बुधवार, 28 अगस्त 2019

अंत्याक्षरी

अभ्यास की दृष्टि से सादर ....मंच पर

अवहेलना,

मत करना अवहेलना,कभी बड़ों की बात।
दुआ कभी मिलता नहीं,हो दिन चाहे रात।।

विवेचना,

करिए कर्म विवेचना,रखिए सदा ये ध्यान।
धन दौलत जब पास हो,ना रख कभी गुमान।।

व्याप्त,

गुण अवगुण सब व्याप्त है,यही जगत की रीत।
मीठी वाणी बोल के,सकल विश्व लो जीत।

आकंठ,

भरा हुआ आकंठ तक,सदा पतित में दंभ।
झुकना कभी न जानते,तने रहे बन खंभ।

ममता,

माँ की ममता को भला,आँक सके न कोय।
भरकर सुत के पेट को,खुद ही भूखी सोय।।

प्रलाप,

सुख दुख के इस खेल में,करते नहीं प्रलाप।
धैर्य मन में धारिए,मिट जाए संताप।।

लालसा,

त्यागें मन की लालसा,करें ईश का ध्यान।
धन दौलत साथी नहीं,रखिए इसका ज्ञान।।

वन्दना,

मातु पिता की वन्दना,करलें आठों याम।
जिनके पुण्य प्रताप से,बनते बिगड़े काम।।

चापलूस,

चापलूस के काम का,रहता जग में शोर।
बड़े-बड़े ठग जात हैं,क्या ठाकुर क्या चोर।।

झंझावत

आते झंझावत शाम जो,हिय में उठती आह।
पिया गये परदेश को,घर से तकती राह।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र "धनगंइहा"

मंगलवार, 27 अगस्त 2019

ईश वंदना

दोहा-
बनकर साधु मैं खड़ा,दर पे तेरे आज।
हाथ जोड़ कर कामना,रख लो मेरी लाज।।

चौपाई:-
तेरे चरण मैं माथ नँवाऊँ।
होत भोर तेरे गुन गाऊँ।
कृपा तेरी मिले प्रभू मोहे।
करतल बान धनुष अति सोहे।
आए शरण नीज दीन दुखारी।
रहिहव सदा तुम मीत हमारी।
बार-बार बर माँगँव तोसे।
पाप कभी नहीं होय मोसे।
सबके घर भंडार भरौ तुम।
गलत राह में न हो कोई गुम।
सबके रहना सदा सहाई।
दाता करता यही दुहाई।

दोहा:-
रहे सदा सद्भावना,माँगू यह वरदान।
सेवक बनकर सब रहे,मिले मान सम्मान।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र "धनगंइहा"

मोर आँखी के तारा रे

मोर आँखी के तारा रे,करबे जग उजियारा रे
दीन दुखिया के सेवा करबे ,बनबे जग के दुलारा रे

तोर पाए के खातिर बेटा, कतको बरत उपवास करेंन
जूड़ बासी खाके ललना,तोर बर ताते भात करेंन
धरती दाई के रक्षा करे बर,रहिबे तैं रखवारा रे
मोर आँखी के तारा रे...

ध्रुव प्रहलाद के रद्दा म चलबे,सबके आशीर पाबे
वीर बालक खुदी बनके तै,दाई के लाज बचाबे
दुध के करजा पूरा करबे,होही तभे चुकारा रे
मोर आँखी के तारा रे...

लव कुश जइसे ज्ञानी होबे,राम के गुन ला गाबे
तर जाही जम्मो दुखियारी,भव ले पार लगाबे
बनबे राम के दूत लाला,सीता के तैहा पियारा रे
मोर आँखी के तारा रे


तोषन धनगंइहा...

मोर आँखी के तारा रे

मोर आँखी के तारा रे,करबे जग उजियारा रे
दीन दुखिया के सेवा करबे ,बनबे जग के दुलारा रे

तोर पाए के खातिर बेटा, कतको बरत उपवास करेंन
जूड़ बासी खाके ललना,तोर बर ताते भात करेंन
धरती दाई के रक्षा करे बर,रहिबे तैं रखवारा रे
मोर आँखी के तारा रे...

ध्रुव प्रहलाद के रद्दा म चलबे,सबके आशीर पाबे
वीर बालक खुदी बनके तै,दाई के लाज बचाबे
दुध के करजा पूरा करबे,होही तभे चुकारा रे
मोर आँखी के तारा रे...

लव कुश जइसे ज्ञानी होबे,राम के गुन ला गाबे
तर जाही जम्मो दुखियारी,भव ले पार लगाबे
बनबे राम के दूत लाला,सीता के तैहा पियारा रे
मोर आँखी के तारा रे


तोषन धनगंइहा...

मोर आँखी के तारा रे

मोर आँखी के तारा रे,करबे जग उजियारा रे
दीन दुखिया के सेवा करबे ,बनबे जग के दुलारा रे

तोर पाए के खातिर बेटा, कतको बरत उपवास करेंन
जूड़ बासी खाके ललना,तोर बर ताते भात करेंन
धरती दाई के रक्षा करे बर,रहिबे तैं रखवारा रे
मोर आँखी के तारा रे...

ध्रुव प्रहलाद के रद्दा म चलबे,सबके आशीर पाबे
वीर बालक खुदी बनके तै,दाई के लाज बचाबे
दुध के करजा पूरा करबे,होही तभे चुकारा रे
मोर आँखी के तारा रे...

लव कुश जइसे ज्ञानी होबे,राम के गुन ला गाबे
तर जाही जम्मो दुखियारी,भव ले पार लगाबे
बनबे राम के दूत लाला,सीता के तैहा पियारा रे
मोर आँखी के तारा रे


तोषन धनगंइहा...

मोर आँखी के तारा रे

मोर आँखी के तारा रे,करबे जग उजियारा रे
दीन दुखिया के सेवा करबे ,बनबे जग के दुलारा रे

तोर पाए के खातिर बेटा, कतको बरत उपवास करेंन
जूड़ बासी खाके ललना,तोर बर ताते भात करेंन
धरती दाई के रक्षा करे बर,रहिबे तैं रखवारा रे
मोर आँखी के तारा रे...

ध्रुव प्रहलाद के रद्दा म चलबे,सबके आशीर पाबे
वीर बालक खुदी बनके तै,दाई के लाज बचाबे
दुध के करजा पूरा करबे,होही तभे चुकारा रे
मोर आँखी के तारा रे...

लव कुश जइसे ज्ञानी होबे,राम के गुन ला गाबे
तर जाही जम्मो दुखियारी,भव ले पार लगाबे
बनबे राम के दूत लाला,सीता के तैहा पियारा रे
मोर आँखी के तारा रे


तोषन धनगंइहा...

शनिवार, 24 अगस्त 2019

कृष्ण जन्मोत्सव

दही चुराने माखन खाने जनम लिये है कृष्ण कन्हाई।
नटवर नागर सुख के सागर जन्म दिवस पर लाख बधाई।
पापी को मारे संत उबारे समरांगण गीता ज्ञान सुहाई।
मातु यशोदा नंद बाबा हलधर तेरे बड़के भाई।

मित्र सुदामा के झोली भरे तुम खुशियाँ सारी मंगल आये।
घर घर दीप जलाए गोपी सभी जन मिलके सोहर गाये।
दीन दुखियन के त्रास हरे प्रभु तीनों तिलोक जग हर्षाये।
आजा नटवर लाज बचाने कलयुगी द्रोपदी ये गोहराये।

तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा

शुक्रवार, 9 अगस्त 2019

देश के रखवारे


भारत के प्यारे जागो
देश के रखवारे जागो
बैरी दुवारे आये
तुम सिर उतारो जागो

सोने की नही है बारी
करो कूच की तैयारी
थर्र खाये सारे बैरी
जाने ये दुनिया सारी
रण के बाकुरों जागो
मेरे दुलारों जागो.....
बैरी दुवारे आये.....

ऊबाल भरो रग-रग में
बधायें कई है मग मे
फौलाद जिगर तुम रखलो
दंभ भरो पग-पग में
माई के लालों जागों
वीरों हुंकारों जागो....
बैरी दुवारे......

भारत की  आन बचानें
बन जा तू शेर दिवानें
अरियों के छक्के छूटे
भीड़ जा बनकर परवाने
तिरंगा थामे जागो
जयहिंद सब गालो जागो...
बैरी दुवारे....

तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद


गुरुवार, 8 अगस्त 2019

तोला देखे ले..जान

तोला देखे ले..जान...मोर जान आगे
तोला देखे ले..जान...मोर जान आगे
मन के मंदिर में जइसे भगवान आगे
मोला लागे अइसे सगरो जहान आगे
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
मन तो होथे तोला मँय निहारत रहँव
लेके बँइहा..मा तोला...झुलावत रहँव
तोर बिना...कहीं...चैन आ..वय नहीं
सुरता मा कहीं...मोला....भावय नहीं
रही-रही के तोरेच..तीर धियान लागे
मन के मंदिर में जइसे...भगवान आगे
मोला लागे अइसे..सगरो जहान आगे
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
रोज सपना मा आके सताथस काबर
राति आवै न निंदिया जगाथस काबर
कलगी पागा...के तोर मन मोर मोहे ना
आज मन के मिलौना रद्दा तोर जोहे ना
उड़ँव बनके...मँय भँवरा अरमान जागे
मन के मंदिर में जइसे.....भगवान आगे
मोला लागे अइसे....सगरो जहान आगे
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^

दीदी आई जी दीदी आई

शिशु गीत

दीदी आई जी दीदी आई।
एक बड़ी सी पुड़िया लाई।
हमने जो देखा जब ये खोल,
एक सोने की गुढ़िया पाई।

श्याम सलोनी गुड़िया प्यारी।
लगती सबको न्यारी न्यारी।
संग घूमती है संग दौड़ती,
तितली जैसे क्यारी क्यारी।

कभी न रोती हँसती हरदम।
बिन पायल के नाचे छमछम।
जब शिव जी का डमरू बाजे,
बोले मुख से बम बम बम।

गुड़िया मेरे साथ है रहती।
मीठी मीठी बातें हैं कहती।
ऊपर देखो नीलगगन में,
खिल के चाँदनी वो है हँसती।

कभी नही तुम हमें रुलाना।
कभी नही तुम हमें सताना।
दूर मुझसे तुम जाना नहीं,
दौड़ के मेरे पास में आना।

हर हर महादेव

॥हर हर महादेव॥
^^^^^^^^^^^^^●^^^^^^^^^^^^^
                        (१)
भूत भामन भोला गंगाधर,माथे म चंदा ताज।
भीख मांगतहन तोरे तीर,दरस दिखादे आज।।
                        (२)
आवय सावन चले कंवरिया, हर हर के जयकार।
मुड़ी ले  निकले  गंगा धारा , सरपन पहिरे हार।।
                        (३)
सुरहिन गइय्या के दुध लाके,भोला तोला मनाय।
धथुरा फूल फर बेल पाना,सुघ्घर तोला चढाय।।
                       (४)
पावन परब तोर सावन मा, सबझन ह सकलाय।
ओमकारा नमो शिवा जपय,बमबम धुनी लगाय।।
                        (५)
राम नाम महादेवा जपय,शिवा जपय प्रभु राम।
राम उमापति दुनो जपय तब,बनथे बिगड़े काम।।
^^^^^^^^^^^^^●^^^^^^^^^^^^^

तोर बिना

तोर बिना तोर बिना
दिल नंइ लागय
मोर दिल नंइ लागय
तिही मोरे हस जिंनगी
तिही मोर हस हर खुशी
तिही मोर हस बंदगी

कइसे कहँव
कहाँ जावँव
कइसे करँव सजदा
तोरे बिन......

1.तोरे कसम तोरे कसम जाने जाना
तोरे बर तोरे बर मँय दिवाना
कइसे जीअँव कइसे जीअँव बताना
मरना घलो मोला नंइ आय
तिही मोरे हस जिंनगी
तिही मोर हस हर खुशी
तिही मोर हस बंदगी
तोरे बिन....

जोही मोरे जोही मोरे सोना सोना
रब्बा मोरे रब्बा मोरे हस सलोना
तोरे बिना अउ कोनों नंइ होना
सुरता तोरे कतना सताय
तिही मोरे हस जिंनगी
तिही मोर हस हर खुशी
तिही मोर हस बंदगी

कइसे कहँव
कहाँ जावँव
कइसे करँव सजदा
तोरे बिन......

बुधवार, 7 अगस्त 2019

भैय्या मेरा प्यारा

पिता जैसा क्षमता है, भाई माँ की ममता है।
खुशियाँ जहान की ये,भाई से ही पाई है।
बने कभी हाथी घोड़े,भूलकर दुख सारे,
लिए मुस्कान अपने,गम को छिपाई है।
सारी सुविधाएँ दिए,बहनों पे वार भाई
खाए तूने रुखी सूखी,खीर को खिलाई है।
कृष्ण जैसा रक्षा करे,द्रौपती के चीर भरे,
आँचल को चीरकर,राखी जो बंधाई है।

भैय्या मेरी लाज रखो,जिंदगी आबाद रखो,
आपने कलाई में जो,राखी ये बंधायी है।
लाख आएँ तूफाँ कोई,या कोई बहने रोई,
मुश्किलों में आके भाई,जान जो बचायी है।
दिल को दुखाना नहीं, हमें यूँ रूलाना नहीं,
मुखड़े को देख देख, फूले न समाई है।
जग में है न्यारा भाई,सबसे है प्यारा भाई,
तारा माँ की आँखो का है,दुलारा ये भाई है।

तोषण कुमार चुरेन्द्र"धनगंइहा"
डौंडी लोहारा बालोद
छ.ग. ९६१७५८९६६७

रामायण सार

सुम्मत ले गाड़ी चलय,बनथे बिगड़े काज।
अइसे भारत देश मा,अवधपुरी हे राज।।

राजा दशरथ के महल,रानी रहिथे तीन।
देवइया पानी घलो,बेटा नइहे एक झीन।।

बेटा बनके राम हा,राजमहल मा आय।
अवधपुरी नाचे लगे,भर भर मन हरसाय।।

कैकैयी रानी सुने,राम राज के बात।
सुधबुध सबला त्याग के,खाय नही ओ भात।

बनही राजा अब भरत,राम जही बनवास।
बात मोर तै मान ले,तभ्भे आही रास।

राम सिया भाई लखन,जावय गंगा पार।
अड़हा केंवट हा घलो,तार डरे परिवार।।

पंचवटी बनगे कुटी,सुख्खा डारा पान।
हर लेगे माता जानकी,रावन जे शैतान।।

खोजत सीता राम हा,जटायु दिये उबार।
जूठा बोइर बाँटके,शबरी होगे पार।।

रघुवर अउ सुगरीव जी,सुग्घर बधे मितान।
सुखदुख सब ला जान के,किरपा दे भगवान।

मातु सिया के खोज बर,चंगा हे हनुमान।
बाधा जम्मो भाग गे,लगे राम के ध्यान।।

साधु कुटिया देखके,गये विभीषण तीर।
गोठ बात मा जान गे,मातु सिया के पीर।।

वाटिका पहुँचे तभे,मिले सिया के शोर।
राम बसा के ध्यान मा,भुँजे गली सब खोर।

पाए सिया के शोर जब,पहुँचे लंका धाम।
रावन के परिवार के,करदिस काम तमाम।।

सिया राम भाई लखन,आय अवधपुर धाम।
बरगे दीया चौमुड़ा,राम सिया के नाम।।

तोषन के हे लेखनी,लिखे रमायन सार ।
माँगत हावँव दव क्षमा,गलती देहु जी टार।

तोषन धनगंइहा

गुरुवार, 1 अगस्त 2019

झन कर गरब गुमान

झन कर गरब गुमान
झन कर गरब गुमान रे
भैय्या मोर
झन कर गरब गुमान

पाँच रतन के बने तोर काया
जेकर नँइहे ठिकाना।
चारेच दिन हरिहर पाना
पाछू परेहे अइलाना
समय रहत पहिचान
समय रहत पहिचान रे
भैय्या मोर
झन कर गरब गुमान

कौड़ी कौड़ी जोड़े खोंधरा बनाए
एक दिन छोड़ के जाना
साथी संगी सब रही जाही
जग के हे रीत पुराना
सुनले सिरतो ईमान
सुनले सिरतो ईमान रे
भैय्या मोर
झन कर गरब गुमान

माटी माटी के काया बने हे
माटी मा मिल जाही
धरम करम के करले कमाई
पुरखा हा तर जाही
झन तै बिरथा जान
झन तै बिरथा जान रे
भैय्या मोर
झन कर गरब गुमान

तोषन धनगंइहा
धनगाँव डौ.लोहारा
बालोद छ.ग.

बुधवार, 31 जुलाई 2019

धनगाँव पुरान

धरती दाई तोर मैं,
माथ नवावँव आज।
तोर दया परताप ले,
बाँचय मोरो लाज।।१।।

मोर गाँव धनगाँव के,
कतका करिहँव गोठ।
अगुवा भंडारी हवय,
गुरतुर बोली पोठ।।२।।

बीच गली हनुमान के,
अड़बड़ शोभा पाय।
कतको संकट हे रहय,
चुटकी मा सिरजाय।।३।।

शीतल रुप हे शीतला,
शीतलता पहुँचाय।
पाके छँइहा मातु के,
सब झन हे हरसाय।।४।।

बिकटराव बाबा हमर,
देवता बड़का जान।
नर नारी सब देत हे,
दुनिया भरके मान।।५।।

शिव शंकर के ठाँव हे,
गाँव नहर के तीर।
करके पूजा पाठ सब,
अपन मिटावय पीर।।६।।

देवता हावय साँहड़ा,
गजब बढ़ावय मान।
जेकर किरपा ले सुनव,
गोधन बढ़थे जान।।७।।

करथे रक्षा गाँव के,
देवता कथे सियार।
कोनो अलहन नइ रहय,
सुख पुरवक संसार।।८।।

आ जाबे बुधवार के,
रहिथे गाँव बजार।
किसम किसम के तै बिसा,
हरिहर हे तरकार।।९।।

पहिली ले हे आठवीं,
हावय जी इसकूल।
जाके सब लइका पढ़े,
करय नहीं जी भूल।।१०।।

मातर मड़ई मा घलो,
रहिथे जी बड़ धूम।
खाके बीड़ा पान तै,
जोर लगा के घूम।।११।।

रहिथन संगी साथ मा,
सबके आथन काम।
सुम्मत ले गाड़ी चले,
बगरे जग मे नाम।।१२।।

तोषन कहिथे हे सखा,
राखव मीठ जबान।
होही हमरो गाँव हा,
जग में कभू महान।।१३।।

तोषन धनगंइहा

सावन

समीक्षार्थ

सावन है मन मोहना,
        बरसे मेघ फुहार।
वन में नाचे मोरनी,
        देखो पंख पसार।।

शिव शंकर के धाम को,
         चलते भक्त हजार।
हँसते गाते झूमते,
         करते जय जय कार।।

हरा भरा खलिहान अब,
         दिखते चारो ओर।
झूमते गाते पेड़ हैं,
         नदिया करते शोर।

आते बादल देख के,
          होते मगन किसान।
धरती बदले काँचली,
          हरित दिखे है धान।।

तोषन धनगंइहा

करमा

का:-डोंगरी के तीर मा आबे
करमा के धून ला गाबे
माँदर बजाहूँ करमा ताल मा
करमा नँचाहूँ एसो साल मा

की:-हाय रे मोर छैला बाबू
करे तै दिल ला काबू
माँदर बजादे करमा ताल मा
करमा नँचादे एसो साल मा

का:-आमा के रूखवा
कोयली हा छेड़े तान
देखँव रे तोला
मैं साँझ अउ बिहान

मोर आँखी के काजर
घूमें रे मनवा बादर
माँदर बजाहूँ करमा ताल मा
करमा नँचाहूँ एसो साल मा

की:-भादो के महिना
फूले ला साँवा गा
पातर कनिहा मा
ढिले ला दाँवा गा

सुरता हा तोर आथे
रतिहा मोला जगाथे
माँदर बजादे करमा ताल मा
करमा नँचादे एसो साल मा

का:-चले पुरवइय्या
सावन महिना
बान चलाये
दुनो ये नँयना

देखे बर तोला रे
तरसथे चोला रे
माँदर बजाहूँ करमा ताल मा
करमा नँचाहूँ एसो साल मा

की:-चंदा अँजोरी के
निरमल रात
करबे अगोरा
हे दू दिन के बात

लागे हे पीरीत रे
मोर मन मीत रे
माँदर बजादे करमा ताल मा
करमा नँचादे एसो साल मा

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तोषन धनगंइहा
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद

सोमवार, 29 जुलाई 2019

आचार्य जी

आचार्य जी....

कितना सम्मानजनक शब्द है,किंतु शब्दार्थ अथाह ।जिसे समझ पाना हर किसी के लिए संभव नही है। जिन्हे इनकी समझ है वह स्वयं ब्रह्म से कम नही है। कोई भी व्यक्ति आचार्य तभी हो सकता है जब वह सही और गलत का अंतर स्पष्ट करते हुए भैय्या बहनों के अंतकरण में अपनी अमिट छाप छोड़ सके। जो अपने कर्मो के द्वारा अपने पूर्वजों ,महापुरूषों से प्रेरणा पाकर अपने अनुशरणकर्ताओं का पथप्रदर्शक बनकर संबल व प्रोत्साहित करे। आचार्य को मन ,शरीर,बुद्धि ,नैतिक व आध्यत्म दृष्टि से परिपक्व होने की आवाश्यकता है जो राष्ट्र के निर्माण में सहयोगी बन सके।जिस प्रकार कुम्हार मिट्टी से घड़ा बनाने के लिए अनेक कठिनाईयों का सामना करते हुए उसका निर्माण करता है ठीक वैसे ही आचार्य भी अपने भैय्या बहनों के सर्वागिण विकास के लिए विभिन्न प्रकार के प्रयोग नवाचार आदि प्रतिपादित करता है। श्री रामचरित्र मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसी दास जी ने अपनी धर्मपत्नी से प्रेरित होकर महान ग्रंथ की रचना की।जो आज हम सबके लिए प्रेरणादायी है।अगर हम अपने आने वाली पीढ़ी, समाज, राष्ट्र और विश्व व भैय्या बहनों का कल्याण करना चाहते हैं प्रेरणा बनना चाहते हैं   तो हमें अपने दुर्गुणो का त्यागकर एक अच्छे आचरण करने वाला आचार्य बनना होगा।

गुरुवार, 25 जुलाई 2019

दोहालरी

नाम: तोषण कुमार चुरेन्द्र

साहित्यिक उपनाम: तोषन धनगंइहा

मोबाइल नं: ९६१७५८९६६७

ईमेल: yoyokumartoshan@gmail.com

पता: ग्राम धनगाँव, पोष्ट ,थाना व तहसील -डौंडी लोहारा, जिला - बालोद (छ.ग.)
पिन ४९१७७१

मुख्यालय: सरस्वती शिशु मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय डौंडी लोहारा

सूरज बाँटे रौशनी, खुद ही जल कर रोज।
देता प्रतिपल चेतना, करता प्रतिदिन खोज॥

करलें रक्षा हम सभी, बनकर माली आज।
महकेंगी बेटी तभी, करेंगी जग में राज॥

मत समझो लाचार अब, बेटी तनुज समान।
भरती अब हुंकार है, लेकर हाथ कमान॥

कच्ची मिट्टी सा अभी, दिजे मुझे आकार।
भल मानुष मैं बन सकूँ, बचे न शेष विकार॥

महिना सावन में सखी, मयूर प्यासा रोय।
हरले धरणी पीर को, दे संदेशा कोय॥

बसन्त आती जान के, कोयल छेडे़ तान।
सर्दी गर्मी सम लगे, ऋतु की है पहचान॥

मिट्टी की मटकी भली, रखती भीतर ठंड।
शीतल जल ही बाँटती, गर्मी भले प्रचंड॥

परहित जीवन जो जिये, परहित करते काज।
उनकी होती जय सदा, दुनिया करती नाज॥

तरुवर झुकते हैं सदा, देते सबको सीख।
बनकर दानी ही रहो, कभी न मांगों भीख॥

झरझर नदिया बह रही, मीठा जल दे दान।
करती रहती हित सदा, करे न कभी गुमान॥

इन्द्रधनुष के रंग से, जगमग है संसार।
सप्त सुरों की धुन बजी, बजते राग अपार॥

प्रेम अनूठा जानिए, गढ़ता जो इतिहास।
मीरा तुलसी बन गए, मिले जहाँ मधुमास॥

अजब-गजब है प्रेम ये, हर लेता है प्राण।
मन को जब वश में करे, नैन चलाएं बाण॥

अनुभव तो होगा कभी, वो ममता वो प्यार।
जिनसे जीवन में मिले, स्नेह प्रेम संसार॥

जीवन ये अनमोल है, यूँ न कुड़े में रोल।
पाप पुण्य के खेल में, बिरथा बाजा ढोल॥

मेरी नइया धार में, हाथ नहीं पतवार।
होता साथी जो यहाँ, सबको करता पार॥

रोटी कपड़ा औ मकाँ, देता सबका साथ।
मंजिल होगी पास में, लो हाथों में हाथ॥

फल यूँ ही मिलता नहीं, देखो सब इतिहास।
कर्म बिना कुछ भी नहीं, आता है खुद पास॥

बँसुरी बनती बेंत से, मधुर सुनाती तान।
कोयल भी काली भली, देती मुख मुस्कान॥

सीख नदी से चाल तू, बढ़ना सीना तान।
चट्टानी बाधा सभी, हो जाती आसान॥

दोहालरी

नाम: तोषण कुमार चुरेन्द्र

साहित्यिक उपनाम: तोषन धनगंइहा

मोबाइल नं: ९६१७५८९६६७

ईमेल: yoyokumartoshan@gmail.com

पता: ग्राम धनगाँव, पोष्ट ,थाना व तहसील -डौंडी लोहारा, जिला - बालोद (छ.ग.)
पिन ४९१७७१

मुख्यालय: सरस्वती शिशु मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय डौंडी लोहारा

सूरज बाँटे रौशनी, खुद ही जल कर रोज।
देता प्रतिपल चेतना, करता प्रतिदिन खोज॥

करलें रक्षा हम सभी, बनकर माली आज।
महकेंगी बेटी तभी, करेंगी जग में राज॥

मत समझो लाचार अब, बेटी तनुज समान।
भरती अब हुंकार है, लेकर हाथ कमान॥

कच्ची मिट्टी सा अभी, दिजे मुझे आकार।
भल मानुष मैं बन सकूँ, बचे न शेष विकार॥

महिना सावन में सखी, मयूर प्यासा रोय।
हरले धरणी पीर को, दे संदेशा कोय॥

बसन्त आती जान के, कोयल छेडे़ तान।
सर्दी गर्मी सम लगे, ऋतु की है पहचान॥

मिट्टी की मटकी भली, रखती भीतर ठंड।
शीतल जल ही बाँटती, गर्मी भले प्रचंड॥

परहित जीवन जो जिये, परहित करते काज।
उनकी होती जय सदा, दुनिया करती नाज॥

तरुवर झुकते हैं सदा, देते सबको सीख।
बनकर दानी ही रहो, कभी न मांगों भीख॥

झरझर नदिया बह रही, मीठा जल दे दान।
करती रहती हित सदा, करे न कभी गुमान॥

इन्द्रधनुष के रंग से, जगमग है संसार।
सप्त सुरों की धुन बजी, बजते राग अपार॥

प्रेम अनूठा जानिए, गढ़ता जो इतिहास।
मीरा तुलसी बन गए, मिले जहाँ मधुमास॥

अजब-गजब है प्रेम ये, हर लेता है प्राण।
मन को जब वश में करे, नैन चलाएं बाण॥

अनुभव तो होगा कभी, वो ममता वो प्यार।
जिनसे जीवन में मिले, स्नेह प्रेम संसार॥

जीवन ये अनमोल है, यूँ न कुड़े में रोल।
पाप पुण्य के खेल में, बिरथा बाजा ढोल॥

मेरी नइया धार में, हाथ नहीं पतवार।
होता साथी जो यहाँ, सबको करता पार॥

रोटी कपड़ा औ मकाँ, देता सबका साथ।
मंजिल होगी पास में, लो हाथों में हाथ॥

फल यूँ ही मिलता नहीं, देखो सब इतिहास।
कर्म बिना कुछ भी नहीं, आता है खुद पास॥

बँसुरी बनती बेंत से, मधुर सुनाती तान।
कोयल भी काली भली, देती मुख मुस्कान॥

सीख नदी से चाल तू, बढ़ना सीना तान।
चट्टानी बाधा सभी, हो जाती आसान॥

गुरुवार, 18 जुलाई 2019

बाबा शिव शंखर के धाम


*बाबा शिव शंखर के धाम...*


(लड़का)

चल ना जाबो दुनो झन मंगलू के दाई

शिव शंखर के धाम


(लड़की)

चल ना जाबो दुनो झन बुधिया के बाबू

शिव शंखर के धाम...


(संयुक्त)

बेलपाना अउ धथरा चढ़ाके बना लेबो बिगड़े काम....


(लड़का)

सावन महिना भोले बाबा के मन ला गजब सुहाथे ना

हाथ मा डमरू तिरशुल साजे सबके मन ला भाथे ना

आसन लगाये धुनी रमाये गाँजा पियइ हे काम

चल ना जाबो दुनो झन मंगलू के दाई 

शिव शंखर के धाम


(लड़की)

गंगा के पानी धरे कंवरिया अवघड़िया ल मनावय

बोल बम बोल बम बोल के नारा जयकारा ल लगावय

लागे ना भूख पियास रे संगी नइ लागे अउ घाम

चल ना जाबो दुनो झन बुधिया के बाबू

शिव शंखर के धाम


(लड़का)

उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम बाबा के हावय धाम

चल रे कंवरिया शिव के गुजरिया करले कोटि प्रणाम

भजले तैहा घड़ी दू घड़ी बिहना मंझनिया शाम

चल ना जाबो दुनो झन मंगलू के दाई 

शिव शंखर के धाम


(लड़की)

पारबती दाई तोरे सुवारी पूजय बनके पुजारी

मोरो तँय बेड़ा पार करदे आए हँव मँय दुखियारी

शुभ लाभ तोरे घर दीया,बेटा गनेशे नाम

आगेन आगेन दुनो झन बुधिया के बाबू

शिव शंखर के धाम


(संयुक्त)

पागेन पागेन दुनो झन मंगलू के दाई/बुधिया के बाबू

शिव शंखर के नाम


तोषण धनगंइहा 

धनगाँव डौंडी लोहारा

बालोद

शुक्रवार, 12 जुलाई 2019

सीख

सीख

मीत  बनाना  सीख ले।
पेड़   लगाना  सीख ले।

सुख दुःख के साथी ये,
रीत  निभाना  सीख ले।

झुक जाते सब के लिए,
माथ  नवाना  सीख ले।

देते सबको वन औषधि,
दवाई  बनाना सीख ले।

काटने वाले निर्मम हो,
चेत  लगाना  सीख ले।

मिले जिनसे शुद्ध हवा,
गुल महकाना सीख ले।

हो सावन शाम सुहानी,
मेघा  बुलाना सीख ले।

सारा आलम  हरा भरा,
राह दिखाना सीख ले।

परिंदों के मत शत्रु बन,
घरोंदा बनाना सीख ले।

कहे सबसे तोषन प्यारे,
जग  बचाना  सीख ले।

तोषन धनगंइहा
धनगाँव डौ.लोहारा
बालोद

आए हावँव तोर तीर

आए हावँव अम्बे रानी तोर चरन तीर
हर ले दुख मोर सब मिट जावय पीर

जग के तिही महातारी हावस सब झन जानय
ममता मूरत अंतरयामी तोला सब झन मानय
पियादे तैहर मोला निर्मल ममता के नीर.....

अम्बे मइय्या तोर ले चले ये सारी दुनिया
पूजा करे तोर दाई सब देवता रीषि मुनिया
भोग लगावय तोला भरके कटोरा खीर.....

तोषन धनगंइहा
धनगाँव डौंडी लोहारा

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