शुक्रवार, 10 अगस्त 2018

हरा भरा खलिहान

हरा भरा खलिहान,संस्कृति की पहचान,
परब हरियाली का,बड़ा ही निराला है!!
महीना है सावन का,जय हो भोलेनाथ की,
छोड़छाड़ अमृत को,पिए विष हाला है!!
मगन होते किसान,लहराते देख धान,
बनकर हलधर,देश को संभाला है!!
अन्न धन घर द्वार ,अपनों का साथ मिले,
माता पिता साथ रहे,वर्षो हमें पाला है!!

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
छत्तीसगढ़

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विशिष्ट पोस्ट

शिवनाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...