आँसू कहते
कब आओगे तुम
दिन ढलते.....
निहारुँ राह
है मन आनंदित
प्रेम की चाह...
हो आगमन
चकवा निहारती
स्वाती की बूँद....
तोषण कुमार चुरेन्द्र
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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