सादर समीक्षार्थ
सावन के महीना मा...
सावन के महीना मा,
मन मोर मँजूर कस नाचय।
सनन-सनन चलय पुरवइय्या,
गीत मया के गावय।
होत बिहनिया सुरूज नरायण,
नवा अंजोर बगराथे।
दंडाशरन पाँव पँइय्या परके,
मिलजुल सब परघाथे।
संगी जँहुरिया सुआ करमा,
पंथी ददरिया सुनावय।.....
डोंगरी पहाड़ी चिरई चिरगुन,
देख मोला मुसकाथे।
कारी बदरा गरजे घन-घन,
भुँइया के तन हरियाथे।
बरसय पानी झूमे रूख राई,
नदिया नरवा इतरावय।....
पिंयर-पिंयर परसा फूलवा,
संग फगुआ के राग हे।
सात सुर के धुनी छेड़य,
सतरंगी संगी फाग हे।
रहिबो एक डोरी बंधाके,
तोषण अतरी गोहरावय।...
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तोषण कुमार चुरेन्द्र 'दिनकर'
सरपंच/साहित्यकार
धनगाँव, डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
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