शुक्रवार, 2 जून 2017

ठेलहा राम

*ठेलहा राम*

*किहिस एक दिन मोला कोई,*
*का तोर बर कहुं  नइये काम।*
*खाथस पीथस घूमत रहिथस,*
*बने बात नोहे जी ठेलहा राम।*

*केहेंव महु घलो गोठ बने जी,*
*मोरो करा हे  अब्बड़ काम।*
*काम करहु फेर रहा ले ले गा,*
*करन देना थोरिकन  अराम।*

*काम  बुता  बर  संसो नइये,*
*हस कोढिहा तै कथे सियान।*
*पाछु  झन पसताये ल परय,*
*काम  बुता बर दिहा धियान।*

*सियान के गोठ मान लेहेंव,*
*अब जाथँव महुँ कमाय बर।*
*खुद भविस के संसो करके,*
*सुग्घर जिनगी सिघयाय बर।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

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