गुरुवार, 18 फ़रवरी 2021
रविवार, 24 जनवरी 2021
नेता जी
शनिवार, 16 जनवरी 2021
तैहा दीया देखाये गा
बुधवार, 13 जनवरी 2021
राम नाम
सोमवार, 11 जनवरी 2021
मोर छत्तीसगढ महातारी
मंगलवार, 5 जनवरी 2021
बिनती तोर करत हँव रामा
रविवार, 3 जनवरी 2021
छत्तीसगढ़िहा युवा
गुरुवार, 10 दिसंबर 2020
सावन के महीना मा
शनिवार, 21 नवंबर 2020
कोरोना की हार(तोषण चुरेन्द्र दिनकर)
सोमवार, 16 नवंबर 2020
हाय रे कोरोना काल(तोषण चुरेन्द्र दिनकर)
शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020
शरद पूर्णिमा
शरद पूर्णिमा की हार्दिक बधाई व शुभकामनाओं के एक रचना....
*शरद की अमृत धार*
चाँदनी रात में आज चाँद खिलखिलाया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।
शरद की रातें जुगनू की तरह चाँदनी चमकती है।
बूँदे ओस की धरा पर फैली कोहिनूर दमकती है।
देख - देख नजारा गगन से दिनकर भी शर्माया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।1।
शरद की सर्द रातें शीतलता बरसाती मन भीतर।
बगिया मुस्कुराती फूलों की खुश्बू बिखराती ईतर।
नवरसों में मदमाता भँवरा चहूँ दिक में मंडराया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।2।
मधुबन बहकने लगी आज श्याम दर्श जो होना है।
प्रेम बहार सोलह श्रृंगार लिये एक दूजे में खोना है।
राधेकृष्ण की रासलीला स्वयं शिव देखने आया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।3।
सप्त सुरों का राग लिए सतरंगी फाग महीना है।
इंद्रधनुषी रंगों की जैसी दुनिया और कहीं ना है।
शरद की अमृत धार से "दिनकर" आज नहाया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।4।
©®
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगांव, डौ.लोहारा
बालोद,छत्तीसगढ़
30/10/20
शनिवार, 24 अक्टूबर 2020
माता पचरा
गुरुवार, 22 अक्टूबर 2020
बेटी
रविवार, 18 अक्टूबर 2020
दाई के नवरात
रविवार, 27 सितंबर 2020
बेटी
शनिवार, 26 सितंबर 2020
नरवा गरवा घुरवा बाड़ी
बुधवार, 9 सितंबर 2020
जतन अपन गाँव के
गुरुवार, 27 अगस्त 2020
गणेश वंदना
सोमवार, 22 जून 2020
दिनकर के दोहे
मंगलवार, 9 जून 2020
तोर मया मोर जीव के
राम नाम हे सार
रविवार, 17 मई 2020
भाईचारा
शुक्रवार, 24 अप्रैल 2020
इंसान बनादे..(मुक्त गजल तोषण दिनकर)
गुरुवार, 23 अप्रैल 2020
किताब
बाकी है...
मंगलवार, 21 अप्रैल 2020
कुण्डलियाँ दिनकर की
रंग जीवन के
रविवार, 19 अप्रैल 2020
घनाक्षरी विधान
बुधवार, 15 अप्रैल 2020
विज्ञात छंद की बधाई
दिनकर
सोमवार, 13 अप्रैल 2020
मोर मन पंछी परेवना रे...
पानी का मोल
रविवार, 12 अप्रैल 2020
अपील
शनिवार, 11 अप्रैल 2020
मंगलवार, 17 मार्च 2020
कोरोना का डर
सोमवार, 17 फ़रवरी 2020
बड़े दिनों बाद
रविवार, 1 दिसंबर 2019
मानवता
मानवता
शनिवार, 30 नवंबर 2019
मानवता
आसुरी प्रवृत्ति
बुधवार, 6 नवंबर 2019
गीत राम के.गावव
खोपा के गजरा
सोमवार, 4 नवंबर 2019
करमा गीत
करमा गीत
*मुखड़ा*
#लडका
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़की
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
*अंतरा 1*
#लड़का
धान लुए हंसिया गजब उड़ाय कंशी
सुध मा तोर खोके मन बजावय बंशी
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़की
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
*अंतरा 2*
#लड़की
आए ला सावन रिमझिम परे फोहार
बन बन किजरौं मैं पारत हँव गोहार
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़का
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
*अंतरा 3*
#लडका
सुघ्घर लागे रानी हांसी तोर ठिठोली
कजरेली नैना ले मारे मया गोली
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़की
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
*अंतरा 4*
#लड़की
धिक धिनिंधा मादर बाजे करमा के ताल
तोर मया म होगेंव बही हाल हे बेहाल
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़का
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
*संघरा*
#लड़का_लड़की
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
गीत
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा
डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़ ९६१७५८९६६७
रविवार, 27 अक्टूबर 2019
सबके घर दीया बरे
सबके घर दीया बरे,जगमग हे संसार।
कमलापति के संगिनी,देवय खुशी अपार।।
देवय खुशी अपार,साथ में झूमव नाचव ।
राग द्वेष सब टार,मया के गाना गावव।।
सुन तोषण के बात,गोठ हे जब्बर कबके।
राखव मीठ जबान,मिले हे ममता सबके।।
_*तोषण कुमार चुरेन्द्र*_
_*धनगंइहा,डौंडी लोहारा*_
_*९६१७५८९६६७*_
रविवार, 20 अक्टूबर 2019
मिट्टी का दीपक
मिट्टी का है स्वरूप मेरा, मिट्टी में ही मिल जाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।
मुझसे ही आदि जगत की, और अंत भी मुझसे ही।
जब तक जलता रहूँगा जग में, ज्योति मिलेगी मुझसे ही।
है जितनें संसार में प्राणी सबमें एक ही ज्योति,
होता जीवन सब प्रकाशित और अंधेरा मुझसे ही।
साथ मिले जो सबका मुझको,मैं भी साथ निभाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।
मिट्टी का दीप जान न मुझको,जीवन अपनी मिट्टी की।
दीपक लेकर करले पूजा,मातृभूमि सबकी मिट्टी की।
बन जाए अनमोल ये जीवन,हो जाये जग नाम अमर,
दीपदान कर अपने वतन पे,कर्ज चुका दे इस मिट्टी की।
बनकर ऊर्जा तेरे भाल पर,मिट्टी से तिलक लगाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।
हर घर हर चौराहे पे दिखता,हर गली बाजार पे बिकता।
मेरे बिन हर आँगन सूना,रौशन हर द्वारे मिलता।
मेरी महत्ता मान लो सब,अपना वजूद जान लो सब,
मुझसे ही होता अरूणोदय,और मुझसे है पुष्प खिलता।
मुझको सब स्वीकार करलो,नित नया सवेरा लाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।
रचना
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा,डौंडी लोहारा
९६१७५८९६६७
गुरुवार, 10 अक्टूबर 2019
करले जपन सियाराम के माला
करले जपन सियाराम के मालाs
चोला तर जाहीss नाss
बीsच भँवर मा फँसे हे डोंगा
पाsर हो जाsहीss नाss
◆
खाली हाथ तैहा आये जगत में
खाली हाथ जाबे नाsss
जाये के पहिलीs तैहाs रे बइहा
राम गुन गाले ना
धरम करम के करले कमाई
जिवरा जुड़ाही ना
बीsच भँवर मा फँसे हे डोंगा
पाsर हो जाsहीss नाss
◆
माटी के ओढ़ना माटी बिछौना
माटी के हे घर बार
राम भजन बिन जिनगी हे बिरथा
हावय जगत में सार
परही छिंटा पानी के ढेला मा
झट घुर जाही ना
बीsच भँवर मा फँसे हे डोंगा
पाsर हो जाsहीss नाss
◆
चारेच दिन के चटक चँदैनी
फेर अँधियारी रात
मया मोह मा झन फँसे रहिबे
मान तोषण के बात
हावय जिनगी हरियर पाना
एकदिन पिंवराही ना
बीsच भँवर मा फँसे हे डोंsगा
पाsर हो जाsहीss नाss
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
बुधवार, 18 सितंबर 2019
सियाराम गाले ना
गव इय्या होते ता गवातेंव तोला जी
भज इय्या होते ता भजातेंव जी
जाए के बेरा संगी रे सियाराम गाले ना
नौ महिना ले दाई के कोख मा
उल्टा रेहे टँगाये
राम नाम ला जपहूँ कहिके
वादा करके आये
मन इय्या होते ता मनातेंव तोला जी
सुन इय्या होते ता सुनातेंव जी
जाए के बेरा संगी रे सियाराम गाले ना
रूपिया पइसा महल अटारी
सब इँहिचे रही जाही
दाई ददा कुटुंब कबीला
संग कोनों नंइ जाही
गुन इय्या होते ता गुनातेंव तोला जी
भज इय्या होते ता भजातेंव जी
जाए के बेरा संगी रे सियाराम गाले ना
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा
सोमवार, 16 सितंबर 2019
भजन करलव राम के
भजन करलव राम के,जग शोर होवय जी
जर भूँजा के राखर,तन तोर होवय जी
भजन करत करत संगी,तरगे मीरा बाई
दरसन देवय जेला,किसन कन्हाई
भाव भगति के दहरा मा ,हिलोर होवय जी
जर भूँजा के राखर,तन तोर होवय जी
बोईर खवाके शभरी नवधा भगति गाये
राम गुन गाके भीलनी,जीवन मुक्ति पाये
शभरी के जिनगी मा,विभोर होवयजी
जर भूँजा के राखर,तन तोर होवय जी
मन के मंदिर मा,सियाराम ला बसाले
राम चरन मा तँय,ध्यान ला लगाले
धरम करम करले,जग मा शोर होवय जी
जर भूँजा के राखर,तन तोर होवय जी
राम नाम गावत गावत,तरगे ऋषि ज्ञानी
भजन सुनावत हे,तोषन अगयानी
सुन्ना मन के मंदिर अब,अंजोर होवय जी
जर भूँजा के राखर,तन तोर होवय जी
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा
विशिष्ट पोस्ट
शिवनाम
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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🌷यशवंत"यश"सूर्यवंशी 🌷 भिलाई दुर्ग छग हाइकु 🥀ईमली🥀 मन मचला संतान के संके...
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तरु की छाँव खेलता बचपन अपना गाँव मिट्टी चंदन निखरित मस्तिष्क कोटि वंदन बहे सरिता है धरा पल्लवित मग पुनिता कुँजती पिक लगे मनभावन द...
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दाई के कोरा हे धान के कटोरा तिहार पोरा... सोहय धान छत्तीसगढ़हीन बेटा किसान... कौशल राज ननिहाल राम के नाचव आज... नवा अंजोर जगमगात ग...
