संकल त्रय
सप्तविंशति पुष्प
मंगलमय
दर बदर
है चहल - पहल
चार पहर
करें सम्मान
होकर आगाहित
बनें महान
तोषण कुमार चुरेन्द्र
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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