सीख
मीत बनाना सीख ले।
पेड़ लगाना सीख ले।
सुख दुःख के साथी ये,
रीत निभाना सीख ले।
झुक जाते सब के लिए,
माथ नवाना सीख ले।
देते सबको वन औषधि,
दवाई बनाना सीख ले।
काटने वाले निर्मम हो,
चेत लगाना सीख ले।
मिले जिनसे शुद्ध हवा,
गुल महकाना सीख ले।
हो सावन शाम सुहानी,
मेघा बुलाना सीख ले।
सारा आलम हरा भरा,
राह दिखाना सीख ले।
परिंदों के मत शत्रु बन,
घरोंदा बनाना सीख ले।
कहे सबसे तोषन प्यारे,
जग बचाना सीख ले।
तोषन धनगंइहा
धनगाँव डौ.लोहारा
बालोद
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