शनिवार, 11 अप्रैल 2020
मंगलवार, 17 मार्च 2020
कोरोना का डर
सोमवार, 17 फ़रवरी 2020
बड़े दिनों बाद
रविवार, 1 दिसंबर 2019
मानवता
मानवता
शनिवार, 30 नवंबर 2019
मानवता
आसुरी प्रवृत्ति
बुधवार, 6 नवंबर 2019
गीत राम के.गावव
खोपा के गजरा
सोमवार, 4 नवंबर 2019
करमा गीत
करमा गीत
*मुखड़ा*
#लडका
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़की
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
*अंतरा 1*
#लड़का
धान लुए हंसिया गजब उड़ाय कंशी
सुध मा तोर खोके मन बजावय बंशी
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़की
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
*अंतरा 2*
#लड़की
आए ला सावन रिमझिम परे फोहार
बन बन किजरौं मैं पारत हँव गोहार
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़का
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
*अंतरा 3*
#लडका
सुघ्घर लागे रानी हांसी तोर ठिठोली
कजरेली नैना ले मारे मया गोली
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़की
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
*अंतरा 4*
#लड़की
धिक धिनिंधा मादर बाजे करमा के ताल
तोर मया म होगेंव बही हाल हे बेहाल
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़का
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
*संघरा*
#लड़का_लड़की
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
गीत
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा
डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़ ९६१७५८९६६७
रविवार, 27 अक्टूबर 2019
सबके घर दीया बरे
सबके घर दीया बरे,जगमग हे संसार।
कमलापति के संगिनी,देवय खुशी अपार।।
देवय खुशी अपार,साथ में झूमव नाचव ।
राग द्वेष सब टार,मया के गाना गावव।।
सुन तोषण के बात,गोठ हे जब्बर कबके।
राखव मीठ जबान,मिले हे ममता सबके।।
_*तोषण कुमार चुरेन्द्र*_
_*धनगंइहा,डौंडी लोहारा*_
_*९६१७५८९६६७*_
रविवार, 20 अक्टूबर 2019
मिट्टी का दीपक
मिट्टी का है स्वरूप मेरा, मिट्टी में ही मिल जाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।
मुझसे ही आदि जगत की, और अंत भी मुझसे ही।
जब तक जलता रहूँगा जग में, ज्योति मिलेगी मुझसे ही।
है जितनें संसार में प्राणी सबमें एक ही ज्योति,
होता जीवन सब प्रकाशित और अंधेरा मुझसे ही।
साथ मिले जो सबका मुझको,मैं भी साथ निभाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।
मिट्टी का दीप जान न मुझको,जीवन अपनी मिट्टी की।
दीपक लेकर करले पूजा,मातृभूमि सबकी मिट्टी की।
बन जाए अनमोल ये जीवन,हो जाये जग नाम अमर,
दीपदान कर अपने वतन पे,कर्ज चुका दे इस मिट्टी की।
बनकर ऊर्जा तेरे भाल पर,मिट्टी से तिलक लगाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।
हर घर हर चौराहे पे दिखता,हर गली बाजार पे बिकता।
मेरे बिन हर आँगन सूना,रौशन हर द्वारे मिलता।
मेरी महत्ता मान लो सब,अपना वजूद जान लो सब,
मुझसे ही होता अरूणोदय,और मुझसे है पुष्प खिलता।
मुझको सब स्वीकार करलो,नित नया सवेरा लाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।
रचना
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा,डौंडी लोहारा
९६१७५८९६६७
गुरुवार, 10 अक्टूबर 2019
करले जपन सियाराम के माला
करले जपन सियाराम के मालाs
चोला तर जाहीss नाss
बीsच भँवर मा फँसे हे डोंगा
पाsर हो जाsहीss नाss
◆
खाली हाथ तैहा आये जगत में
खाली हाथ जाबे नाsss
जाये के पहिलीs तैहाs रे बइहा
राम गुन गाले ना
धरम करम के करले कमाई
जिवरा जुड़ाही ना
बीsच भँवर मा फँसे हे डोंगा
पाsर हो जाsहीss नाss
◆
माटी के ओढ़ना माटी बिछौना
माटी के हे घर बार
राम भजन बिन जिनगी हे बिरथा
हावय जगत में सार
परही छिंटा पानी के ढेला मा
झट घुर जाही ना
बीsच भँवर मा फँसे हे डोंगा
पाsर हो जाsहीss नाss
◆
चारेच दिन के चटक चँदैनी
फेर अँधियारी रात
मया मोह मा झन फँसे रहिबे
मान तोषण के बात
हावय जिनगी हरियर पाना
एकदिन पिंवराही ना
बीsच भँवर मा फँसे हे डोंsगा
पाsर हो जाsहीss नाss
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
बुधवार, 18 सितंबर 2019
सियाराम गाले ना
गव इय्या होते ता गवातेंव तोला जी
भज इय्या होते ता भजातेंव जी
जाए के बेरा संगी रे सियाराम गाले ना
नौ महिना ले दाई के कोख मा
उल्टा रेहे टँगाये
राम नाम ला जपहूँ कहिके
वादा करके आये
मन इय्या होते ता मनातेंव तोला जी
सुन इय्या होते ता सुनातेंव जी
जाए के बेरा संगी रे सियाराम गाले ना
रूपिया पइसा महल अटारी
सब इँहिचे रही जाही
दाई ददा कुटुंब कबीला
संग कोनों नंइ जाही
गुन इय्या होते ता गुनातेंव तोला जी
भज इय्या होते ता भजातेंव जी
जाए के बेरा संगी रे सियाराम गाले ना
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा
सोमवार, 16 सितंबर 2019
भजन करलव राम के
भजन करलव राम के,जग शोर होवय जी
जर भूँजा के राखर,तन तोर होवय जी
भजन करत करत संगी,तरगे मीरा बाई
दरसन देवय जेला,किसन कन्हाई
भाव भगति के दहरा मा ,हिलोर होवय जी
जर भूँजा के राखर,तन तोर होवय जी
बोईर खवाके शभरी नवधा भगति गाये
राम गुन गाके भीलनी,जीवन मुक्ति पाये
शभरी के जिनगी मा,विभोर होवयजी
जर भूँजा के राखर,तन तोर होवय जी
मन के मंदिर मा,सियाराम ला बसाले
राम चरन मा तँय,ध्यान ला लगाले
धरम करम करले,जग मा शोर होवय जी
जर भूँजा के राखर,तन तोर होवय जी
राम नाम गावत गावत,तरगे ऋषि ज्ञानी
भजन सुनावत हे,तोषन अगयानी
सुन्ना मन के मंदिर अब,अंजोर होवय जी
जर भूँजा के राखर,तन तोर होवय जी
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा
हिन्दी
*विधा:/दोहा संग चौपाई*
*विषय :- हिन्दी*
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
हाथ जोड़ विनती करूँ,हिन्दी में हो बात।
नही कभी भी छोड़ना,दिन हो चाहे रात।।
★★★★★★★★★★
हिन्दी हम सबकी हो भाषा।
मान बढ़ेगा है अभिलाषा।
★★★★★★★★★★
भारत का नित गौरव जानें।
हिन्दी भाषा अपना मानें।
★★★★★★★★★★
हिन्दी से ही जीवन अपना।
आदत में हो लिखना पढ़ना।
★★★★★★★★★★
हम सब बनकर भाषी हिन्दी।
माथ लगाये जननी बिन्दी।
★★★★★★★★★★
आओ इसकी प्राण बचायें।
हिन्दी खातिर उदिम चलायें।
★★★★★★★★★★
हिन्दी सबकी शान है,रखे हृदय में ध्यान।
भाष विदेशी छोड़ दें,बढ़े हिन्द का मान।।
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
गुरुवार, 12 सितंबर 2019
शिक्षक
शिक्षक
लक्ष्य का हमको ज्ञान कराते।
बिना इनके दीक्षा कहाँ पाते।
करने जग को रौशन यह जो,
बन दीपक स्वयं जल जाते।
महिमा जिनकी बर्नी न जाये।
वेद पुरान भी पार नहीं पाये।
सत्य असत्य का फर्क बताने,
सदा सज्जन के पथ अपनाये।
शिक्षक मेरे हैं राह दिखाते।
मानवता का है पाठ पढ़ाते।
जो भी इनका नित करता मान,
सदा जीवन में आशीष पाते।
गर्व जिनके मन नहीं होते।
सतत् कर्म में जुटे हैं होते।
खुद की चिंता नही है होती,
सत कर्म जीवन भर होते।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
शिक्षक
सबके अपने है यहाँ,
मुखरित नये विचार।
प्रकटाती सद्भावना,
यही कलम की धार।।
शिक्षक गुण की खान है,
भरते निशदिन ज्ञान।
कृपा मिले इनकी सदा,
माँगू यह वरदान।।
करे डाँट फटकार जब,
पालें ना मन में द्वेष।
करें सदा सम्मान तो,
मिलते कृपा विशेष।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
रघुवर राम की
दोहा
मेरे रघुवर राम की,बड़ी निराली बात।
कृपा करे श्री राम जी,मिले अजब सौगात।।
हनुमत जिनके भक्त है,धरे हृदय में ध्यान।
बनके निशदिन दास जो,रखते प्रभु का मान।।
दशरथ नंदन हो प्रभु,करूँ सदा गुणगान।
सीता के हे प्राण पति,सदा करो कल्याण।।
कैकेयी के लाडले,कौशिल्या के लाल।
बसते शंकर के हृदय, जपे काल के काल।।
माया के संसार में,रहे हमेशा साथ।
तोषण माँगे वर सदा,चरण झुके बस माथ।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
बेटी
छत्तीसगढ़ी
कज्जल छंद
बेटी
बेटी हावय मोर आन।
बेटी हावय मोर शान।
पढ़ही तनुजा बढ़े मान।
सगरो दुनिया करे गान।
ये सबके बनाथे काज।
रखथे बेटी मोर लाज।
बनके तैहा शेर आज।
बैरी बर तै गिरा गाज।
चंदा जइसे तोर रूप।
सहिके तैहा छाँव धूप।
बाधा करथस ढेर लूप।
पूजय तोला सूरज भूप।
मिलही तोला दुआ ढेर।
होवय देर भले सवेर।
कोनों तोला दे नटेर।
आँखी देबे तै तरेर।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
डौंडी लोहारा
बहना का प्यार
*बहना का प्यार*
बहन को तीज लिवाने के लिए किसन घर से मोटर सायकल लेके निकला।मन ही मन मुस्कुराते हुए जा ही रहा था कि अचानक.....पीछे से एक मोटर सायकल वाले ने तेज रफ्तार से आते हुए किसन को ठोकर मार दी।
इधर सुनीता भी आज मन ही मन गुनगुना रही है कि आज भैय्या मेरा तीज के लिए लिवाने आने वाला है।मुंडेर पें कौआ कांव-कांव करते संदेशा सुना रहा है।पंछी की कलरव भी मन को भा रही है।
सुनीता भैय्या के आने का इंतजार कर रही थी।तभी.... फोन की घंटी बजी।संदेश आया कि तेरा भैय्या अस्पताल में भर्ती है जल्दी से आ जाओ।
संदेश मिलते ही दंग रह गयी।"हे भगवान! सोचा क्या और क्या हो गया?" सुनीता सोचने लगी। जैसे तैसे बहना अस्पताल पहुंची।भैय्या को देखा ।सुकुन की साँस ली कि ज्यादा चोटें नही आईं।कहने लगी "क्या भैय्या !धीरे चलाना चाहिए न!तुम्हें कुछ हो जाता तो...?"
"जब तक तेरी जैसी बहन मेरे साथ है तो मुझे कुछ भी नही हो सकता।" किसन ने कहा।
"इस साल तीज में भोलेनाथ से अपने पति अपने बच्चों की सलामती के साथ-साथ तेरे लिए भी दुआ मागूँगी कि तू सदा खुश रहे ।तुम्हें दुनिया में कोई तकलीफ न हो।" सुनीता ने कहा।
किसन एक टक अपनी बहन को देखता रहा।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
कृष्ण वंदना
माखन खाता नन्द घर,मधुबन करता रास।
कब आओगे मोहना,बसी नयन में आस।।
हाथ पसारे द्वार तिहारो।
मेरो मन करता जयकारो।
मुरलीधर तुम नाग नँथायो।
राधे रानी के मन भायो।
गोपाला केशव बहुते नामा।
आना माधव अपनो ग्रामा।
मीत सुदामा तोहे प्यारा।
जानत हर कोई जग सारा।
दे दीजै प्रभु यह वरदाना ।
सकल जगत हो आप समाना।
आओ नटवर धीर बँधाओ।
फिर एक बार गीता गाओ।
तेरे दरशन की आस में,रोवत हैं बृज धाम।
आजा गिरधर लौट के,फिर राधा के ग्राम।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
पाप पुण्य का लेखा
पाप पुण्य का लेखा।
कर्ता है कौन देखा?
आज मेरी कल तेरी,
सबकी बारी आनी।
जनम मरण शाश्वत सत्य,
रखिए याद जुबानी।
मेरा यहाँ न तेरा यहाँ
कोई नही बसेरा,
आते जाते रहते लोग
जग हुआ सरायखाना।
रोते आए रूलाके जाना
ये कहाँ की रीत?
आपस हो बस भाई चारा
बसी रहे बस प्रीत की गीत।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
दीदार करया हूँ
चोरी छिपे सही दीदार करता हूँ।
जानें नहीं कभी मैं प्यार करता हूँ।
देखे कभी नमी आँखें झलक से जो,
अपनी झुकी निगाहें चार करता हूँ।
तेरे हँसी लबों की चाहत मुझे है,
खुद को कभी-कभी बीमार करता हूँ।
माना मुझे नही आता मुस्कुराना,
तेरे लिए जहाँ गुलजार करता हूँ।
समझो नहीं कभी गूँगा बधिर हमको,
इश़्की जुबाँ अभी इजहार करता हूँ।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
काले बादल
हाइकु
काले बादल-
व्योम मंडल में
छिपा भास्कर।
ऊष्ण प्रचंड-
पावस अगुवाई
करती धरा।
अमर बेल-
पीपल वृक्ष पर
पंछी का डेरा।
नीम का पत्र-
कीटनाशक दवा
हानिकारक।
पलाश पुष्प-
अति मनभावन
फागुन मास।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
मोरा आँखी के तारा
मोर आँखी के तारा रे,करबे जग उजियारा रे
दीन दुखिया के सेवा करबे ,बनबे जग के दुलारा रे
तोर पाए के खातिर बेटा, कतको बरत उपवास करेंन
जूड़ बासी खाके ललना,तोर बर ताते भात करेंन
धरती दाई के रक्षा करे बर,रहिबे तैं रखवारा रे
मोर आँखी के तारा रे...
ध्रुव प्रहलाद के रद्दा म चलबे,सबके आशीर पाबे
वीर बालक खुदी बनके तै,दाई के लाज बचाबे
दुध के करजा पूरा करबे,होही तभे चुकारा रे
मोर आँखी के तारा रे...
लव कुश जइसे ज्ञानी होबे,राम के गुन ला गाबे
तर जाही जम्मो दुखियारी,भव ले पार लगाबे
बनबे राम के दूत लाला,सीता के तैहा पियारा रे
मोर आँखी के तारा रे
तोषन धनगंइहा...
कृष्ण कन्हाई
दही चुराने माखन खाने
जन्म लिये हैं कृष्ण कन्हाई।
नटवर नागर सुख के सागर
जन्म दिवस पर लाख बधाई।
पापी को मारे संत उबारे
समरांगण गीता ज्ञान सुहाई।
मातु यशोदा नंद बाबा
हलधर तेरे बड़के भाई।
मित्र सुदामा के झोली भरे तुम
खुशियाँ सारी मंगल आये।
घर घर दीप जलाए गोपी
सभी जन मिलके सोहर गाये।
दीन दुखियन के त्रास हरे
प्रभु तीनों तिलोक जग हर्षाये।
आजा नटवर लाज बचाने
कलयुगी द्रोपदी ये गोहराये।
तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा
दिन बीते न रैना
दिन बीते न रैना,
आवे न दिल को चैना
आजा मोरे बालमा,
करले प्रीत के बैना
जब न देखू साँवरा सूरत,
दिन नही मेरी ढलती
बनके सूरज नभ मे आजा,
राह रहूँगी तकती
जल्दी आना प्रियतम मेरे,
थक न जाए नैना....
भूख प्यास मुझे लगे नही,
बस मिलने की आस
तन्हाई में बातें करती,
लगे कि तुम हो पास
तुझको मन की तोता मानूँ,
खुद को तेरी मैना....
तोषण कुमार चुरेद्र
"धनगंइहा"
कर भला तो हो भला
लघु कथा
*कर भला तो हो भला*
पढ़ने के शौकीन शैलेष10 साल के उम्र में रेल्वे स्टेशन पर आने जाने वाले लोगों के जूते पालीश करता ।जो भी कमाई होती बीमार माँ की दवाई और खाने पीने के सामान जुटाता ।
एक दिन ईश्वर चंद नाम का एक सज्जन व्यक्ति को ट्रेन से कहीं जाना था।जो जोकि साफ्टवेयर इंजीनियर है । "चलो जूते को चमकाया जाये" ऐसा सोचकर इधर उधर देखने लगा तो नजर शैलेष पर पड़ी। पास जाकर जूते पालीश करवाते शैलेष के बारे में पूरी जानकारी पता करने लगा।
"तुम्हारा क्या नाम है?पढ़ने क्यों नही जाते?तुम्हारे माता पिता आदि आदि?" ईश्वरचंद ने पूछा। "पढ़ाई कैसे करूँ साहब,पिता जी भगवान को प्यारे हो गये,माँ बीमार है सो उनकी परवरिश के लिए कुछ तो काम करना पड़ेगा न साहब।"शैलेष ने जवाब दिया। इन सारी बातों को सुनकर ईश्वर चंद की आखें भर आई।और अपने बीते दिनों को याद करने लगा कि "मैं भी कभी शैलेष की तरह छोटी मोटी मजदूरी करके अपना जीवन बसर करता रहा।इसकी तो माँ है मेरी तो माँ भी नही थी।लेकिन जैसे तैसे पढा़ई पूरी करके आज इस मुकाम तक पहुंच पाया।" "लो साहब जूता पालीश हो गया" आवाज सुनकर ईश्वर चंद का ध्यान टुटा।
उसने कहा"चलो शैलेष आज से तुम्हें काम करने जरूरत नहीं पड़ेगी,मैं तुम्हें एक अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाऊँगा। और माँ को अपने साथ रखकर उसका इलाज भी करवाऊँगा।" शैलेष की आँखे भर आई ईश्वर चंद की बाते सुनकर।
ईश्वर चंद अपने ट्रेन का सफर रद्द करके शैलेष और उसकी माँ लेकर घर ले आया। ईश्वर चंद एक बेटा बनकर माँ का ईलाज शुरू कर दिया ।जल्द ही माँ भी ठीक हो गई। शैलेष का अच्छे स्कूल में दाखिला हुआ।
ईश्वर चंद के इस तरह के कार्य को देखकर माँ के मुख से यही आशीर्वाद निकला- "भगवान तुम्हें लंबी उम्र दे।जिस तरह तुने हमारा भला किया है,उसी तरह भगवान भी तुम्हारा भला करे।दुधो नहाओ पूतो फलो।"
ईश्वर चंद की आँखें खुशियों से भर आई।और एक टक माँ को देखने लगा।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
कैसे?
★
कैसे
तरूवर बिन
जीवन की कल्पना
संभव होगी
सोच
★
राही
बढ़ता चला
कंटक पथ पर
वहनी लिए
कांधे
★
सुन
अर्जी मेरी
आया दर तेरे
लेके पुष्प
हार
पढ़ा लिखा नहीं
गुलाब
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
🌹काँटो बीच रहता है,
🌹🌹सारे दुख सहता है।
🌹🌹🌹खुश रखे साथियों को,
🌹🌹🌹🌹सदा मुसकात है।
🌹फूल तू गुलाब का है,
🌹🌹बनके माहताब सा है।
🌹🌹🌹रब की ये नेमत है,
🌹🌹🌹🌹खुदा की सौगात है।
🌹प्रेमी जोड़े जानते हैं,
🌹🌹प्रेम प्रति मानते हैं।
🌹🌹🌹एक दूसरे को सौपे,
🌹🌹🌹🌹होती मुलाकात है।
🌹शोभा इसकी न्यारी है,
🌹🌹लगती बड़ी प्यारी है।
🌹🌹🌹तोषण जुबाँ से बोले,
🌹🌹🌹🌹वाह जी क्या बात है।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
पेड़
🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴
।।चौपाई।।
🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴
पेड़
🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴
पंछी डाले अपना डेरा।
आते जाते साँझ सवेरा।
🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴
होती तरुवर से हरियाली।
रहती छायी नित खुशहाली।
🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴
शीतल पवनें हमको मिलते।
आँगन सारे बच्चे खिलते।
🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴
सावन में पानी बरसाती।
धरती माता है हरषाती।
🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴
कितने औषधि जिनसे बनते।
रोगी सारे इनसे तनते।
🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴
आओ साथी पेड़ लगाये।
अपना जीवन हम महकाये।
🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
मंगलवार, 10 सितंबर 2019
पढ़ा लिखा जादा नहीं
समीक्षार्थ
पढ़ा लिखा ज्यादा नही,जरा नहीं है ज्ञान।
कोशिश करता सीखना,गावै जो वेद पुरान।।
गावै जो वेद पुरान,धरूँ हृदय में ध्यान से।
मिले अलग पहचान,सधे सभी गुणवान से।।
रहे सदा जो नेह,मुझ पर दीना नाथ की।
बरसे निशदिन मेह,कृपा सभी के साथ की।
तोषण बोले बात,कटुक वचन भी ना कहीं।
मंद बुद्धि है जान,पढ़ा लिखा ज्यादा नहीं।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
हवाई जहाज
छोटी सी बालमन की कविता
हवाई जहाज बनाऊँगा मैं।
नीले अम्बर में जाऊँगा मैं।
नभ मंडल की सैर करूँगा,
फिर घर वापस आऊँगा मैं।
सूरज चाचा से बातें होंगी।
चंदा मामा संग रातें होंगी।
सभी ग्रहों से दोस्ती करके,
तारों संग मुलाकातें होंगी।
धुएँ कारखानें वहाँ न होगी।
निर्मल शुद्ध हवाएँ होगी।
पान करूँगा हरपल हरदिन,
रहेगा हमेशा तन ये निरोगी।
मोटर गाड़ी बहुत है चलते।
कितनों राही हैं जीते मरते।
इन सबसे मुझे मुक्ति मिलेगी,
लोग रहेंगे सदा ही तकते।
होगी अब ऊपर मेरी उड़ान।
बनेगा जब ये मेरा वायुयान।
चुन्नु,मुन्नु,पोषण,तोषण,
घुमेंगे नभ में सब सीना तान।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
शुक्रवार, 6 सितंबर 2019
गणपति वंदना
नन्हें नन्हें हाथ जोड़कर,
गणपति तुम्हें प्रणाम करूँ।
दे दो बुद्धि हमें विनायक,
नित निरतंर जीत करूँ।
बिल्व पत्र मैं तुम्हें चढ़ाऊँ,
निशदिन तेरा ध्यान करूँ।
रिद्धि सिद्धि बुद्धि के दाता,
सब दुखियन के दुख हरूँ।
मोदक तुमको लगते प्यारे,
पार्वती के लाल हो।
पहिली पूजा होती तेरी,
देवो में देव कमाल हो।
माता पिता को माने जगत,
करे परिक्रमा सात।
गणों के देव हो तुम देवा,
कहलाये गणराज।
नंदी भृंगी संग खेले कूदे,
लीला अजब दिखाते।
देख देख मात पिता संग
जग सारे हर्षाते।
एकदंत दयावंत हो देवा,
लीला तेरी न्यारी।
जग में होती पूजा पहले,
मूषक तेरी सवारी।
कामना मेरी हो पूरी,
रख दो मेरी लाज।
सभी सुखी रहे जग में,
कहूँ कर जोड़ आज।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
बुधवार, 4 सितंबर 2019
राम
दोहा
मेरे रघुवर राम की,बड़ी निराली बात।
कृपा करे श्री राम जी,मिले अजब सौगात।।
हनुमत जिनके भक्त है,धरे हृदय में ध्यान।
बनके निशदिन दास जो,रखते प्रभु का मान।।
दशरथ नंदन हो प्रभु,करूँ सदा गुणगान।
सीता के हे प्राण पति,सदा करो कल्याण।।
कैकेयी के लाडले,कौशिल्या के लाल।
बसते शंकर के हृदय, जपे काल के काल।।
माया के संसार में,रहे हमेशा साथ।
तोषण माँगे वर सदा,चरण झुके बस माथ।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
बुधवार, 28 अगस्त 2019
अंत्याक्षरी
अभ्यास की दृष्टि से सादर ....मंच पर
अवहेलना,
मत करना अवहेलना,कभी बड़ों की बात।
दुआ कभी मिलता नहीं,हो दिन चाहे रात।।
विवेचना,
करिए कर्म विवेचना,रखिए सदा ये ध्यान।
धन दौलत जब पास हो,ना रख कभी गुमान।।
व्याप्त,
गुण अवगुण सब व्याप्त है,यही जगत की रीत।
मीठी वाणी बोल के,सकल विश्व लो जीत।
आकंठ,
भरा हुआ आकंठ तक,सदा पतित में दंभ।
झुकना कभी न जानते,तने रहे बन खंभ।
ममता,
माँ की ममता को भला,आँक सके न कोय।
भरकर सुत के पेट को,खुद ही भूखी सोय।।
प्रलाप,
सुख दुख के इस खेल में,करते नहीं प्रलाप।
धैर्य मन में धारिए,मिट जाए संताप।।
लालसा,
त्यागें मन की लालसा,करें ईश का ध्यान।
धन दौलत साथी नहीं,रखिए इसका ज्ञान।।
वन्दना,
मातु पिता की वन्दना,करलें आठों याम।
जिनके पुण्य प्रताप से,बनते बिगड़े काम।।
चापलूस,
चापलूस के काम का,रहता जग में शोर।
बड़े-बड़े ठग जात हैं,क्या ठाकुर क्या चोर।।
झंझावत
आते झंझावत शाम जो,हिय में उठती आह।
पिया गये परदेश को,घर से तकती राह।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र "धनगंइहा"
मंगलवार, 27 अगस्त 2019
ईश वंदना
दोहा-
बनकर साधु मैं खड़ा,दर पे तेरे आज।
हाथ जोड़ कर कामना,रख लो मेरी लाज।।
चौपाई:-
तेरे चरण मैं माथ नँवाऊँ।
होत भोर तेरे गुन गाऊँ।
कृपा तेरी मिले प्रभू मोहे।
करतल बान धनुष अति सोहे।
आए शरण नीज दीन दुखारी।
रहिहव सदा तुम मीत हमारी।
बार-बार बर माँगँव तोसे।
पाप कभी नहीं होय मोसे।
सबके घर भंडार भरौ तुम।
गलत राह में न हो कोई गुम।
सबके रहना सदा सहाई।
दाता करता यही दुहाई।
दोहा:-
रहे सदा सद्भावना,माँगू यह वरदान।
सेवक बनकर सब रहे,मिले मान सम्मान।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र "धनगंइहा"
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