आज हम देखत हन हमर ए समाज के भीतर म दहेज लेना नइहे न देना नइहे कहिके गोठ बात करथे । फेर अभीन तक ले ए बिसय मा कोन्हो ढंग ले जमदरहा कदम एमा रोक लगाय बर नी उठात हे। अभी बिहाव बर मा सबे डहर दहेज के आनी -बानी के समान देखे बर मिलत हे । हम मन इही सोंच म रहिजथन कि मोर सगा संबंधी मोला कहीं कुछू कहि दिही का, ए बात धरके करजा बोडी करके दहेज लेके देके बिहाव तो कर डरथन ।ओखर बाद मरत ले छूटत रा। सियानन मन कहिथे बेटी बिहाव करे ताहन गंगा नहा डरे यहू का गंगा नंहवई ए ।दहेज के चक्कर म घर बूडी होवत हे। का एहा कभू बंद नी हो सकय ? बंद होही फेर ओकर पहिली हम मनला सोचना पड़ही । कि अब हम न दहेज देन न लेन ।
घर परिवार ल जादा खरचा उठाय ल मत परे ।करजा म लदाय झन । अइसे सोच समझ के सरकार डाहर ले सुघर अकन आदर्श बिहाव योजना निकले हे जेकर हमला लाभ लेना चहिए। अउ दहेज मुक्त अउ करजा मुक्त रहना चहिए।
-आचार्य तोषण
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