१७-१-१७
का हाइकु
तरु है दादा
परिवार का मूल
नेक इरादा
जीवन मेरा
पिता का आशीर्वाद
छाँव का घेरा
मूरत माँ की
ममता का आँचल
तीरथ झाँकी
भातृ का स्नेह
दुलार भउजी की
कंचन मेह
बहन की राखी
स्नेह भरी रसरी
उड़ती पाखी
तोषण कुमार चुरेन्द्र
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