शनिवार, 25 जून 2016

तोर मया के चिनहा ल

तोर मया के चिनहा ल
राखे रहूं सजाके।
मोर हिरदे के कुरिया म
ठोहूं तारा लगाके।
अगोरा म तोर बइठे हावंव
रद्दा म नैना गड़ाके।
कतिक दिन ले देखहूं मैंहा
लहूं चूरी पहिराके।।
मोर मया के कुरिया ल
कब तै अंजोर करबे।
बिन रंग मोर दुनिया ल
कब सतरंगी रंग भरबे।।
मोरो सुध तै लेले पगली
बइहा बरन मोर हाल हे।
बिन तोर जिनगी बिताना
मोर जी के जंजाल हे।
मया के चिनहा देके तैहा
जादा काबर तड़पात हस।
अंगना मोर आहूं कहिके
काबर टुंहू देखात हस।।
मर जहूं तोर सुधरई मा
जादा झन बेकरार कर।
कर मोर संग बिहाव पगली
जिनगी के मोर उद्धार कर।।
आचार्य तोषण

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विशिष्ट पोस्ट

शिवनाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...