*बुनने चला हूँ रिश्तों के धागों को तोषण,*
*सुलझने के बजाय रिश्ते उलझ ही जाते है।।।*
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राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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