शनिवार, 2 फ़रवरी 2019

तोर डेहरी

तोर डेहरी मा दुर्गा दाई
जमके भराथे मेला ओ
दरसन खातिर भगतन के
लगथे गजब के रेला ओ

फूल दसमत के चढ़ावंव
आरती तोर उतारंव मंय
टूटहा फूटहा भाखा ले दाई
गुण ल तोर गावंव मंय
पान सुपाड़ी धजा लेके
देवंव नरिहर के भेला ओ
दरसन खातिर भगतन के
लगथे गजब के रेला ओ

बड़े बड़े रीशि मुनि ल तारे
महूल थोरिक सहार दे दे
ये दुनिया म हवंंव दुखिया
अपनेच मया दुलार दे दे
जग के तैहर गुरूमाता दाई
अपन बनाले तैं चेला ओ
दरसन खातिर भगतन के
लगथे गजब के रेला ओ

आस पुराए सबके तैहर
मोरों आस पूराबे ओ
तोरेच लइका मैं हंव दाई
मोला झन भूलाबे ओ
अंगुरी धरके रेंगाले संगे
रही जावंव न अक्केला ओ
दरसन खातिर भगतन के
लगथे गजब के रेला ओ

पूजा पाठ कुछु नंइ जानव
कोंदा लेड़गा तोषण अंव
बनीभूती सं तोर आशीष ले
सबला पालत पोसत हंव
सुख के बरसा करदे दाई
झन हो दुख के झमेला ओ
दरसन खातिर भगतन के
लगथे गजब के रेला ओ

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडीलोहारा
९६१७५८९६६७

शनिवार, 19 जनवरी 2019

घूंट कड़वा इश्क़ का

घूंट कड़वा इश्क़ का अब पीया नहीं जाता।
बिना तेरे दीदार के अब जीया नहीं जाता।
कटेंगे कैसे यूं पल पल हर दिन ऐ तोषण,
तन्हाई में बेचैन दिल अब सीया नहीं जाता।

गुरुवार, 17 जनवरी 2019

गणतंत्र दिवस

एक प्रयास
मनहरणघनाक्षरी /कवित्त छंद में

आन बान शान देखो,देश का निशान देखो,
लहर लहर करे,नीले आसमान में।
इसकी निराली बात,सबसे है यह खास,
वीरों की थाती मानों,बसा निगेबान में।
लाल बाल पाल भिड़े, आजादी के गीत लिये,
बन गुल जो ये खिले,मेरे बागबान में।
हमने आजादी पायी,तन मन हरषायी,
हुआ गणतंत्र अब,देखो हिन्दूस्थान में।

माथ मैं नवाऊं आज,जिनपे है हमें नाज़,
जय जय करता है,सारा हिन्दूस्थान है।
क्रांतिकारी बनकर,सुख दुःख तजकर,
मेरे हिन्दूस्थान को ये, बनाया महान है।
भित पट तुम खोलो,भारत की जय बोलो,
झूमे नाचे गाए गीत,खेत खलिहान है।
'तोषण' ये आज कहे, मिलकर सब रहे,
एकता के दीप जले,मिले परवाज़ है।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बुधवार, 9 जनवरी 2019

अनूठा

प्रदत्त शब्द-अनूठा, अनुपम,अनोखा,अजब
आधारित दोहा सादर अभिवादन के साथ संप्रेषित

1.
अनुपम  तेरी  है  दशा , अनुपम  तेरी  रीत।
बिन  तेरे  दीदार  से , कैसे होगी  प्रीत।।

2.
प्रेम  अनूठा  जानिए , गढ़ता  जो  इतिहास।
मीरा  तुलसी  बन चलें , जीवन  हो  मधुमास।।

3.
अजब  - गजब  है  प्रेम  ये, हर  लेती  है  प्राण।
मन  को  करता  वश में  , नैनों  की  ये  बाण।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मंगलवार, 8 जनवरी 2019

बिरह गीत

*बिरह गीत*

मोरले का अइसे गलती होगे भूला दिए मोर प्यार ला।
बिन बांती के दिया बरोबर करदेस मोर संसार ला।

सपना रिहिस तोला रानी बनाके मया के कुरिया बसातेंव।
जिनगी के मोर बगइचा मा मया के फूल खिलातेंव।
नंइ सके अब सकंव रे रानी तोर बिरहा के मार ला।
बिन बांती के दिया बरोबर करदेस मोर संसार ला।

घेरे रहिथे मोला दुख के बादर सुरता तोर रोवाथे।
बरसा बरोबर झरथे रे आंसू बइरी मोला सताथे।
कब तै आबे मोर तीर जोही जोहत रहिथंव तरिया पार ला।
बिन बांती के दिया बरोबर करदेस मोर संसार ला।

बइहा बनाके कहां भूलागेस किंजरंव नंदिया के छोर मा।
झूलत रहिथे तोरेच चेहरा मोर आंखी के कोर मा
तरसे 'तोषण' आजा 'खुशी' तैं पाए बर दीदार ला।
बिन बांती के दिया बरोबर करदेस मोर संसार ला।

रचनाकार
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
पिन ४९१७७१
मो.९६१७५८९६६७

सोमवार, 31 दिसंबर 2018

नवा बरस

*नवा बरस के नवा सुरूज के नवा सतरंगी किरण के संगे संग तोषण कुमार चुरेन्द्र के डहर ले नवा बरस २०१९ के गाड़ा गाड़ा बधई अउ शुभकामना...*

🍃🍂🍁🌾🌹🥀🌺🌸🌼
*नवा बरस के नवा गोठ।*
*सियान मन कहिथे पोठ।*
*लगथे सुनें मा नानचुन,*
*समझे मा बड़का रोंठ।*
🌷🌻🌼🌺🥀🌾🍁💐🍃
*नवा बरस म कुछ नवा होय।*
*गोठियाय म कुछू नंइ होय।*
*मन लगाके करम करव,*
*तब नवा अंजोर कहीं होय।।*
🌷🌻🌼🌺🥀🌾🍁💐🍃
*चिल्ला चिल्ला के काहत हावय।*
*नवा साल बड़ मनावत हावय।*
*कांटत हावय कुकरा बोकरा,*
*पी पी के बड़ मेछरावत हावय।।*
🌷🌻🌼🌺🥀🌾🍁💐🍃
*पाछू साल ले कुछू सीख लेवव।*
*सोच बिचार बढ़िहा नीक लेवव।*
*अवईया पीढ़ी सलामत रहय,*
*अईसन जोरदरहा सीख देवव।।*
🌷🌻🌼🌺🥀🌾🍁💐🍃
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
*९६१७५८९६६७*
🌷🌻🌼🌺🥀🌾🍁💐🍃

रविवार, 30 दिसंबर 2018

व्यंगात्मक दोहे तोषण के

*कपट कुटिल की चाल है,पिटता बिरथा ज्ञान।*
*बढ़ता देखे और को,खींचे अलग कमान।।*

*आया देखा साब को,बजा ताल से ताल।*
*तोषण बदले राह अब,देख गैर की चाल।*

*देखा हमने आज भी,व्यापित अवसर वाद।*
*खुद ही करने लग गये,लेकर माइक नाद।।*

सोमवार, 10 दिसंबर 2018

मया के कारी बदरा...

मया के कारी बदरा छाए,रिमझिम बरसय पानी
होगेंव दिवाना तोर मया म होगे दिल चानी चानी
ते आजा सजनी मोर संग ना

बोली ले झरथे मया के फूलवा,अंग अंग ल महकाथे
सर सर बोहिथे पवन झकोरा,मनवा मोर लहराथे
तोर बिना रे कारी कोयलिया
सुन्ना मोर जिनगानी
होगेंव दिवाना..........

तरसत रहिथंव तोर मया बर,कांही मोला नंइ भावय
तोर बिरह के पीरा रे जोही,रही रही मोला सतावय
तोर बिना जीए नंइ सकंव,लगेहे मोला बानी
होगेंव दिवाना.......

आजा गोरी तोला बलावंव,सुनले मोरो गोहार ला
झन तंँय तरसा मोर जिवरा ल,समझलेबे मोरो प्यार ला
तोर मया के मंँय हँव राजा,मोर मया के तँय रानी
होगेंव दिवाना.......

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडी लोहारा

मंगलवार, 27 नवंबर 2018

सुरता

सुरता हा आथे तोर, आरो ले ले मोर।
तोर मया म होगेंव दीवाना, धीरज नँइहे थोर।।
सुरता.....

कोन जनी का रोग हमावय,खवई पियई कछु नँई भावय।
तोर मया के बदरा बैरी,रही रही आँखी म छावय।।
मोर हिरदे के भीतरी, झुले चंदा चेहरा तोर....
सुरता.....

कोयली सही तोर बोली,मन ल मोर भावय ना।
बिना तोला देखे गोरी,रहय नँई तो जावय ना।।
जिनगी मा आके तैहा,करदे जग अंजोर....
सुरता....

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडी लोहारा

सोमवार, 19 नवंबर 2018

मतदान

शुभ बिहान

संगी मत वाला हरव,करलव मत के दान।
सोच समझ नेता चुनव,लाही नवा बिहान।।

कीमत समझव वोट के,बनथे जी सरकार।
जावव दव मतदान सब,होवय झिन बेकार।।

नेता मन के छाँट लव,देवव सबझन वोट।
हक के खातिर मिल चलव,झन लेवव गा नोट।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667

तुलसी बिहाव

*तुलसी बिहाव के ऊपर दोहा तोषण के*

जनम धरे शिव तेज ले,हवय जलन्धर नाँव।
थर-थर काँपय देवता,भागय डरके गाँव।।

बड़भगमानी हे सती,बिन्दा जेकर नाँव।
बरन करय जलन्धर के,सुघ्घर परके पाँव।।

बढ़थे अत्याचार जब,देव करय गोहार।
महादेव भोले करव,दानव के खोहार।।

लड़त लड़त जलन्धर ले,शंखर मानय हार।
जाके हरि के तीर मा,माँगत हे उपचार।।

मानय बतिया देव के,हरि होगे तइयार।
बिन्दा के सत भंग बर,चलिस हवय जी द्वार।।

होवय बिन्दा अपबरित,मरय जलन्धर आज।
सतबल ले हे जानलिस,रमारमन के राज।।

होवय शापित जब बिसनु, बनगे सालीग्राम।
होगे बिन्दा अब अमर,धरके तुलसी नाम।।

रचना तोषण के हरे,अमर कथा के सार।
भूलचूक ला दव छमा,करदव मोला पार।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667

गुरुवार, 4 अक्टूबर 2018

नहीं जाता

छूने की चाहत चाँद को पर हाथ नहीं जाता
गेसुओं पे उसके सोने का यूँ दिन नहीं आता
बड़ी ही कश़्मकश़ में है जिन्दगी अपनी यारों
गम ए जुदाई का यूँ ही जहर पीया नहीं जाता

रविवार, 30 सितंबर 2018

वेश


अलग-अलग पहचान है,अलग- अलग है वेष।
भारत की ये शान है,.......कहीं नहीं है क्लेष।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बुधवार, 26 सितंबर 2018

बेटी ल सूरुज बनावव

करत हवँव गोहार मँय नवा अँजोर बगरावव।
चंदा उइथे रातकून बेटी ल सूरुज बनावव।

एक कुल बेटा सम्हाले बेटी दुकुल सँवारत हे।
बनके दाई इही बेटी ममता अपन लुटावत हे।
परिवार रुप ये बगिया म फूल सही सजावव।
चंदा उइथे रातकून बेटी ल सूरुज बनावव।१।

पढ़ही लिखही स्कुल म नाँव देश के करही।
दाई ददा गाँव समाज के मान एकर ले बढ़ही।
देवारी के दीया बनाके घर घर एला जलावव।
चंदा उइथे रातकून बेटी ल सूरुज बनावव।२।

चिरई बन चहकन दव ए खुला आसमान म।
बेटी ल घलो सिखावव कइसे जिथे जहान म।
उड़त रहे चारो मुड़ा अइसन पतंग बनावव।
चंदा उइथे रातकून बेटी ल सूरुज बनावव।३।

कोख प पलत बेटी ल ये दुनिया आन दव।
करन देवव सपना पूरा संगी हो पहिचान दव।
बेटा बेटी के भेदभाव मन ले दूरिहा भगावव।
चंदा उइथे रातकून बेटी ल सूरुज बनावव।४।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
ग्राम धनगाँव डौंडी लोहारा
जिला बालोद छ.ग.४९१७७१
मो.९६१७५८९६६७

मंगलवार, 25 सितंबर 2018

गम न हुई


दूरियाँ ये दिलों की कभी कम न हुई।
उनकी यादों में आँखें कभी नम न हुई।
कैसे जुदा हो गई मुझसे नादाँ वो खुशी,
जुदाई में जिंदगी ये  कभी गम न हुई।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

सुरता

सुरता मोर वोह कभू करय नहीं।
बात मोर थोरको कभू धरय नहीं।
कब तक मँय जिहूँ अइसने संगी,
जीव घलक मोर अब मरय नहीं।

शनिवार, 15 सितंबर 2018

मैं तेरी परछाई हूँ

मैं तेरी परछाईं हूँ मुझे छोड़ कहाँ तुम जाओगे।
मैं तेरी राधिका प्यारी मुझसी कहाँ तुम पाओगे।
माखनचोर केशव मेरे तुझमे मैं हूँ मुझमे तुम हो,
अमिट प्रेम का रंग हे कान्हा कहाँ तुम लगाओगे।
तोषण कुमार चुरेन्द्र

बुधवार, 12 सितंबर 2018

अपनी ना रही

अनजाने दुनिया में अब कोई उम्मीद अपनी ना रही।
माना है जिसे  जान से भी ज्यादा वो अपनी ना रही।
प्यार भरी बाते वो वादे वो कसमें अब लगते हैं झूठे,
गम का तो नाम नही यारों 'ख़ुशी' भी अपनी ना रही।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

रविवार, 2 सितंबर 2018

दोहे तोषण के

*कृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर आप सभी को बधाईयांँ व ढेर सारी शुभकामनाएँ*

*कृष्ण जन्माष्टमी पर तोषण के आठ दोहे*

नमन करूँ नटवर को,है जो चित के चोर!
माखन जिनका भोग प्रिय,मुकुट पंख है मोर!!१!!

पुण्य दिवस है आज ये,करलो मंगल गान!
देने गीता ज्ञान को,जनम लिए भगवान!!२!!

नंदलाल के घर चले,मध्य रात भगवान!
जन्में कारागार में,देवकी वसु महान!!३!!

गिरवर नटवर नाम है,वासु देवकी लाल!
मीरा राधा है प्रेयसी,है काली के काल!!४!!

देख मित्र के पाँव को,बहे नयन से धार!
मुट्ठी चावल तीन के,दिया बड़ा उपहार!!५!!

रथ हाँके बन सारथी,जरा नही अभिमान!
समरभूमि के बीच में, देते गीता ज्ञान!!६!!

आजा मेरे फिर प्रभो,रख दो सबकी लाज!
भारत माता रो रही,द्रवित होकर आज!!७!!

सुख शांति चहुँ ओर हो,बहे प्रेम की धार!
तोषण की अर्जी सुनो,जरा करो उपकार!!८!!

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
छत्तीसगढ़ ४९१७७१
मो.९६१७५८९६६७

शनिवार, 25 अगस्त 2018

राखी के तिहार आगे

राखी के तिहार आगे, तिहार आगे राखी के!
अँड़े सीमा म भइय्या सखी ,राखी हे मोर बिन पाखी के!!

गाँव के खेती खार पूछथे मोर बेटा जवान आगे
रुख राई डोंगरी पहाड़ी संग बदरा घलो रुसागे.
खोड़वा होगे तोर बिन भइय्या मोर पाँव बिन बइशाखी के....
अँड़े सीमा म......

गाँव के गउठान पूछतहे कब आबे तँय गाँव म.
झुलना झूलबे कब तँय बेटा लीम पीपर के छाँव म.
आजा माटी के बंदन करले पीरी जुड़ा ले छाती के....
अँड़े सीमा म......

दाई ददा के राजा बेटा मोर दुलरवा भइय्या कहिथँव.
राखी बर आबे भइय्या मोर आस लगाए बइठँव.
निहोरा करत ढर ढर ढरथे आँसू मोर आँखी के....
अँड़े सीमा म......

गुरुवार, 23 अगस्त 2018

छत्तीसगढ़ के बनइय्या नँइहे

*छत्तीसगढ़ के बनइय्या नँइहे*

छत्तीसगढ़ के बनइय्या नँइहे.
कविता के पढ़इय्या नँइहे.
मोर भारत के स्वाभिमान ल,
अटल कस बढ़इय्या नँइहे.
१.
बनके अनु ले परमानु जइसे,
नवा शक्ति संचार भरिस.
मोर देश के अंग अंग मा,
सुरुज किरन कस अंजोर करिस.
गुड़हा असन बोली भाखा म
बोल गुरतुर गोठयइय्या नँइहे.
मोर भारत के.......
२.
बइरी ला घलोक संगी जानय,
सदा अपन जे गला लगाइस.
अमीरी गरीबी के खँचवा पाटय,
दुखिया मनबर भला कहाइस.
मोर भारत महतारी के झरझर,
ढरत आँसू के पोछइय्या नँइहे.
मोर भारत के.......
३.
बनके भारत के मुखिया जेहा,
भारत माता के सेवा बजाइस.
सबझन के रही वो दुलरवा,
दुनिया मा भारत रतन कहाइस.
कभू राजनेता,कभू कवि बनके,
मन के पीरा बतइय्या नँइहे.
मोर भारत के.......
४.
रोवत हे पूरा भारतवासी,
ढर ढर आँसू बोहावत हे.
लहुट के आबे अउ अटल,
मोर छत्तीसगढ़ गोहरावत हे.
तोर छोड़ अब ये तोषण के,
अउ कोनों पुछइय्या नँइहे.
मोर भारत के......

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
छत्तीसगढ़ ४९१७७१
मो.९६१७५८९६६७

चुपचाप झिन रहा

चुप चाप झिन रहा,कुछु कहीं तहूँ कहा,
मनवा के बतिया ल,खोल तैं जुबान ले,
गोठ मोर सुनले तैं,थोर देख लहुट के,
तन झन छुट जाय,मोर ये परान ले.
दिल मा समाय तैहा,नँइ भूलों तोला मैहा,
तोर हँव दिवाना मैं,अपन तैं मान ले.
कहर बरपा न तैं,मोला तरसा न तैं
मोर मया ल पगली,थोरकुन मान ले.

तोषण कुमार चुरेन्द्र

शुक्रवार, 17 अगस्त 2018

अटल रहा है सदा

*मनहरण घनाक्षरी*

*अटल रहा है सदा,दिल में बसा है सदा,*
*अटल रहेंगे सदा,पूरे हिंदुस्तान में.*
*बन के जगनायक,दीनों के ये सहायक,*
*फूल बन महके ये,सारे गुलिस्तान में.*
*देश के चिराग बने,देखो सीना ताने चले,*
*निकले ये शेर सम,भारत की शान में.*
*याद सदा आयेंगे वो,दिल में समायें हैं जो,*
*अटल बिहारी बसे,तन मन प्राण में.*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
*धनगाँव डौंडी लोहारा*
*छत्तीसगढ़*

मंगलवार, 14 अगस्त 2018

मेरे भारत की पावन धरती

मेरे भारत की पावन धरती
वीरों ने जहाँ जन्म लिया...
जहाँ गोप बनकर विष्णु ने
गीता गंगा का मर्म दिया...

उत्तर में हिमालय चोटी
है भारत का जो ताज रहा..
करते है जिसकी रक्षा नित
सेनाओं पर है नाज रहा...

हर घर में हो उत्साह नव
हर दिन होली दीवाली हो
दिल से दिल के तार मिले
और प्यार कहीं ना खाली हो...

सर्दी गर्मी बरसात सहे
ऐसा दिल में उत्साह रहे
नवऊर्जा वीर जवानों की
नवयौवन के रग-रग में बहे...

भारत माता के चरणों में
अपना जो शीष कटाएगा
सच कहता हूँ दुनिया वालों
दुनिया में पूजा जाएगा...

पहनें कपड़े खायें रोटी
रहने सबकाे मकान मिले
हर बेटा बेटी शिक्षित हो
गुलशन-गुलशन में गुल खिले...

हिन्दू मुस्लिम और सिख ईसाई
भारत की पहचान बने
अनेकता में रहे एकता
ऐसा हिन्दुस्थान बने...

रविवार, 12 अगस्त 2018

आज पंद्रह अगस्त


आज पंद्रह अगस्त,दिवस है आजादी का,
मिलकर भारतीय,ध्वज फहराएंगे!!
करें याद हम मिल,अपने बलिदानी को,
नतमस्तक होकर,शीष ये नवाएंगे!!
खुशी का ये दिन आया,है सारा जग गा रहा,
तरंग है आजादी का,गीत नया गाएंगे!!
हो वतन मे खुशियाँ,तोषण का अरदास,
स्वच्छ रहे भारत ये,अच्छे दिन लाएंगे!!

शुक्रवार, 10 अगस्त 2018

हरा भरा खलिहान

हरा भरा खलिहान,संस्कृति की पहचान,
परब हरियाली का,बड़ा ही निराला है!!
महीना है सावन का,जय हो भोलेनाथ की,
छोड़छाड़ अमृत को,पिए विष हाला है!!
मगन होते किसान,लहराते देख धान,
बनकर हलधर,देश को संभाला है!!
अन्न धन घर द्वार ,अपनों का साथ मिले,
माता पिता साथ रहे,वर्षो हमें पाला है!!

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
छत्तीसगढ़

मत रोक मां तू मुझे

मत रोक मां तू मुझे, सुन ले पुकार  मेरी,
हिमालय चोटी पर, जयहिंद गाऊँगा।
जयहिंद गाऊँगा जो, सिंह की दहाड़ लिये,
अरियों की छाती पर, ध्वज लहराऊँगा।
ध्वज लहराऊँगा मैं, जन गण गान होगा,
पावन ये धरती की, तिलक लगाऊँगा।
तिलक लगाऊँगा ये, मत रोना माता मेरी,
साथ मैं तिरंगे पर, लिपटा जो आऊँगा।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
छत्तीसगढ़

आओ मिल हम साथी

१.
आओ मिल हम साथी,लेके चले परवाज,
भारत की आन बान,जो अपने हाथ है!!
देश के जवान हम,ये जिंदगी लुटाएँगे,
मातृभूमि की आशीष,किस्मत भी साथ है!!
है पुकारे भारतीय,सिंह ललकार लिये,
ये हमेशा चमकता,हिमालय माथ है!!
तोषण ये कहता है,माँ की जयगान कर,
साथ तेरे देंगे स्वयं,शंभू भोलेनाथ है!!
२.
आज पंद्रह अगस्त,दिवस है आजादी का,
मिलकर भारतीय,ध्वज फहराएंगे!!
करें याद हम मिल,अपने बलिदानी को,
नतमस्तक होकर,शीष ये नवाएंगे!!
खुशी का ये दिन आया,सारा जग है गा रहा,
तरंग है आजादी का,गीत नया गाएंगे!!
हो वतन मे खुशियाँ,तोषण का अरदास,
स्वच्छ रहे भारत ये,अच्छे दिन लाएंगे!!
३.
हरा भरा खलिहान,संस्कृति की पहचान,
परब हरियाली का,बड़ा ही निराला है!!
महीना है सावन का,जय हो भोलेनाथ की,
छोड़छाड़ अमृत को,पिए विष हाला है!!
मगन होते किसान,लहराते देख धान,
बनकर हलधर,देश को संभाला है!!
अन्न धन घर द्वार ,अपनों का साथ मिले,
माता पिता साथ रहे,वर्षो हमें पाला है!!
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तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव,डौंडी लोहारा,
छत्तीसगढ़ ९६१७५८९६६७

बुधवार, 8 अगस्त 2018

तिरंगा लेके हाथ में

*विधा:-मनहरण घनाक्षरी*

*तिरंगा लेके हाथ में*
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तिरंगा लेके हाथ में,आओ बढ़ाएँ कदम,
मातृभूमि की खातिर,मिटे साथियों हम.
है हिमालय कहता,अरियों के तोड़ें भ्रम,
केसरी की चाल सम,करें प्रहार हम.
भारत अब क्यूँ सहे,ये नापाक वार क्रम,
भरें अब रुधिर में,जोश अक्षय दम.
नाज करे दुनिया ये,साज जय सरगम,
तोषण कहे आज से,हो वन्दे मातरम्.
=========================
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
छत्तीसगढ़

भारत का स्वाभिमान

समीक्षार्थ
विधा:- मनहरण घनाक्षरी

भारत का स्वाभिमान
=========================
भारत का स्वाभिमान,देव मुनि की संतान.
देश हमारा न्यारा है,प्यारा ये हिन्दुस्थान.
गगनचुंभी पर्वत,दक्षिण हिन्द महान.
गंगा की पावन धारा,करती गुणगान.
वीर शिवा की धरती,बेटा भगत की शान.
माँ खातिर मर मिटे,आजाद बलवान.
मिल कसम लें आज,बढ़े तिरंगे का मान.
त्याग तपस्या की गाथा,गुँजता जयगान.
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तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
छत्तीसगढ.

शनिवार, 28 जुलाई 2018

नारी शक्ति देश की

*नारी शक्ति देश की*

नारी शक्ति देश की,जाग जाग जाग
बुरी शक्तियों को अब,दाग दाग दाग

द्रोपती सीता जैसी,बन जाओ दुर्गा काली।
आज ये दिखा सबको, कितनी है शक्तिशाली।

बैरियों के मुख निकले भाग भाग भाग......!

जीजा जैसी ज्ञान दे,लक्ष्मी सा प्राण दे।
अनुसुइया की धरती पर, सतित्व का मान दे।

मधुबन राधा गाये,फाग फाग फाग.......!

कलयुग की नारी हो,दुष्ट को संघारी हो।
आये जो समक्ष तेरे,सबको ललकारी हो।

छोड़ अनुराग दिखा,राग राग राग......!

ममता तेरी प्यारी है,जग से भी न्यारी है।
इस धरा की गोद में,राम को उतारी है।

जिसकी सेवा में लगे,नाग नाग नाग.....!

दिया तुने हमें भगत,और वीर आजाद को।
डिगा सके न शत्रु,तेरे इन फौलाद को।

लेकर बंदुक गोली,दाग दाग दाग.....!

एक तेरी जय हो,ऐसा कोई समय हो।
सबका तुझे मान मिले,सबका प्रणय हो।

ले चिंगारी धधके,आग आग आग.....!

©®
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
छत्तीसगढ़ ४९१७७१
मो:-९६१७५८९६६७
http://arhkepagakalagi.blogspot.com

शुक्रवार, 27 जुलाई 2018

हाथ ले मशाल तू

*हाथ ले मशाल तू*

*उठ मेरे लाल तू,बनके महाकाल तू।*
*घन तिमिर को चीर दे,हाथ ले मशाल तू।।*

संकटों की राह पर,
दम्भ भरले बाँह पर।
भीड़ तू चट्टान से,
जय कर तू आह पर।

*ध्वज तिरंग सम्हाल तू,रूप ले विकराल तू।*
*घन तिमिर को चीर दे,हाथ ले मशाल तू।।१।।*

अस्मत लुटे नहीं,
किस्मत मिटे नहीं।
हो विचार क्रांति का,
हिम्मत डिगे नहीं।

*बनके भूचाल तू,हो प्रलयंकाल तू।*
*घन तिमिर को चीर दे,हाथ ले मशाल तू।।२।।*

दुश्मनों का चैन लूट,
होकर सब एकजूट।
कर दे तू शंखनाद,
दुश्मनों के छक्के छूट।

*बनके लाल बाल पाल तू,दिखा जरा कमाल तू।*
*घन तिमिर को चीर दे,बाथ ले मशाल तू।।३।।*

केसरी दहाड़ बन,
हिमालय पहाड़ बन।
काश्मीर की घाटी में,
फौजी की हुंकार बन।

*खींच दुश्मनों के खाल तू,कर दे धरा लाल तू।*
*घन तिमिर को चीर दे,हाथ ले मशाल तू।।४।।*

पापियों की हार हो,
दुष्टों का संघार हो।
एक तेरी जय गुँजे,
हाथ जो तलवार हो।

*कर दे धमाल तू,हो जाये कमाल तू।*
*घन तिमिर को चीर दे,हाथ ले मशाल तू।।५।।*

रगो में रवान भर,
जोश को जवान कर।
ले कलम तू हाथ में,
देश को महान कर।

*जोहर का लाल तू,खूँ में भर ऊबाल तू।*
*घन तिमिर को चीर दे, हाथ ले मशाल तू।।६।।*

©®
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
छत्तीसगढ़, ४९१७७१
मो:-९६१७५८९६६७

शुक्रवार, 20 जुलाई 2018

मोबाइल

जेती देखँव तेती सब धरे हवय मोबाइल,
नइ रहय बैलेंस तिहा मारत हे इसटाइल,
खिंचत रहिथे बज्जरहे सेल्फी फोटू,
मन माड़े दे दे के बेंदरा कस इसमाइल

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मंगलवार, 17 जुलाई 2018

होगे मन बइमान रे

होगे मन बइमान रे भइय्या, होगे मन बइमान रे.
जेती जाथँव तेती देखथँव, मइनखे हे शइतान रे. भइय्या होगे मन बइमान

कहूँ बेटी के लुटत हे इज्जत,कोनो दारु पीके मारत हे.
चोर ढोर के संगत करे,जिनगी ल नइ सँवारत हे.
बइठे खेलत हावय जुआ,का कोलकी मइदान रे
होगे मन बइमान रे भइय्या, होगे मन बइमान रे.

ददा दाई के कमई म फुदरे,नटेर के आँखी देखावत हे.
छोटे बड़े के लिहाज न थोरको,सरम ल बेंच के खावत हे.
सोंच सोंच के तोषण काँपे,कइसे होही कलियान रे
होगे मन बइमान रे भइय्या, होगे मन बइमान रे.

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मंगलवार, 10 जुलाई 2018

जय जोहार

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*होवत बिहना झोक ले,.....मोरो जय जोहार!*
*राम नाम के संग में....,मिलही खुशी अपार!!*
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*सुग्घर जिनगी हे मिले,....करले तँय उदधार!*
*जपले तँय हरि नाम ला,तब मिलही भंडार!!*
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