गुरुवार, 4 अक्टूबर 2018

नहीं जाता

छूने की चाहत चाँद को पर हाथ नहीं जाता
गेसुओं पे उसके सोने का यूँ दिन नहीं आता
बड़ी ही कश़्मकश़ में है जिन्दगी अपनी यारों
गम ए जुदाई का यूँ ही जहर पीया नहीं जाता

रविवार, 30 सितंबर 2018

वेश


अलग-अलग पहचान है,अलग- अलग है वेष।
भारत की ये शान है,.......कहीं नहीं है क्लेष।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बुधवार, 26 सितंबर 2018

बेटी ल सूरुज बनावव

करत हवँव गोहार मँय नवा अँजोर बगरावव।
चंदा उइथे रातकून बेटी ल सूरुज बनावव।

एक कुल बेटा सम्हाले बेटी दुकुल सँवारत हे।
बनके दाई इही बेटी ममता अपन लुटावत हे।
परिवार रुप ये बगिया म फूल सही सजावव।
चंदा उइथे रातकून बेटी ल सूरुज बनावव।१।

पढ़ही लिखही स्कुल म नाँव देश के करही।
दाई ददा गाँव समाज के मान एकर ले बढ़ही।
देवारी के दीया बनाके घर घर एला जलावव।
चंदा उइथे रातकून बेटी ल सूरुज बनावव।२।

चिरई बन चहकन दव ए खुला आसमान म।
बेटी ल घलो सिखावव कइसे जिथे जहान म।
उड़त रहे चारो मुड़ा अइसन पतंग बनावव।
चंदा उइथे रातकून बेटी ल सूरुज बनावव।३।

कोख प पलत बेटी ल ये दुनिया आन दव।
करन देवव सपना पूरा संगी हो पहिचान दव।
बेटा बेटी के भेदभाव मन ले दूरिहा भगावव।
चंदा उइथे रातकून बेटी ल सूरुज बनावव।४।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
ग्राम धनगाँव डौंडी लोहारा
जिला बालोद छ.ग.४९१७७१
मो.९६१७५८९६६७

मंगलवार, 25 सितंबर 2018

गम न हुई


दूरियाँ ये दिलों की कभी कम न हुई।
उनकी यादों में आँखें कभी नम न हुई।
कैसे जुदा हो गई मुझसे नादाँ वो खुशी,
जुदाई में जिंदगी ये  कभी गम न हुई।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

सुरता

सुरता मोर वोह कभू करय नहीं।
बात मोर थोरको कभू धरय नहीं।
कब तक मँय जिहूँ अइसने संगी,
जीव घलक मोर अब मरय नहीं।

शनिवार, 15 सितंबर 2018

मैं तेरी परछाई हूँ

मैं तेरी परछाईं हूँ मुझे छोड़ कहाँ तुम जाओगे।
मैं तेरी राधिका प्यारी मुझसी कहाँ तुम पाओगे।
माखनचोर केशव मेरे तुझमे मैं हूँ मुझमे तुम हो,
अमिट प्रेम का रंग हे कान्हा कहाँ तुम लगाओगे।
तोषण कुमार चुरेन्द्र

बुधवार, 12 सितंबर 2018

अपनी ना रही

अनजाने दुनिया में अब कोई उम्मीद अपनी ना रही।
माना है जिसे  जान से भी ज्यादा वो अपनी ना रही।
प्यार भरी बाते वो वादे वो कसमें अब लगते हैं झूठे,
गम का तो नाम नही यारों 'ख़ुशी' भी अपनी ना रही।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

रविवार, 2 सितंबर 2018

दोहे तोषण के

*कृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर आप सभी को बधाईयांँ व ढेर सारी शुभकामनाएँ*

*कृष्ण जन्माष्टमी पर तोषण के आठ दोहे*

नमन करूँ नटवर को,है जो चित के चोर!
माखन जिनका भोग प्रिय,मुकुट पंख है मोर!!१!!

पुण्य दिवस है आज ये,करलो मंगल गान!
देने गीता ज्ञान को,जनम लिए भगवान!!२!!

नंदलाल के घर चले,मध्य रात भगवान!
जन्में कारागार में,देवकी वसु महान!!३!!

गिरवर नटवर नाम है,वासु देवकी लाल!
मीरा राधा है प्रेयसी,है काली के काल!!४!!

देख मित्र के पाँव को,बहे नयन से धार!
मुट्ठी चावल तीन के,दिया बड़ा उपहार!!५!!

रथ हाँके बन सारथी,जरा नही अभिमान!
समरभूमि के बीच में, देते गीता ज्ञान!!६!!

आजा मेरे फिर प्रभो,रख दो सबकी लाज!
भारत माता रो रही,द्रवित होकर आज!!७!!

सुख शांति चहुँ ओर हो,बहे प्रेम की धार!
तोषण की अर्जी सुनो,जरा करो उपकार!!८!!

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
छत्तीसगढ़ ४९१७७१
मो.९६१७५८९६६७

शनिवार, 25 अगस्त 2018

राखी के तिहार आगे

राखी के तिहार आगे, तिहार आगे राखी के!
अँड़े सीमा म भइय्या सखी ,राखी हे मोर बिन पाखी के!!

गाँव के खेती खार पूछथे मोर बेटा जवान आगे
रुख राई डोंगरी पहाड़ी संग बदरा घलो रुसागे.
खोड़वा होगे तोर बिन भइय्या मोर पाँव बिन बइशाखी के....
अँड़े सीमा म......

गाँव के गउठान पूछतहे कब आबे तँय गाँव म.
झुलना झूलबे कब तँय बेटा लीम पीपर के छाँव म.
आजा माटी के बंदन करले पीरी जुड़ा ले छाती के....
अँड़े सीमा म......

दाई ददा के राजा बेटा मोर दुलरवा भइय्या कहिथँव.
राखी बर आबे भइय्या मोर आस लगाए बइठँव.
निहोरा करत ढर ढर ढरथे आँसू मोर आँखी के....
अँड़े सीमा म......

गुरुवार, 23 अगस्त 2018

छत्तीसगढ़ के बनइय्या नँइहे

*छत्तीसगढ़ के बनइय्या नँइहे*

छत्तीसगढ़ के बनइय्या नँइहे.
कविता के पढ़इय्या नँइहे.
मोर भारत के स्वाभिमान ल,
अटल कस बढ़इय्या नँइहे.
१.
बनके अनु ले परमानु जइसे,
नवा शक्ति संचार भरिस.
मोर देश के अंग अंग मा,
सुरुज किरन कस अंजोर करिस.
गुड़हा असन बोली भाखा म
बोल गुरतुर गोठयइय्या नँइहे.
मोर भारत के.......
२.
बइरी ला घलोक संगी जानय,
सदा अपन जे गला लगाइस.
अमीरी गरीबी के खँचवा पाटय,
दुखिया मनबर भला कहाइस.
मोर भारत महतारी के झरझर,
ढरत आँसू के पोछइय्या नँइहे.
मोर भारत के.......
३.
बनके भारत के मुखिया जेहा,
भारत माता के सेवा बजाइस.
सबझन के रही वो दुलरवा,
दुनिया मा भारत रतन कहाइस.
कभू राजनेता,कभू कवि बनके,
मन के पीरा बतइय्या नँइहे.
मोर भारत के.......
४.
रोवत हे पूरा भारतवासी,
ढर ढर आँसू बोहावत हे.
लहुट के आबे अउ अटल,
मोर छत्तीसगढ़ गोहरावत हे.
तोर छोड़ अब ये तोषण के,
अउ कोनों पुछइय्या नँइहे.
मोर भारत के......

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
छत्तीसगढ़ ४९१७७१
मो.९६१७५८९६६७

चुपचाप झिन रहा

चुप चाप झिन रहा,कुछु कहीं तहूँ कहा,
मनवा के बतिया ल,खोल तैं जुबान ले,
गोठ मोर सुनले तैं,थोर देख लहुट के,
तन झन छुट जाय,मोर ये परान ले.
दिल मा समाय तैहा,नँइ भूलों तोला मैहा,
तोर हँव दिवाना मैं,अपन तैं मान ले.
कहर बरपा न तैं,मोला तरसा न तैं
मोर मया ल पगली,थोरकुन मान ले.

तोषण कुमार चुरेन्द्र

शुक्रवार, 17 अगस्त 2018

अटल रहा है सदा

*मनहरण घनाक्षरी*

*अटल रहा है सदा,दिल में बसा है सदा,*
*अटल रहेंगे सदा,पूरे हिंदुस्तान में.*
*बन के जगनायक,दीनों के ये सहायक,*
*फूल बन महके ये,सारे गुलिस्तान में.*
*देश के चिराग बने,देखो सीना ताने चले,*
*निकले ये शेर सम,भारत की शान में.*
*याद सदा आयेंगे वो,दिल में समायें हैं जो,*
*अटल बिहारी बसे,तन मन प्राण में.*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
*धनगाँव डौंडी लोहारा*
*छत्तीसगढ़*

मंगलवार, 14 अगस्त 2018

मेरे भारत की पावन धरती

मेरे भारत की पावन धरती
वीरों ने जहाँ जन्म लिया...
जहाँ गोप बनकर विष्णु ने
गीता गंगा का मर्म दिया...

उत्तर में हिमालय चोटी
है भारत का जो ताज रहा..
करते है जिसकी रक्षा नित
सेनाओं पर है नाज रहा...

हर घर में हो उत्साह नव
हर दिन होली दीवाली हो
दिल से दिल के तार मिले
और प्यार कहीं ना खाली हो...

सर्दी गर्मी बरसात सहे
ऐसा दिल में उत्साह रहे
नवऊर्जा वीर जवानों की
नवयौवन के रग-रग में बहे...

भारत माता के चरणों में
अपना जो शीष कटाएगा
सच कहता हूँ दुनिया वालों
दुनिया में पूजा जाएगा...

पहनें कपड़े खायें रोटी
रहने सबकाे मकान मिले
हर बेटा बेटी शिक्षित हो
गुलशन-गुलशन में गुल खिले...

हिन्दू मुस्लिम और सिख ईसाई
भारत की पहचान बने
अनेकता में रहे एकता
ऐसा हिन्दुस्थान बने...

रविवार, 12 अगस्त 2018

आज पंद्रह अगस्त


आज पंद्रह अगस्त,दिवस है आजादी का,
मिलकर भारतीय,ध्वज फहराएंगे!!
करें याद हम मिल,अपने बलिदानी को,
नतमस्तक होकर,शीष ये नवाएंगे!!
खुशी का ये दिन आया,है सारा जग गा रहा,
तरंग है आजादी का,गीत नया गाएंगे!!
हो वतन मे खुशियाँ,तोषण का अरदास,
स्वच्छ रहे भारत ये,अच्छे दिन लाएंगे!!

शुक्रवार, 10 अगस्त 2018

हरा भरा खलिहान

हरा भरा खलिहान,संस्कृति की पहचान,
परब हरियाली का,बड़ा ही निराला है!!
महीना है सावन का,जय हो भोलेनाथ की,
छोड़छाड़ अमृत को,पिए विष हाला है!!
मगन होते किसान,लहराते देख धान,
बनकर हलधर,देश को संभाला है!!
अन्न धन घर द्वार ,अपनों का साथ मिले,
माता पिता साथ रहे,वर्षो हमें पाला है!!

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
छत्तीसगढ़

मत रोक मां तू मुझे

मत रोक मां तू मुझे, सुन ले पुकार  मेरी,
हिमालय चोटी पर, जयहिंद गाऊँगा।
जयहिंद गाऊँगा जो, सिंह की दहाड़ लिये,
अरियों की छाती पर, ध्वज लहराऊँगा।
ध्वज लहराऊँगा मैं, जन गण गान होगा,
पावन ये धरती की, तिलक लगाऊँगा।
तिलक लगाऊँगा ये, मत रोना माता मेरी,
साथ मैं तिरंगे पर, लिपटा जो आऊँगा।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
छत्तीसगढ़

आओ मिल हम साथी

१.
आओ मिल हम साथी,लेके चले परवाज,
भारत की आन बान,जो अपने हाथ है!!
देश के जवान हम,ये जिंदगी लुटाएँगे,
मातृभूमि की आशीष,किस्मत भी साथ है!!
है पुकारे भारतीय,सिंह ललकार लिये,
ये हमेशा चमकता,हिमालय माथ है!!
तोषण ये कहता है,माँ की जयगान कर,
साथ तेरे देंगे स्वयं,शंभू भोलेनाथ है!!
२.
आज पंद्रह अगस्त,दिवस है आजादी का,
मिलकर भारतीय,ध्वज फहराएंगे!!
करें याद हम मिल,अपने बलिदानी को,
नतमस्तक होकर,शीष ये नवाएंगे!!
खुशी का ये दिन आया,सारा जग है गा रहा,
तरंग है आजादी का,गीत नया गाएंगे!!
हो वतन मे खुशियाँ,तोषण का अरदास,
स्वच्छ रहे भारत ये,अच्छे दिन लाएंगे!!
३.
हरा भरा खलिहान,संस्कृति की पहचान,
परब हरियाली का,बड़ा ही निराला है!!
महीना है सावन का,जय हो भोलेनाथ की,
छोड़छाड़ अमृत को,पिए विष हाला है!!
मगन होते किसान,लहराते देख धान,
बनकर हलधर,देश को संभाला है!!
अन्न धन घर द्वार ,अपनों का साथ मिले,
माता पिता साथ रहे,वर्षो हमें पाला है!!
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तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव,डौंडी लोहारा,
छत्तीसगढ़ ९६१७५८९६६७

बुधवार, 8 अगस्त 2018

तिरंगा लेके हाथ में

*विधा:-मनहरण घनाक्षरी*

*तिरंगा लेके हाथ में*
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तिरंगा लेके हाथ में,आओ बढ़ाएँ कदम,
मातृभूमि की खातिर,मिटे साथियों हम.
है हिमालय कहता,अरियों के तोड़ें भ्रम,
केसरी की चाल सम,करें प्रहार हम.
भारत अब क्यूँ सहे,ये नापाक वार क्रम,
भरें अब रुधिर में,जोश अक्षय दम.
नाज करे दुनिया ये,साज जय सरगम,
तोषण कहे आज से,हो वन्दे मातरम्.
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तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
छत्तीसगढ़

भारत का स्वाभिमान

समीक्षार्थ
विधा:- मनहरण घनाक्षरी

भारत का स्वाभिमान
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भारत का स्वाभिमान,देव मुनि की संतान.
देश हमारा न्यारा है,प्यारा ये हिन्दुस्थान.
गगनचुंभी पर्वत,दक्षिण हिन्द महान.
गंगा की पावन धारा,करती गुणगान.
वीर शिवा की धरती,बेटा भगत की शान.
माँ खातिर मर मिटे,आजाद बलवान.
मिल कसम लें आज,बढ़े तिरंगे का मान.
त्याग तपस्या की गाथा,गुँजता जयगान.
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तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
छत्तीसगढ.

शनिवार, 28 जुलाई 2018

नारी शक्ति देश की

*नारी शक्ति देश की*

नारी शक्ति देश की,जाग जाग जाग
बुरी शक्तियों को अब,दाग दाग दाग

द्रोपती सीता जैसी,बन जाओ दुर्गा काली।
आज ये दिखा सबको, कितनी है शक्तिशाली।

बैरियों के मुख निकले भाग भाग भाग......!

जीजा जैसी ज्ञान दे,लक्ष्मी सा प्राण दे।
अनुसुइया की धरती पर, सतित्व का मान दे।

मधुबन राधा गाये,फाग फाग फाग.......!

कलयुग की नारी हो,दुष्ट को संघारी हो।
आये जो समक्ष तेरे,सबको ललकारी हो।

छोड़ अनुराग दिखा,राग राग राग......!

ममता तेरी प्यारी है,जग से भी न्यारी है।
इस धरा की गोद में,राम को उतारी है।

जिसकी सेवा में लगे,नाग नाग नाग.....!

दिया तुने हमें भगत,और वीर आजाद को।
डिगा सके न शत्रु,तेरे इन फौलाद को।

लेकर बंदुक गोली,दाग दाग दाग.....!

एक तेरी जय हो,ऐसा कोई समय हो।
सबका तुझे मान मिले,सबका प्रणय हो।

ले चिंगारी धधके,आग आग आग.....!

©®
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
छत्तीसगढ़ ४९१७७१
मो:-९६१७५८९६६७
http://arhkepagakalagi.blogspot.com

शुक्रवार, 27 जुलाई 2018

हाथ ले मशाल तू

*हाथ ले मशाल तू*

*उठ मेरे लाल तू,बनके महाकाल तू।*
*घन तिमिर को चीर दे,हाथ ले मशाल तू।।*

संकटों की राह पर,
दम्भ भरले बाँह पर।
भीड़ तू चट्टान से,
जय कर तू आह पर।

*ध्वज तिरंग सम्हाल तू,रूप ले विकराल तू।*
*घन तिमिर को चीर दे,हाथ ले मशाल तू।।१।।*

अस्मत लुटे नहीं,
किस्मत मिटे नहीं।
हो विचार क्रांति का,
हिम्मत डिगे नहीं।

*बनके भूचाल तू,हो प्रलयंकाल तू।*
*घन तिमिर को चीर दे,हाथ ले मशाल तू।।२।।*

दुश्मनों का चैन लूट,
होकर सब एकजूट।
कर दे तू शंखनाद,
दुश्मनों के छक्के छूट।

*बनके लाल बाल पाल तू,दिखा जरा कमाल तू।*
*घन तिमिर को चीर दे,बाथ ले मशाल तू।।३।।*

केसरी दहाड़ बन,
हिमालय पहाड़ बन।
काश्मीर की घाटी में,
फौजी की हुंकार बन।

*खींच दुश्मनों के खाल तू,कर दे धरा लाल तू।*
*घन तिमिर को चीर दे,हाथ ले मशाल तू।।४।।*

पापियों की हार हो,
दुष्टों का संघार हो।
एक तेरी जय गुँजे,
हाथ जो तलवार हो।

*कर दे धमाल तू,हो जाये कमाल तू।*
*घन तिमिर को चीर दे,हाथ ले मशाल तू।।५।।*

रगो में रवान भर,
जोश को जवान कर।
ले कलम तू हाथ में,
देश को महान कर।

*जोहर का लाल तू,खूँ में भर ऊबाल तू।*
*घन तिमिर को चीर दे, हाथ ले मशाल तू।।६।।*

©®
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
छत्तीसगढ़, ४९१७७१
मो:-९६१७५८९६६७

शुक्रवार, 20 जुलाई 2018

मोबाइल

जेती देखँव तेती सब धरे हवय मोबाइल,
नइ रहय बैलेंस तिहा मारत हे इसटाइल,
खिंचत रहिथे बज्जरहे सेल्फी फोटू,
मन माड़े दे दे के बेंदरा कस इसमाइल

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मंगलवार, 17 जुलाई 2018

होगे मन बइमान रे

होगे मन बइमान रे भइय्या, होगे मन बइमान रे.
जेती जाथँव तेती देखथँव, मइनखे हे शइतान रे. भइय्या होगे मन बइमान

कहूँ बेटी के लुटत हे इज्जत,कोनो दारु पीके मारत हे.
चोर ढोर के संगत करे,जिनगी ल नइ सँवारत हे.
बइठे खेलत हावय जुआ,का कोलकी मइदान रे
होगे मन बइमान रे भइय्या, होगे मन बइमान रे.

ददा दाई के कमई म फुदरे,नटेर के आँखी देखावत हे.
छोटे बड़े के लिहाज न थोरको,सरम ल बेंच के खावत हे.
सोंच सोंच के तोषण काँपे,कइसे होही कलियान रे
होगे मन बइमान रे भइय्या, होगे मन बइमान रे.

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मंगलवार, 10 जुलाई 2018

जय जोहार

============={•}==============
*होवत बिहना झोक ले,.....मोरो जय जोहार!*
*राम नाम के संग में....,मिलही खुशी अपार!!*
============={•}==============
*सुग्घर जिनगी हे मिले,....करले तँय उदधार!*
*जपले तँय हरि नाम ला,तब मिलही भंडार!!*
============={•}==============

रविवार, 8 जुलाई 2018

राम कथा

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विषय दर्श कामना
=============
हे!
मेरे
राघव
दर्शन दो
तरसे नैन
जीवन बुढ़ापा
कहते दशरथ !!
=============
विषय राम जनम
=============
श्री
राम
जनम
हितकारी
जग पावन
मगन दशरथ
कौशिल्या महतारी
=============
विषय सीता स्वयंबर
=============
लो
राम
लखन
विश्वामित्र
सिया बिहाने
लगा स्वयंबर
जयकार राम की!!
==============
विषय राम बनवास
==============
है
आज्ञा
राघव
चले वन
भ्राता सपत्नि
दशरथ दुखी
नगर पुर वासी !!
=============
विषय सीताहरण
=============
श्री
हीन
रावण
चल पड़ा
सिया हरने
मारीच हिरण
पीछा करते राम !!
=============
ोषण कुमार चुरेन्द्र

शनिवार, 7 जुलाई 2018

गाले गाले गाले गाले

गाले...तैहा... गाले... गाले...तैहा....गाले
गाले गाले गाले सियाराम के भजन ला२

मुट्ठी बाँध के आये जगत में, हाथ पसारे जाबे.
भटकत रहिबे मोह माया म, पाछू फेर पछताबे.
गाले...गाले... गाले... गाले
गाले गाले गाले सियाराम के भजन ला२

गाईन मीरा तुलसी कबीरा, प्रभु दरस ल पाईन.
अंतस म सियाराम बसाके, जिनगी धन्य बनाईन.
गाले...गाले... गाले... गाले
गाले गाले गाले सियाराम के भजन ला२

चारेच दिन के सुग्घर मेला, आखिर ये माटी के ढेला
झन फंसे र चटक चाँद म, दू दिन के हे झमेला.
गाले...गाले... गाले... गाले
गाले गाले गाले सियाराम के भजन ला२

©®
तोषण कुमार चुरेन्द्र

तीन शब्द की कविता

*तीन शब्द की कविता*

बहती धरणी के वक्षस्थल से,गंगनीर की सरिता है.
ध्यान लगाकर सुन लो,तीन शब्द की कविता है.

उत्तर में है कश्मीर की घाटी,भारत का है जो ताज रहा.
अरियों की गुस्ताखी देखो,आँख है खोले ताक रहा.
पाक होकर इस जहान में,सदा रही पतिता है.
ध्यान लगाकर सुन लो........

मिट गये कितनों मिटाने वाले,भारत माँ की शान को.
भगत आजाद सुखदेव राजगुरू,मिल जो बचाये आन को.
आते हैं जो काम देश के,मर कर भी वह जीता है.
ध्यान लगाकर सुन लो........

सब दिल में हो भाईचारा,चमन चमन में शांति हो.
बनेगा भारत विश्व गुरू जब,कहीं न कोई क्रांति हो.
हर घर लगे मंदिर मस्जिद़,रहे कुरान और गीता है.
ध्यान लगाकर सुन लो........

मिली जिंदगी है हमको साथी,प्रेम सुमन को बाँटो तुम.
दिल के तार मिले हर द्ल तक,इस बंधन को न काटो तुम.
जग के सारे हलाहल को,शंकर सम तोषण पीता है.
ध्यान लगाकर सुन लो........

©®
तोषण कुमार चुरेन्द्र
८/७/१८/८/३०

गुरुवार, 28 जून 2018

आभार

जन्मदिवस पर आप सभी का आभार व्यक्त करते हुए चंद पंक्तियाँ सादर समर्पित *यूँ ही सदा बरकरार रहे आप सबका प्यार.* *मिलता रहे हमेशा हमें आपका स्नेह दुलार.* *प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष दिये बधाई आप सभी ने,* *करते हैं हम सबका सहृदय हार्दिक आभार.* *आपका* *तोषण कुमार चुरेन्द्र* https://sharechat.com/post/MDXDek

जन्मदिवस

जन्मदिवस

जन्मदिवस

Happy birthday to you...

बुधवार, 27 जून 2018

धनगाँव के बजार मा

आ जाबे मोर रानी तैंहा,,, धनगाँव के बजार मा.
गुपचुप खावाहूँ तोला रे गोरी--२ लेहूँ सोला सिंगार ना.

करे मुखारी जामुन डारा,,, पानी ल धरे कटोरा मा.
पथरा होगे मोर आँखी हा,,,बही ओ तोर अगोरा मा.
तोर मया होगेंव दिवाना,,,किजरँव खारे खार मा.
आ जाबे मोर रानी तैंहा,,,,.....

कोयली कूहुके आमा के डारा,,,मोर मँजूर मन नाचय ओ.
पड़की परेवना मारय ताना,,,संगी जँहुरिया हाँसय ओ.
चारो कोती तोरेच चेहरा,,,घूमत रहिथे घर दुवार मा.
आ जाबे मोर रानी तैंहा,,,

घरे बनाय छाये ल खपरा,,,कँऊवा बइठे छानी मा.
मन मोहागे तोर पाछू,,,जादू भरे तोर बानी मा.
सूतत उठत तोरेच सुरता,,,का अँजोरी अँधियार मा
आ जाबे मोर रानी तैहा,,,

©®
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
*२७/६/१८/७/४०पू.*

गुरुवार, 21 जून 2018

दोहे तोषण के

गलती मेरी देख के,करना मुझको माफ!
जितने मन में मैल है,हो जाए सब साफ!!

देख सखी बरसात में,पवन मचाए शोर!
नाचत मयुरा देख के,मनवा उठे हिलोर!!

जब सावन आषाढ़ मे,मेढक शोर मचाय!
होकर दिल मजबूर ये,चाहत गीत सुनाय!!

सावन में सब है हरा,झूमता खेती खार!
होती हरियाली परब,मगन भए संसार!!

फूँक फूँक रखलो  कदम,मन में रखलो बात!
लेकर दीपक सब चलो,कट जाएगी रात!!

चल चल साथी साथ तू,ले मशाल जो हाथ,
करता सबपे है दया,मेरे दीनानाथ!!

मेरा तेरा कुछ नहीं, सब माया बाजार!
है दो दिन की जिंदगी,सबसे करलो प्यार!!

इस कलयुग संसार में,केवल हो विश्वास!
धरम करम होगा सदा,है तोषण को आस!!

आता जाता कुछ है नहीं,कैसे लिखता छंद!
पढ़ा लिखा ज्यादा नहीं, हूँ मैं जी मतिमंद!!

तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७

शनिवार, 26 मई 2018

क्यों है..

मेरी तन्हाईयों में तेरी याद  आती क्यों है.
मेरे जख़्में दिल को तड़पाती क्यों है.
बहते रहते हैं मेरी आँख से आँसू हमेशा,
नसीब मेरा तुझे मुझसे छुपाती क्यों है.

तोषण कुमार चुरेन्द्र

पपपपप

पलता पल-पल प्रेम से,पुण्य प्रकृति परकाज!
पुलके पुंज प्रताप के,पावन हो परवाज!!

तोषण कुमार चुरेन्द्र

हिरदे के बात

जानस काबर तँय नही, मोर हिरदे के बात !
सुरता आथस रे बही,तँयहर सारी रात !!

तोषण कुमार चुरेन्द्र

हाइकु विविध

व्याकुल धरा
मेघ के नयन से
बरसे नीर

करूणा मयी
माता जगजननी
लगती प्यारी

चले कृपाण
वसुंधरा हैरान
रोती नदियाँ

भूमि तनुजा
भूमिका श्रीराम की
लंका ढहायी

सोम बरसे
राम के दरबार
जीवन धन्य

उलूक जागे
बीहड़ रजनी में
दुनिया सोता

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बुधवार, 23 मई 2018

दोहे तोषण के

दोहे तोषण के...

अनुभव तो होगा कभी,वो ममता वो प्यार.
जिनसे जीवन में मिला,स्नेह प्रेम संसार.!!१!!

जीवन ये अनमोल है,यूँ कुड़े मे न रोल.
पाप पुण्य के खेल में,बिरथा बाजा ढोल.!!२!!

मेरी नइया धार में, हाथ नहीं पतवार.
होता साथी जो यहाँ,सबको करता पार.!!३!!

रोटी कपड़ा औ मकाँ,देता सबका साथ.
मंजिल होगा पास में,लो हाथों में हाथ.!!४!!

मौसम गरमी का यहाँ,तपती जलती धूप.
ठंडा पानी सब पियो,पल पल निखरे रूप.!!५!!

तोषण कुमार चुरेन्द्र

एहसास

एहसास होगा कभी,वो ममता वो प्यार.
जिनसे जीवन में मिला,स्नेह प्रेम संसार.

तोषण कुमार चुरेन्द्र

गुरुवार, 17 मई 2018

तुझसे ही

तुझसे ही मेरी सुबह है तुझसे ही मेरी शाम है
तुम ही हो जिन्दगी में मेरी लब पे तेरा नाम है.
छोड़ न जाना मुझे कभी मझधार में ए खुशी,
तुझसे ही करता रहूँ प्यार मैं यही मेरा काम है.

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मंगलवार, 15 मई 2018

दोहा

करनी कथनी एक हो,बांट न बिरथा ज्ञान।
करता है उपकार जो, जग में वही महान।।

प्यासे को पानी मिले,भोजन करे समान।
सबका जीवन हो सुखी, जानो संत सुजान।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

माँ

दिया तुमने जनम मुझे ये तेरा एहसान है.
माँ तेरे कदमों में ही मेरा सारा जहान है.
कर्म धर्म मेरा कितना भी अच्छा हो माँ
पूरी कायनात में माँ एक तू ही महान है

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छ. ग.

जीवन

फूलों की खुशबूओं सी महकता रहे जीवन
पक्षियों की कलरव सी चहकता रहे जीवन
सदा रहे कायनात तेरी खुशियों से भरी हुई
दीपक की ज्योति सी दमकता रहे जीवन

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छ. ग.

गुरुवार, 10 मई 2018

सरस्वती वंदना

सरस्वती माँ की चरणों में सदा बहती ज्ञान की धारा
आओ मिल सब डुबकी लगायें यह सौभाग्य हमारा

जब तक जीवन सीखते जायें इसका नहीं किनारा
बालकपन से वृद्धावस्था होता नहीं है गँवारा
ज्ञान की ज्योति होती जहाँ पर होता नहीं अँधियारा.....

हम अबोध अज्ञानी जग के हमको है कुछ आता नहीं
तेरी जैसी इस जहान में और दूजा कोई माता नहीं
शरण पड़े है मिलकर दर पे दे दो हमको सहारा......

पाकर कृपा तेरी माता हम तो धन्य हो जायेंगे
दिये ज्ञान जो तुमने दाती जग में उन्हें लुटायेंगे
ज्ञानवान विद्वान सभी हो भारत समृद्ध सारा......

तोषण कुमार चुरेन्द्र
arhkepagakalagi.blogspot.com

सोमवार, 7 मई 2018

डीलेड

दो हजार उन्नीस तक, डीलेड करें पास!
लिख पढ़ लेना भाइयों,जीवन होगा खास!!

तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७

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सोमवार, 2 अप्रैल 2018

बागान

बागान

खिलता पुष्प
धरा के बागान में---
झूमते पक्षी.

बागान देख
नाचे मन मोर है---
बावरी होके.

आते तितली
सतरंगी बाग में--
मनवा लागे.

हुआ सवेरा
मुस्कुराता बागान---
कलियाँ देख

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छ. ग.

मोर बिसाय गजरा

मोर  बिसाय  गजरा ल खोपा म लगाले.
आनी बानी के सोला सिंगार ल सजाले.
गजब दिन होगे रे बइरी देखे रेहेंव तोला,
एक घड़ी बइठ आँखी म अपन बसाले.

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगाँव

मोर आँखी के पुतरी

*समीक्षा बर आप सब के बीच प्रस्तुत*

*"मोर आँखी के पुतरी"*

*मोर आँखी के पुतरी कस चमकत रहिबे,*

*बनके फूल मन बगिया म महकत रहिबे!*

*झिन सिरावय मया तोर मोर बर संगी,*

*चिरइ कस हिरदे अंगना म चहकत रहिबे!*

*सावन के महिना बरसा बरोबर गुंइया,*

*बन ठन मया के बरखा बरसत रहिबे!*

*छावय झन दुख के बदरा तोर होंठ म,*

*फूल जस मंउहा खुल खुल हँसत रहिबे!*

*सरदी गरमी रीतु बरसात रहय चाहे,*

*सदा सुहागिन फूल जस सँवरत रहिबे!*

*भुल नइ पाहू तोला कभू मँय तोषण ह,*

*बइठ मया के रस्ता मोला अगोरत रहिबे.*

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
  बालोद ( छ. ग.)

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