हाय रे कोरोना काल तै कइसन दिन देखाय
छोटे बड़े ला जाने नही अलकर नाच नचाय
हाय रे कोरोना काल......
आय कहाँ ले तैहर बइरी,दुनिया होगे हलाकान
सुतत जागत तोरेच चर्चा,करथे लइका सियान
तीर के मनखे दूरिहा भागे,मुँह मा मास्क लगाय
हाय रे कोरोना काल....
सर्दी खाँसी ह बनगे कोरोना,मन मा डर हे समागे
अस्पताल मा कोई नंइ जावै,कइसन दिन हा आगे
फिरत हावय मनखे देखव,सर्दी खाँसी लुकाय
हाय रे कोरोना काल...
विनती हावय सरकार ले,जल्दी दवा बनादे
हटे कोरोना सगरो जगत ले,नवा अंजोर बगरादे
हाँसय खेलय धरती डोली,रूख रई खुशी मनाय
हाय रे कोरोना काल....
रचनाकार
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
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