गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

सात घंटे

सात घंटे

वो  तेरे सात घंटों का साथ
पल - पल  हर पल है खास
दूरी है मुझसे गम नही कोई
रहती तू सदा  दिल के पास

रहता  है  तेरी बातों में नशा
भा  जाती  है  तेरी हर अदा
अकेले में  रहती  है साथ तू
रोम -रोम में है तेरा एहसास
दूरी है मुझसे गम नही कोई
रहती तू सदा  दिल के पास

तुम मुझसे रुठती मैं तुझसे
दोनों  का यूं मानना मनाना
कभी होंगे न जिंदगी में हम
कभी  भी  कहीं  भी उदास
दूरी है मुझसे गम नही कोई
रहती तू सदा  दिल के पास

हमारा रिश्ता  बरसो पुराना
भूला न  पाएगा  ये जमाना
बारहमासी  प्रेम   है अपनी
बनी रहेगी ये सदा मधुमास
दूरी है मुझसे गम नही कोई
रहती तू सदा  दिल के पास

मर  भी जाऊंगा जो मैं अगर
इश्क मेरा रहेगा हमेशा अमर
तुझको पाने को मेरा ये दिल
जन्म जनम लेता रहेगा साँस
दूरी  है  मुझसे गम नही कोई
रहती  तू सदा  दिल के पास

तोषण कुमार चुरेन्द्र

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विशिष्ट पोस्ट

शिवनाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...