*💐🙏🏻~ हाइकु मञ्जूषा ~🙏🏻💐*
*(क्र. - 09)*
*दिनांक 19/02/2018*
*दिन - सोमवार*
*हाइकु सृजन का विषय*
*कली*
*पुष्प*
*भ्रमर*
*बसन्त*
*विषय संदर्भित हाइकु सृजन काल प्रातः 08.00 से रात्रि 08.00 बजे तक ।*
*विषय प्रदाता - आ. किरण मिश्रा जी*
*संचालक - प्रदीप कुमार दाश "दीपक"*
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*चयनित हाइकु*
बेटी वसंत
टेसू भरा आँगन
श्वास पर्यन्त ।
✍🏻वीणा शर्मा
बसन्त आया
कुंहूकुंहू कोयल
प्रसन्न चर्या ।
✍🏻तुकाराम पुंडलिक खिल्लारे
बसंत आया
सुगन्धि नाच उठी
जग बौराया ।
✍🏻सूर्यनारायण गुप्त "सूर्य"
मन बसंत
खिला स्नेह की कली
महके रिश्ते ।
✍🏻रामेश्वर बंग
लुटा बसंत
कामुक था महंत
जीवन अंत ।
✍🏻गंगा पांडेय "भावुक"
फूल रंगोली
है धरा कैनवस
रचे प्रकृति
।
✍🏻मीनाक्षी भटनागर
मासूम कली
घर आँगन खिली
लगती भली ।
✍🏻ज्योतिर्मयी पंत
भ्रमर गूँजें
मकरंद लालसा
पुष्प मित्रता ।
✍🏻ज्योतिर्मयी पंत
कुच कलश
थरथराने लगे
काम के पुष्प ।
✍🏻देवेन्द्रनारायण दास
प्रकृति नटी
मधुमय उमंग
हँसे सुमन ।
✍🏻देवेन्द्रनारायण दास
बिटिया कली
मन आँगन खिली
चाहत मिली ।
✍🏻डाॅ. संजीव नाईक
खिली कोंपल
मासूम सी किल्कारी
गूंजा आँगन ।
✍🏻उषा साहिबा
पीली सरसों
केशरी है पलाश
पुष्प सुवास ।
✍🏻सुशील शर्मा
रंग अनंत
चित्रकार बसंत
सजा दिगंत ।
✍🏻सुशील शर्मा
बासन्ती भोर
पलाश दिनकर
क्षितिज कोर ।
✍🏻किरण मिश्रा
नैन भ्रमर
मुकुलित कँवल
मनस सर !
✍🏻किरण मिश्रा "स्वयंसिद्धा"
डाली का फूल
नाजुक सी जिन्दगी
करे कबूल ।
✍🏻बलजीत सिंह
तितली रानी
रंगीन फूलों पर
हुई दीवानी ।
✍🏻बलजीत सिंह
फूलों की बातें
हवा हौले-से सुने
कहानी बुने ।
✍🏻पुष्पा सिंघी
भौंरा गुंजारे
जैसे कोई तपस्वी
मन्त्र उच्चारे ।
✍🏻डा.आनन्द शाक्य
पत्तियां देखें
पुष्प, भौंरे, बसंत
बनके संत ।
✍🏻शेख़ शहज़ाद उस्मानी
नवोढा कली
बिखरी अधखिली
भाग्य का खेल ।
✍🏻सुरंगमा यादव
रजनी भागी
किरणों की थपकी
कलियाँ जागी ।
✍🏻ऋतुराज दवे
भंवरा गाये
कलियों को रिझाये
पराग पाये ।
✍🏻गंगा पांडेय "भावुक"
अल्हड़ कली
सहमी सी संभली
उर में अलि ।
✍🏻दाता राम पुनिया
आया बसंत
धरती आच्छादित
फूले रसाल ।
✍🏻स्नेहलता "स्नेह"
न तोड़ कली
जग में आने तो दो
खुशियाँ देगी ।
✍🏻रविबाला "सुधा" ठाकुर
खिले सुमन
इठलाए चमन
पुलके मन ।
✍🏻रविबाला "सुधा" ठाकुर
बसंत राग
कोयल गाती कैसे ?
बनके कैदी ।
✍🏻तोषण कुमार चुरेन्द्र
बसंत ऋतु
सभी के मन भाए
जी भरमाए ।
✍🏻मधु गुप्ता "महक"
छाये बसन्त
हर मन तरंग
फूले पलास।
✍तेरस कैवर्त्य "आँसू"
फूल को देख
अलि गुनगुनाये
बाग में झूमे ।
✍🏻सविता बरई
ऋतु बसंत
कुहुकिनी कुहूके
डाल में झूले ।
✍🏻सविता बरई
आया बसंत
आम्र कुंज महके
फूले पलाश ।
✍🏻केवरा यदु
ऋतु बसंत
कामदेव ने भेजा
खुशी अनंत ।
✍🏻भीष्मदेव होता
सरसों फूले
बसंत आगमन
चेहरे खिले ।
✍🏻अनिता मंदिलवार "सपना"
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