समीक्षार्थ
विधा:- मनहरण घनाक्षरी
भारत का स्वाभिमान
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भारत का स्वाभिमान,देव मुनि की संतान.
देश हमारा न्यारा है,प्यारा ये हिन्दुस्थान.
गगनचुंभी पर्वत,दक्षिण हिन्द महान.
गंगा की पावन धारा,करती गुणगान.
वीर शिवा की धरती,बेटा भगत की शान.
माँ खातिर मर मिटे,आजाद बलवान.
मिल कसम लें आज,बढ़े तिरंगे का मान.
त्याग तपस्या की गाथा,गुँजता जयगान.
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तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
छत्तीसगढ.
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