👇👇👇👇👇👇👇
कहते हैं लोग तेरी परछाई हूँ मैं।
मेरी माँ तू पहले फिर आई हूँ मैं।
👇👇👇👇👇👇👇👇
तन का लहू तेरे मुझमें बह रही,
हाथों से  सेकी  रोटी खाई हूँ मैं।
👇👇👇👇👇👇👇👇
चलना सिखाया अंगुली पकड़े,
लगादो  मरहम  चोट लाई हूँ मैं।
👇👇👇👇👇👇👇👇
ढाल  बनकर  साथ रही हमेशा,
जब  खुद  को  तन्हा पाई हूँ मैं।
👇👇👇👇👇👇👇👇
सीना गर्व से  फूल जाता है माँ,
लगता है स्वयं लक्ष्मी बाई हूँ मैं।
👇👇👇👇👇👇👇👇
महिषा रक्तबीज हजारों यहां है,
संघारिणी दुर्गा काली माई हूँ मैं।
👇👇👇👇👇👇👇👇
बेटी की बेटी हूँ जहान में आके,
हर घर की खुशी पहुनाई हूँ मैं।
👇👇👇👇👇👇👇👇
देखो थके नही अब ये "तोषण"
कलम की उसकी रानाई हूँ मैं।
👇👇👇👇👇👇👇👇
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडी लोहारा
बालोद छ.ग.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विशिष्ट पोस्ट

शिवनाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...