शनिवार, 25 जून 2016

गंगा मंइया

तोर मया के बरसा दाई झुमर झुमर के बरसय।
आस पूरो सबके माता झन कोन्हो ह तरसय।।
जल भीतरी ले जनम धरे गंगा मंइया कहाय।
नर नारी सब भक्तन मन के आस ल तै पुराय।।

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