रविवार, 27 सितंबर 2020

साहस (तोषण चुरेन्द्र दिनकर)


बाधा आये लाख चाहे,
मन नहीं घबराये,
आये जो तूफान कभी,
लड़ भीड़ जाइये।

डट जा पहाड़ सम,
बाजुओं में भर दम,
काँप ऊठे बादल भी,
दहाड़ लगाइये।

हाथ ले मशाल सारे,
सबके हो एक नारे,
जगमग धरती हो,
दीपक जलाइये।

हार कभी मानों नहीं,
बिना जानें तानें नहीं,
सोच लें समझकर,
कदम उठाइये।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगांव डौंडी लोहारा
बालोद छ.ग.

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