शनिवार, 25 जून 2016

॥मजदूर॥


मे मजदूर मेहनत के
पसीना खून ओगरावंव।
सरदी गरमी बरसा दिन मा
मन लगाके कमावंव।।

होत बिहनिया बासी धरके
काम बूता मा जाथंव।
भरे गरमी के मंझनिया संगी
बोरे बासी ल खाथंव।
लोग लइका झन भूख रहय
सबके सुध ह लामे।
ईटा पथरा रेती माटी
सीरमेंट गिट्टी हांथ ले जामे।
मोर दुनों हांथ ले सबके
घर कुरिया सिरजत हे।
बने हवंव मय तुंहर मन बर
येहा मोर किसमत हे।
झंऊंहा रापा गैंती ले मोर
सुघ्घर अकन यारी हे।
हमर मन बर का होली
हरेली अउ का देवारी हे।
मोर लइका झन मजदूर बनय
बढिया मेंहा पढाहूं।
जानय सब मोरो लइका ल
मय बाबू साहब बनाहूं।
मजदूर के लइका तोषण
बासी चटनी खाथन।
सुबेरे ले सांझ तक
माटी के गुण ल गाथन।।
-आचार्य तोषण

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विशिष्ट पोस्ट

शिवनाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...