रविवार, 2 जुलाई 2017

मोर परचय

*परिचय*
लोहारा के तीर मा,बसे हवय धनगाँव।
बोहावत हे खरखरा, बर पीपर के छाँव।।१।।

बेटा जोहर लाल के,तोषण हावय नाँव।
जुरमिल सब आशीष दव,परथँव सबके पाँव।।२।।

तोषण मँय तो लेड़गा,हावँव बड़ मतिमंद।
किरपा बरसय राम के,सुग्घर गढ़िहँव छंद।।३।।

शाला जाथँव रोज मँय,करँव ग्यान के दान।
का छोटे अउ का बड़े,पाथँव सबके मान।।४।।

भाई बहिनी चार हम,सबले बड़का आँव।
नइहे दाई संग में,जोहर ददा मनाँव।।५।।

चितरेखा हे संगिनी,बेटा मोर डुमेश।
हँसी खुशी दिन हा चले,नइहे कोनों क्लेश।।६।।

भूल चूक ला दव क्षमा,माँगत हँव कर जोर।
हावँव गा मतिमंद मँय,धीरज नइहे थोर।।७।।

"तोषण कुमार चुरेन्द्र "

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