मंगलवार, 27 मार्च 2018

हसीन पल

हाइकु पञ्च
***************
हसीन पल
यों बिखर न जायें
थोड़ा संभल

एक भी लम्हा
खुशी का न गुजरा
आज भी तन्हा

हरेक घड़ी
तू मुस्कुराता चल
खुशियां खड़ी

आज न कल
कोई नहीं बाँटता
दुःख के पल

एक ही हल
कर्म सिद्धान्त बड़ा
सत्य पे चल

*************************
🌲💧निर्मल 'नीर'💧🌲

अना है सब में

🌺🌷अना है सब में🌷🌺

मुहब्बत का सागर बसा है
सब में
मत भूलो थोड़ी सी अना* है
सब में

वफ़ा के बदले वफ़ा चाहते
हैं लेकिन
जफा** का घर भी सजा है
सब में

खुशी की चाहत , गमों से नफरत
है मगर
इस जज्बात के पीछे कौन चला है
सब में

जो भी चाहते हैं कर सकते
हैं मगर
डर खुदा का हर पल पला है
सब में

सबको सिर्फ नेकी की राह
चलना है "राकेश"
नेकी-बदी बतानेवाला बसा है
सब में...✍🏼
* अहम ,ईगो
** बेवफाई
_🌺राकेश कुमार मिश्रा🌺_

मेरी आँखें

मेरी आँखों मे, उतर आई है।                                
अब तन्हाई।

दूर तुमसे क्या हुई, ये जहां रास न आई।

कल तलक बाहों का सहारा था बहुत,
आज डराने लगी खुद मेरी परछाई।

तेरी चाहत की हमकों बस तमन्ना थी,
ये न सोचा था कि है कितनी गहराई।

अब भी सुनी हैं हाथें मेहंदी बिन,
कब कानों में गूँजेगी मेरी शहनाई।

प्यार तुझसे नही एकबार कह दिया होता,
न जिल्लतें होती न रुषवाई।

शशि तिवारी, महुवा, दुर्ग cg।

7805806358

गजल

ग़ज़ल

मैं तेरा गम भुला नहीं सकती
दर्द अपना बता नहीं सकती

मैंने काटी कई रातें तन्हा
जिंदा हूँ क्यूँ बता नहीं सकती

ख़्वाब मेरे कई अधूरे है
पर उन्हें मैं भुला नहीं सकती

जागते रहना सीखा आँखों ने
मैं इन्हें अब सुला नहीं सकती

कौन किसका यहाँ पे है सरिता
वक्त को मैं दिखा नहीं सकती

सरिता कोहिनूर 💎

खेलत राम

हाइकु

खेलत राम
माँ कौशल्या अंगना
चारो भइया।

बाजे नूपुर
छुम छुम छनन
मैया मगन।

मात सुमित्रा
देखि देखि सुत को
भाग्य सराहे।

दौड़त राम
लखन भरत भी
संग शत्रुध्न।

माँ कैयकई
मगन मन में हो
निहारे लाला।

अंगना झूमें
प्रभू पांयन  चूमे
धन्य भाग्य है

भोजन छोड़
इत उत भागत
मुख में दधि।

पिता बुलावे
गोद ले दुलरावे
भागत उठ।

चारो भइया
नाचे ता ता  थइया
देखे मंइया।

धन्य भाग्य है
अयोध्या नगर के
आये राम जी।

पंछी चहके
फुलवारी महके
देख राम को।

मगन नर
नारी गीत गाती है
पंइया पड़।

केवरा यदु"मीरा"

बे खबर

' बे खबर '

मैं बे खबर हूँ तेरे हौसलों से, तू खेल रहा मेरे उसूलों से,
मत कर ऐसी दगाई मेरे राही, हाल मैंने नहीं दिल ने जाना है।

मैं बे खबर हूँ तेरे हौसलों से,
तू खेल रहा मेरे उसूलों से...!

तुझे दिया फूल बे असर हो रहा,
पहाड़ों पर लिखे नाम तू भूल रहा,
इतना भी तूने क्या जायज कर दिया,
मेरा दिल भी हमेशा बे कसूर रहा |

मैं बे खबर हूँ तेरे हौसलों से,
तू खेल रहा मेरे उसूलों से....!

जगमगा रही जिंदगी को बुझाने लगा हैं,
भीग रहे ख़्वाबों को तू सुखाने लगा है,
मेरे रह गुज़र को मिटा रहा हैं तू,
पर अब मैं खबरदार हूँ तेरे वसूलों से |

मैं बे खबर हूँ तेरे हौसलों से,
तू खेल रहा मेरे उसूलों से...!

दिल पर दगाबाजी की मुहर लगा रहा,
जिंदगी की कुछ यादें वो पहर गंवा रहा,
मेरे चंद महताबों में शुमार रखूँगा,
मेरी अकेली राह में एक तू कारवां रहा |

मैं बे खबर हूँ तेरे हौसलों से,
तू खेल रहा मेरे उसूलों से....
मत कर ऐसी दगाई मेरे हमराही,
हाल मैंने नहीं दिल ने जाना है।

🖋 खेतदान चारण ' स्नेहीमन '

जिंदगी की राहों मे..

जिंदगी की राहों में ,
दोस्ती का महफिल मिलता है ,
तुम मिलो या ना मिलो ,
रास्ते हजार मिलते है !

जिंदगी एक टूटी हुई चिंगारी हैं ,
जिसमें आग लगती रहती हैं ,
कभी यह आग सुलगती तो ,
कभी मुरझाती रहती है !

~ रूपेश कुमार©

ईमली

🌷यशवंत"यश"सूर्यवंशी 🌷
      भिलाई दुर्ग छग

हाइकु

🥀ईमली🥀

मन मचला
संतान के संकेत ~~
ईमली  खट्टी ।

ईमली  छांव
चौपाल बैठे गांव ~~
कोर्ट के दांव।

पांव है भारी~~
ईमली की चाहत
होती है नारी ।

🌷यशवंत"यश"सूर्यवंशी 🌷
       भिलाई दुर्ग छग.

आओ मनायें होली

*आओ मनायें होली*

इन्द्रधनुषी रंग के संग आओ मनायें होली
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली

बरसाने में राधा के संग होली खेले नंदलाल
रंग बिरंगी छटा बिखेरे मिलके अबीर गुलाल

रंगने निकले आज नटवर को ललिता की टोली...
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली...

पीली सरसों से रंग लेकर करे रंगीली बौछार
स्नेह भरी पिचकारी से छलकता रहे प्यार

सतरंगी रंगों से मिलकर बनते आज रंगोली...
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली...

राम लखन भरत शत्रुघन उड़ावे अबीर गुलाल
नल नील सुग्रीव जामवंत हनुमत करे कमाल

किरपा है उस ईश्वर की जो भरते सबकी झोली...
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली

मिटे भ्रष्टाचार देश की मेरे जहान में शांति रहे
सूरज बनके फैलाता जग में अपनी कांति रहे

नहीं फटे कहीं गोला बारुद न चले कही गोली...
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली...

खुशनुमा हो जीवन सबका रंग भरा आसमान हो
लक्ष्य हो पूर्ण सभी का सफलता का सोपान हो

मंगलमय कामनाओं से भरी हो सबकी झोली...
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली...

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगाँव डौंडी लोहारा
९८२६७००३१९
९६१७५८९६६७

शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018

कब होही तोर दरसन

*कब होही तोर दरसन*

कब होही तोर दरसन
होबे कब तैहा परसन
मया ल तोरले पायबर
होवत हे मोला अड़चन

होही कब मोर आस पूरा
जिनगी तोर बिन हे अधूरा
मर जहूँ तइसे लगथे मोला
धकले करथे मोर जीवरा

कब मनाबो जी हम होरी
बँधाही कब मया के डोरी
रस्दा ल तोर देखत रहिथों
चंदा ल देखय जस चकोरी

तै मोर राधा बनवारी मैं
बिन रंग के पिचरारी मैं
हावस चंदा कस दूरिहा
हँव जस अँधियारी मैं

सपनाथंव तोला रात कून
दया नइ लागय थोरकून
काबर तै कलपावत हस
बात मान लेतेस मोर सून

तडपत हँव तोर मया बर
लेवस नइ तैह मोर खबर
का अइसन बात होगे हे
अब नइ धर सकंव सबर

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
९६१७५८९६६७
९८२६७००३१९

बुधवार, 21 फ़रवरी 2018

धरती वंदना

धरती दाई तोर अबोध लइका कइसे करँव मँय बखान ओ
तोर कोरा म जनम धरिन तुलसी कबीर रसखान ओ

भारत माता के दुलौरिन बेटी छत्तीसगढ़ तँय कहावय
अरपा पैरी महानदी के धार ह सुग्घर बोहावय

तोर अछरा के छंइहा म दाई लहरावय धान ओ
तोर कोरा म जनम धरिन तुलसी कबीर रसखान ओ...

बीर नरायन गैंदसिह नायक तोरेच सेवा बजाइन हे
मान तोर राखेबर दाई अपने प्रान गँवाइन हे

ए भुंइया कोन्हा कोन्हा लागय सोनहा खान ओ
तोर कोरा म जनम धरिन तुलसी कबीर रसखान ओ...

शबरी के जूठा बोईर ल खाइस राम ह जिहा आके
धन्य होगे हमर भुंइया नवधा भगति ल पाके

गंगा मंइया तेलीन सत्ती सबके महिमा गान ओ
तोर कोरा म जनम धरिन तुलसी कबीर रसखान ओ...

तोर कोरा लागे हमर बर संऊहत तीरथ धाम असन
तोर मान रखेबर दाई करबोन जुरमिल के जतन

आही बेरा पाछू नइ घूंचन छोंड़ देबो हम प्रान ओ...
तोर कोरा म जनम धरिन तुलसी कबीर रसखान ओ...

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बसंत राग

*💐🙏🏻~ हाइकु मञ्जूषा ~🙏🏻💐*
                   *(क्र. - 09)*
          *दिनांक 19/02/2018*
                 *दिन - सोमवार*   
          *हाइकु सृजन का विषय*

                       *कली*
                       *पुष्प*
                      *भ्रमर*
                      *बसन्त*

        *विषय संदर्भित हाइकु सृजन काल प्रातः 08.00 से रात्रि 08.00 बजे तक ।*

*विषय प्रदाता - आ. किरण मिश्रा जी*
*संचालक - प्रदीप कुमार दाश "दीपक"*
💐💐💐💐💐💐💐💐💐
*चयनित हाइकु*

बेटी वसंत
टेसू भरा आँगन
श्वास पर्यन्त ।

✍🏻वीणा शर्मा

बसन्त आया
कुंहूकुंहू कोयल
प्रसन्न चर्या ।

✍🏻तुकाराम पुंडलिक खिल्लारे        

बसंत आया
सुगन्धि नाच उठी 
जग बौराया ।
                                   
✍🏻सूर्यनारायण गुप्त "सूर्य"             
           
मन बसंत
खिला स्नेह की कली
महके रिश्ते ।

✍🏻रामेश्वर बंग

लुटा बसंत
कामुक था महंत
जीवन अंत ।

✍🏻गंगा पांडेय "भावुक"

फूल रंगोली
है धरा कैनवस
रचे प्रकृति ।

✍🏻मीनाक्षी भटनागर

मासूम कली
घर आँगन खिली
लगती भली ।

✍🏻ज्योतिर्मयी पंत

भ्रमर गूँजें
मकरंद लालसा
पुष्प मित्रता ।

✍🏻ज्योतिर्मयी पंत

कुच कलश
थरथराने लगे
काम के पुष्प ।

✍🏻देवेन्द्रनारायण दास

प्रकृति नटी
मधुमय उमंग
हँसे सुमन ।

✍🏻देवेन्द्रनारायण दास

बिटिया कली
मन आँगन खिली
चाहत मिली ।

✍🏻डाॅ. संजीव नाईक

खिली कोंपल
मासूम सी किल्कारी
गूंजा आँगन ।

✍🏻उषा साहिबा

पीली सरसों 
केशरी है पलाश 
पुष्प सुवास । 

✍🏻सुशील शर्मा

रंग अनंत 
चित्रकार बसंत 
सजा दिगंत  ।

✍🏻सुशील शर्मा

बासन्ती भोर
पलाश दिनकर
क्षितिज कोर ।

✍🏻किरण मिश्रा

नैन भ्रमर
मुकुलित कँवल
मनस सर !

✍🏻किरण मिश्रा "स्वयंसिद्धा"

डाली का फूल
नाजुक सी जिन्दगी
करे कबूल ।

✍🏻बलजीत सिंह
     
तितली  रानी
रंगीन  फूलों  पर
हुई  दीवानी ।
     
✍🏻बलजीत  सिंह

फूलों की बातें
हवा हौले-से सुने
कहानी बुने ।

✍🏻पुष्पा सिंघी

भौंरा गुंजारे
जैसे कोई तपस्वी
मन्त्र उच्चारे ।

✍🏻डा.आनन्द शाक्य

पत्तियां देखें
पुष्प, भौंरे, बसंत
बनके संत ।

✍🏻शेख़ शहज़ाद उस्मानी

नवोढा कली
बिखरी अधखिली
भाग्य का खेल ।

✍🏻सुरंगमा यादव

रजनी भागी
किरणों की थपकी
कलियाँ जागी ।

✍🏻ऋतुराज दवे

भंवरा गाये
कलियों को रिझाये
पराग पाये ।

✍🏻गंगा पांडेय "भावुक"

अल्हड़ कली
सहमी सी संभली
उर में अलि ।

✍🏻दाता राम पुनिया

आया बसंत
धरती आच्छादित
फूले रसाल ।

✍🏻स्नेहलता "स्नेह"

न तोड़ कली
जग में आने तो दो
खुशियाँ देगी ।

✍🏻रविबाला "सुधा" ठाकुर

खिले सुमन
इठलाए चमन
पुलके मन ।
    
✍🏻रविबाला "सुधा" ठाकुर

बसंत राग
कोयल गाती कैसे ?
बनके कैदी ।

✍🏻तोषण कुमार चुरेन्द्र

बसंत ऋतु
सभी के मन भाए
जी भरमाए ।

✍🏻मधु गुप्ता "महक"

छाये बसन्त
हर मन तरंग
फूले पलास।

✍तेरस कैवर्त्य "आँसू"

फूल को देख
अलि गुनगुनाये
बाग में झूमे ।

✍🏻सविता बरई

ऋतु बसंत
कुहुकिनी कुहूके
डाल में झूले ।

✍🏻सविता बरई

आया बसंत
आम्र  कुंज महके
फूले पलाश ।

✍🏻केवरा यदु

ऋतु बसंत
कामदेव ने भेजा
खुशी अनंत ।

✍🏻भीष्मदेव होता
        
सरसों फूले
बसंत आगमन
चेहरे खिले ।

✍🏻अनिता मंदिलवार "सपना"
💐💐💐💐💐💐💐💐💐

बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

शिव भजन

पहिने बाघंबर साला गलेयन में मुंड के माला...
आसन लगाए तँय पहाड़ मा
तोर तीर आएंव भोला सुनले गोहार ला..

मांथे मा चंदा सोहे गंगा मइया साथ मा
एक हाथ तिरशुल सोहे डमरु धरे हाथ मा
नंदी के तैहा चढ़इया भृंगी हे सेवा बजइया...
परबतिया हे तोर साथ मा
तोर तीर आएंव भोला सुनले गोहार ला...

अवघढ़िया तोला कहिथे,बम भंगिया तोला कहिथे
साँप डेढ़ू बिचछी कुच्छी सब संग मा तोर रहिथे
महादेव तैहा कहैया किरपा तै सब पे करइया
करदे तै किरपा के बौछार ला

तोर तीर आएंव भोला सुनले ले होबार ला

तोषण कुमार चुरेन्द्र
arhkepagakalagi.blogspot.com

शिव भजन

पहिने बाघंबर साला गलेयन में मुंड के माला...
आसन लगाए तँय पहाड़ मा
तोर तीर आएंव भोला सुनले गोहार ला..

मांथे मा चंदा सोहे गंगा मइया साथ मा
एक हाथ तिरशुल सोहे डमरु धरे हाथ मा
नंदी के तैहा चढ़इया भृंगी हे सेवा बजइया...
परबतिया हे तोर साथ मा
तोर तीर आएंव भोला सुनले गोहार ला...

अवघढ़िया तोला कहिथे,बम भंगिया तोला कहिथे
साँप डेढ़ू बिचछी कुच्छी सब संग मा तोर रहिथे
महादेव तैहा कहैया किरपा तै सब पे करइया
करदे तै किरपा के बौछार ला

तोर तीर आएंव भोला सुनले ले होबार ला

तोषण कुमार चुरेन्द्र
arhkepagakalagi.blogspot.com

शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2018

चली बयार

*" हाइकु मंच छत्तीसगढ़ "*
💐💐💐💐💐💐💐

*09 फरवरी आज के हाइकु का विषय :-*
       *बसंत*
       *बयार*
       *रंग*
       *सरसों*
       *गुलाब*

    *चयनित हाइकु*

*01. गुलाब रोया*
*शहीद से लिपट*
*सुपुत्र खोया ।*

*✍🏻स्नेहलता वर्मा*

*02. परसा फूले*
*फागुन रंग खिले*
*वन झाड़ में ।*

*✍🏻नरेश कुमार जगत*

*03.चली बयार*
*लिये फागुन राग*
*जग रंगोली ।*

*✍🏻तोषण कुमार चुरेन्द्र*

*अतिरिक्त : ----*

*01.रंग-बिरंगे*
*प्रसूनों से सज के*
*प्रकृति झूमे ।*

*✍🏻सविता बरई*

💐💐💐💐💐

*विषय प्रदत्त : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी*
*समीक्षिका : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी*
*हाइकु चयनकर्ता : आ. देवेन्द्र नारायण दास जी*
*संचालक : प्रदीप कुमार दाश "दीपक"*
💐💐💐💐💐💐💐

गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

बसंत बयार

" हाइकु मंच छत्तीसगढ़ "
      09/02/2018
आज के हाइकु का विषय
          💐💐💐

फरवरी माह को ध्यान में रखते हुए ये विषय :-

बसंत//बयार
//रंग//सरसों //गुलाब

विषय प्रदत्त : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी

समीक्षिका : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी

हाइकु चयनकर्ता : आ. देवेन्द्र नारायण दास जी

संचालक : प्रदीप कुमार दाश "दीपक"

को सादर संप्रेषित....

*बसंत*

खिले  पलाश
मदमाती  बसंत
आम्र  मञ्जरी...

*बयार*

चली  बयार
लिये  फाल्गुन  राग
जग  रंगोली...

*रंग*

रंग  परब
छटा  इंद्रधनुषी
उड़े  गुलाल...

*सरसों*

पीली  सरसों
हरीतिमा  धरा
घानी  चुनरी...

*गुलाब*

सुर्ख  गुलाब
प्रेम  परिचायक
जगाते  ख्वाब...

सात घंटे

सात घंटे

वो  तेरे सात घंटों का साथ
पल - पल  हर पल है खास
दूरी है मुझसे गम नही कोई
रहती तू सदा  दिल के पास

रहता  है  तेरी बातों में नशा
भा  जाती  है  तेरी हर अदा
अकेले में  रहती  है साथ तू
रोम -रोम में है तेरा एहसास
दूरी है मुझसे गम नही कोई
रहती तू सदा  दिल के पास

तुम मुझसे रुठती मैं तुझसे
दोनों  का यूं मानना मनाना
कभी होंगे न जिंदगी में हम
कभी  भी  कहीं  भी उदास
दूरी है मुझसे गम नही कोई
रहती तू सदा  दिल के पास

हमारा रिश्ता  बरसो पुराना
भूला न  पाएगा  ये जमाना
बारहमासी  प्रेम   है अपनी
बनी रहेगी ये सदा मधुमास
दूरी है मुझसे गम नही कोई
रहती तू सदा  दिल के पास

मर  भी जाऊंगा जो मैं अगर
इश्क मेरा रहेगा हमेशा अमर
तुझको पाने को मेरा ये दिल
जन्म जनम लेता रहेगा साँस
दूरी  है  मुझसे गम नही कोई
रहती  तू सदा  दिल के पास

तोषण कुमार चुरेन्द्र

तेरे दर पे

*तेरे  दर  पे  आकर  फरियाद  करता  हूँ.*
*हर  घड़ी  हर  पल  तुझे  याद  करता हूँ.*
*सुनना या ना सुनना  मेरी  मर्जी  है  तेरी,*
*आसरा से जिंदगी खुद आबाद करता हूँ.*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र ९६१७५८९६६७*

माँ की सुरत

माँ की सूरत
आईना बेटियों की
नेक नियत...

तेरी ही छवि
दे माँ नव जीवन
बनूँगी रवि...

बनूँ तूफान
मुश्किलों से मैं लड़ूँ
हारे चट्टान...

बिटिया प्यारी
सीता सावित्री मनु
राज दुलारी...

शिवा की माता
जिंदादिली जीजा की
भाग्य निर्माता...

चलूँ उड़ते
स्वच्छंद अंबर पे
मन झूमते...

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बसंत बयार

" हाइकु मंच छत्तीसगढ़ "
      09/02/2018
आज के हाइकु का विषय
          💐💐💐

फरवरी माह को ध्यान में रखते हुए ये विषय :-

बसंत//बयार
//रंग//सरसों //गुलाब

विषय प्रदत्त : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी

समीक्षिका : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी

हाइकु चयनकर्ता : आ. देवेन्द्र नारायण दास जी

संचालक : प्रदीप कुमार दाश "दीपक"

को सादर संप्रेषित....

*बसंत*

खिले  पलाश
मदमाती  बसंत
आम्र  मञ्जरी...

*बयार*

चली  बयारें
लिये  फाल्गुन  राग
जग  रंगीली...

*रंग*

रंग  परब
छटा  इंद्रधनुषी
उड़े  गुलाल...

*सरसों*

पीली  सरसों
हरीतिमा  धरा
घानी  चुनरी...

*गुलाब*

सुर्ख  गुलाब
प्रेम  परिचायक
जगाते  ख्वाब...

बुधवार, 17 जनवरी 2018

तरु है दादा

१७-१-१७
का हाइकु

तरु  है  दादा
परिवार  का  मूल
नेक  इरादा

जीवन  मेरा
पिता  का  आशीर्वाद
छाँव  का  घेरा

मूरत  माँ  की
ममता  का  आँचल
तीरथ  झाँकी

भातृ  का  स्नेह
दुलार  भउजी  की
कंचन  मेह

बहन  की  राखी
स्नेह  भरी  रसरी
उड़ती  पाखी

तोषण कुमार चुरेन्द्र
https://arhkepagakalagi.blogspot.in/?_e_pi_=7%2CPAGE_ID10%2C1582631584

सोमवार, 15 जनवरी 2018

तन्हाइयों में

तन्हाइयों में दर्द-ए -मोहब्बत का एहसास होता है. मिट जाते हैं सारे गम जब वो दिल के पास होता है. नजरों का यूँ रह रहकर मिलना मिलके झुक जाना, खुशनुमा वो हसीन पल जो हरपल खास होता है तोषण कुमार चुरेन्द्र

तन्हाइयों में

तन्हाइयों में दर्द-ए -मोहब्बत का एहसास होता है. मिट जाते हैं सारे गम जब वो दिल के पास होता है. नजरों का यूँ रह रहकर मिलना मिलके झुक जाना, खुशनुमा वो हसीन पल जो हरपल खास होता है तोषण कुमार चुरेन्द्र

तन्हाइयों में

तन्हाइयों में दर्द-ए -मोहब्बत का एहसास होता है. मिट जाते हैं सारे गम जब वो दिल के पास होता है. नजरों का यूँ रह रहकर मिलना मिलके झुक जाना, खुशनुमा वो हसीन पल जो हरपल खास होता है तोषण कुमार चुरेन्द्र

मुक्त मुक्तक

*तोषण कुमार चुरेन्द्र की कलम से*

[1/7, 2:09 AM] Toshan Kumar Churendra:

रब कहता है

मैं वो करीगर हूं पत्थर को भगवान बना देता हूं
सुनो अबोध बालक को इंसान बना देता हूं
करले जरा मेरी पहचान रे तोषण
सारे जग में तुम सबकी पहचान बना देता हूं

[1/7, 2:13 AM] Toshan Kumar Churendra:

करले मेरी भक्ति तुझे मालामाल कर दूंगा
सोंचा न हेगा तु जग में निहाल कर दूंगा
एक मैं ही हूं सबका साथी तोषण
गरीब को अमीर अमीर को कंगाल कर दूंगा

[1/7, 2:18 AM] Toshan Kumar Churendra:

रहमत तेरी मुझ पर दाता हर कदम बरसता रहे
दुखो का न हो सामना जीवन सदा सरसता रहे
मिलकर बांटूं तेरी गाथा करता रहूं सिर्फ तेरा ध्यान
सब में हे प्रेम भाईचारा विश्व में सदा समरसता रहे

[1/7, 2:25 AM] Toshan Kumar Churendra:

मंच से हमारे हे विप्रवर आपको सादर बिदाई है
आगत का हम करेंगे स्वागत यही आदर पहुनाई है
मधुर मधुर सी तान से  पल्वित धरा हमारा है
सुन दर्शक दीर्घा स्रोता समाज ने जोरदार तालियाँ बजाई है

[1/7, 2:33 AM] Toshan Kumar Churendra:

हरी की हरियाली देता संतो
राम नाम गुन गाने का
भक्त और भगवान को एक दुसरे से मिलाने का
पीली आपको इशारा करेगी पांच मिनच है शेष
छा जाए लालिमा मंच में समझो जाना अपना देश

[1/7, 2:37 AM] Toshan Kumar Churendra:

जिनगीच के राहत ले लकर लकर तै करबे
लकर लकर तै झन कर संगी एक दिन तै हफरबे
हफरे के पहिली करले जोरा गाले तै सिया राम ल
संवरे नही जियत ले संगी मरे के बाद संवरबे

[1/7, 2:40 AM] Toshan Kumar Churendra:

जियत ले हे तोर मोर कोनो नइ देवय साथ गा
रुपिया पैसा महल अटारी जावय नइ तो साथ गा
राम रमैय्या जपले तैहा मन में धरले ध्यान जी
पार लगाही दसरथ नंदन मोर सिया पति रघुनाथ गा

[1/7, 2:50 AM] Toshan Kumar Churendra:

ए तन माटी के खिलौना
पानी परे घुर जाही जी
रुपिया पैसा धन डोगानी
काम घलो नइ आही जी
जियत भरके संगी साथी
मरेम पीताम्बर ओढ़ाही जी
रापा कुदारी म गड्ढा करके
भुइया म तोला गडियाही
नइ खवाय तोला  तात पेज
दसकरम म भोग लगाही जी
तोर कमइ ल फुदर फुदर के
नंगत मजा उड़ाही जी
राम नाम सुमरन करले संगी
इही काम तोर आही जी
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सोमवार, 18 दिसंबर 2017

सतरा बारा सतरा

जब ये सतरा बारा सतरा आया
वही एहसास फिर दिल में लाया
आरजू थी जमाने से मिलन की
खुशनुमा वो पल जो साथ पाया

आई जब करीब वो मेरे दिल के
तारे चमकने लगी खिल खिल के
बेकाबू होकर लरजते रहे ये लब
नज़रे हमें सताने लगी मिल मिल के

थी सांसे इक दुजे में समाने लगी
हसरत बरसों की क्यूं जगाने लगी
भूल जाना चाहता था सारी बंदिशे
एक वो ही थी बहाने बनाने लगी

तकलीफ़ हुई दिल को उसकी जुदाई पर
हंसती रही रातें ओर चांद मेरी तन्हाई पर
मजबूरी थी उसकी और बेबसी मेरी भी
रास न आया रब को  बंदे की दुहाई पर

उस पल का मुझे हमेशा इंतजार रहेगा
बातों पर उसकी हमेशा ऐतबार रहेगा
कहेगी वो कभी आजा करले पुरी हसरत
सच होंगे सपने या दिले राजदार रहेगा

तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७

सोमवार, 20 नवंबर 2017

दिन ढहते

आँसू कहते
कब आओगे तुम
दिन ढलते.....

निहारुँ राह
है मन आनंदित
प्रेम की चाह...

हो आगमन
चकवा निहारती
स्वाती की बूँद....

तोषण कुमार चुरेन्द्र

शुभकामना

एकता शक्ति 
पूरे हो अरमान
शुभकामना

ओस की बूँदे
टिमटिमाते तारे
धरा अम्बर...

कर्म है तेरा
न हो इच्छा फल की 
कृपा ईश की...

खेलते बच्चे
धरना में शिक्षक 
तम भविष्य

माँ की डाँट 
नसीब में भी नही
रुठी किस्मत.. .

माँ की यादें
है अंतरात्मा बसी
भीगी पलकें

तोषण कुमार चुरेन्द्र

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रविवार, 19 नवंबर 2017

अपना गाँव

तरु की छाँव
खेलता बचपन
अपना गाँव

मिट्टी चंदन
निखरित मस्तिष्क
कोटि वंदन

बहे सरिता
है धरा पल्लवित
मग पुनिता

कुँजती पिक
लगे मनभावन
देती सीख

कृषक झुमे
लहलहाते धान
माथा चुमे

पुष्प पलाश
देती नव चैतन्य
पूरी तलाश

तोषण कुमार चुरेन्द्र

शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

बनें महान


संकल त्रय
   सप्तविंशति पुष्प
         मंगलमय

दर बदर
है चहल - पहल
       चार पहर

करें सम्मान
होकर आगाहित
       बनें महान

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मंगलवार, 31 अक्टूबर 2017

दाई के कोरा

दाई के कोरा
हे धान के कटोरा
तिहार पोरा...

सोहय धान
छत्तीसगढ़हीन
बेटा किसान...

कौशल राज
ननिहाल राम के
नाचव आज...

नवा अंजोर
जगमगात गढ़
माते हिलोर...

होके मगन
जुरमिल नाचव
झुमे गगन...

•तोषण कुमार चुरेन्द्र•

छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस

१ नवंबर २०००
छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस
पर हाइकु

छत्तीसगढ़
है स्थापना दिवस
सतत बढ़...

तरक्की करे
खुशहाल प्रदेश
उमंग भरे...

मनोकामना
मेरा छत्तीसगढ़
करे साधना...

सुवा करमा
करे गौरवान्वित
तेरी महिमा...

माथ नवाएँ
मंगलाचार करें
महिमा गाएँ...

पावन धाम
है दक्षिण कौशल
निर्मल ग्राम...

श्रृंगी आश्रम
बड़ा मनभावन
शबरी धाम...

•तोषण कुमार चुरेन्द्र •

गुरुवार, 7 सितंबर 2017

लोटा

पीतल-काँसा छोड़ के, ताँबा लोटा भाय।
अमरित कस पानी लगय,तन-मन सब हरियाय।।

बिना धुरी लोटा असन,झन बनिहव इंसान।
येती-ओती झन घुमर,नइ मिलही  पहिचान।।

मत बन रहव गिलास सब, लोटा बने रहाव।
प्यास बुझावव चार के,जिनगी सुफल बनाव।।

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शिवनाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...