गुरुवार, 22 अक्टूबर 2020

बेटी

एक प्रयास सादर समीक्षार्थ

अरविंद सवैया[ सगण ११२ x ८ +लघु ] 
सरल मापनी --- 112/112/112/112/112/112/112/112/1

अपनी बिटिया चहकी बगिया चिड़िया बनके अँगना मनुहार।
पढ़ने गढ़ने बढ़ने चलती विपदा हरती करती सुविचार।
सजती धजती तितली छम सी गिरती फिरती उड़ती गुलनार।
दुरगा कलिका रुप नौ जननी हरलो हमरी मइया दुखसार।


तोषण चुरेन्द्र दिनकर

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विशिष्ट पोस्ट

शिवनाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...