शुक्रवार, 23 अप्रैल 2021

लेखनी


कुण्डलियाँ
लिखती जाए लेखनी,बदले है इतिहास।
योगदान भी आपकी,महके बन मधुमास।
महके बन मधुमास,पवन देखो लहराये।
जले नवीन मशाल,गीत जोशीला गाये।
करते नाज समाज,गगन में तारा दिखती।
देता नव संदेश,कलम जो निशदिन लिखती।।
रचना-
तोषण कुमार चुरेन्द्र

बुधवार, 21 अप्रैल 2021

नीति नियम


पढ़ा लिखा इन्सान कोई जब 
नीति नियम पर प्रश्न उठाये।
कौन भला दुनिया में उसको 
पैर पकड़ कर समझाये।
बेमतलब की बात करे जो 
खाली पीली माथ खपाये।
अपनी पे आ जाये कोई 
उल्लू जैसे आँख दिखाये।


नीति नियम भ्राता ज्ञाता 
सब कोई अपनी हाँके जाने।
गाँव नगर लाक हुआ पूरा  
फिर भी अपनी ही है ताने। 
चलता कोई राह नहीं है 
सच्ची कितनों के समझाने।
मुर्ख बने फिरते हैं जन कोई 
बात नहीं एक न माने।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडी लोहारा

सोमवार, 5 अप्रैल 2021

कोरोना से जंग

एक बार फिर कोरोना से जंग है।
फीका- फीका फागुन का रंग है।

लगा भारत पर प्रतिबंध देखिये,
कोई मित्र नहीं किसी के संग है।

न ही कोई शोर शराबा नगर में,
न शराब पीये न ही कोई भंग है।

बरस बीता एक कोरोना कहर में,
फिर भी देखो अंतर्मन में उमंग है।

अमन  व सौहार्दभाव से मिलिये,
मिलकर  मनाये होली सतरंग है।

देवें परिचय एक्य सूत्र 'तोषण'
सतत जन-जन जीवन उमंग है।


तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौंडीलोहारा

बेरंग ही सही

बेरंग ही सही मना लिए
अब की बार होली फिर से
कोई लगाया नहीं गुलाल
न किसी मारी पिचकारी
ये कैसी है होली.....???

खुशियों में मानो ग्रहण लग गया
शैतान कोरोना काल सत्यानाश
बच्चों की चहचाहट नहीं थी
न ही नगाड़े की धुन कहीं
देखा न किसी के माथ रोली
ये कैसी है होली.....??

अबीर गुलाल का नहीं निशाँ
डी जे भी थे सब बंद पड़े
थिरकन नहीं थे पाँव पे
खड़े खड़े दूर से ताक रहे थे
एक दूजे को हमजोली
ये कैसी है होली.....??

ऐसा दिन न मिले किसी को
न छाये कभी गम के बादल
दुआ है परवरदिगार से मेरी
कुबुल करना सरकार अभी
भीगे बरस अगले सूखे चोली
ठीक से हो नित होली....√√ 

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौंडी लोहारा

रविवार, 28 मार्च 2021

मोर गाँव के शीतला


मोर गाँव के शीतला...

मोर गाँव के शीतला,शीतल हे जुड़ तोर छंइहा
शीतल हे जुड़ तोर छंइहा,शीतल हे जुड़ तोर छंइहा

दया ले तोर दाई ओ,चलत हे मोर जिनगी ह
देवत हे भर-भर ममता,सुनत हे सबके बिनती ल
करत हे तोर सेवा ल,जोरे जोरे सबो बंइहा....
मोर गाँव के शीतला,शीतल हे जुड़ तोर छंइहा....

चरन म जेन हर आथे,नंइ खाली हाथ वो जाथे
जय दाई मात शीतला के,सेवा जस गीत ल गाथे
पवनपुत सेऊक तोरे,अउ लखन राम कन्हैया...
मोर गाँव के शीतला,शीतल हे जुड़ तोर छंइहा....

महादेव ब्रह्मा बिष्णु संग,पूजय तोला ये नर-नारी
हावस तेही सहाई ओ,सबन के हस तै हितकारी
पूजा अउ पाठ नंइ जानँव,मँय दिनकर हँव गा मनबइहा...
मोर गाँव के शीतला,शीतल हे जुड़ तोर छंइहा....


तोषण कुमार चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौंडीलोहारा बालोद
छत्तीसगढ़ 491771

हाय रे मोर परसा के फूल


हाय ओ मोर परसा के फूल,मार डारे हँसाई खुले खुल
हाय गा मोर सरसो के फूल,मोही डारे तोर रेंगना झूले झूल
#########
फागुन महिना गोरी, उड़त हे गुलाल ओ
उड़त हे गुलाल
मिरगीन कस रेंगना तोरे,चेहरा लाल लाल ओ
चेहरा लाल  लाल 
हाय ओ मोर परसा के फूल........
हाय गा मोर सरसो के फूल........
#######
मँय तोर राधा रानी,किसन कन्हैया तँय
किसन कन्हैया
बिरिज मा होली खेलबो,जोरे जोरे बंइहा 
जोरे जोरे बंइहा
हाय गा मोर सरसो के फूल....
हाय मोर परसा के फूल....
#######
पीरीत के रंग मा गोरी,जिनगी ला रंग डारे ओ
जिनगी ला रंग डारे
संग कभू छूटे नाहीं,बंधना बध डारे ओ
बंधना बध डारे
हाय ओ मोर परसा के फूल.....
हाय गा मोर सरसो के फूल.....
######
संगे मा जिबो बइहा,संगी मर जाबोन गा
संगे मर जाबोन
फूल बगिया कस राजा,कुरिया बनाबोन गा
कुरिया बनाबोन
हाय गा मोर सरसो के फूल....
हाय ओ मोर परसा के फूल....
🖋️🖋️🖋️🖋️🖋️🖋️🖋️
गीतकार
तोषण  चुरेन्द्र दिनकर
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छ.ग.

शनिवार, 13 मार्च 2021

मन बसाले सियाराम

मन म बसाले सिया राम ल...
संगी बिगड़े बनाही सबके काम ल...

1
तरगे अवधपुरी,रानी कौशिल्या ह
गोड़ के धुर्रा ले,उबरे अहिल्या ह
मरा मरा जपो हरि नाम ल...

2
शबरी दाई संग, गिधवा ल तारे
बनके मितान प्रभु,बाली ल मारे
झटकुन पहुंचे हरिधाम ल.....

3
काकभुशुण्डि घलो, गुणे ल गावय
बइठे गरुड़ जी ह, शोर ल लमावय
नारद जपय सुबे शाम न...

4
ये कलजुग म संगी, नाम ह सार हे
भजले राम ल ग, तोर बेड़ा पार हे
लागे नहीं कुछु दाम ल...


तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छ.ग.
6267538036

लोग

★ *लोग* ★
===========================
दीपक बनके न सही जलते हैं लोग।
आस्तीं के सांप जैसे डसते हैं लोग।
××××××××××××××××××××××××××××
मुस्कान अधरों पर रखकर यूँ झूठी,
बेदर्द जहाँ में अपने छलते हैं लोग।
××××××××××××××××××××××××××××
देख-देख हँसती खिलती दुनिया मेरी,
फाँसने को मुझे जाल बुनते हैं लोग।
××××××××××××××××××××××××××××
रहता हूँ घिरा जमाने के रंजो गम से,
राहों पे सदा काँटे बनकर रहते है लोग।
××××××××××××××××××××××××××××
एक था एक ही रहेगा जहाँ में "तोषण,"
मिलकर मेरे ही गाँव में कहते हैं लोग
===========================

तोषण चुरेन्द्र धनगाँव
डौंडी लोहारा बालोद
छ.ग.

रविवार, 24 जनवरी 2021

नेता जी

*नेता जी*

जब जब अत्याचार बढ़ा।
तब तब नव उन्वान चढ़ा।
बनकर ढाल जो सुभाष ने,
अरि के  आगे  रौद्र खड़ा।

आजादी की खातिर जिसने,
खून देने का आह्वान किया।
लेकर एक सेना की टुकड़ी,
सीना को बढ़कर तान दिया।

नेता जी नाम अमर हो गया,
नवभारत के नव इतिहास में।
ऋणी रहेगा सदा देश अपना,
ऋतु  तीनों  मधु मधुमास में।

दिनकर  यश गाता मिलकर,
ले तिरंगा देश का स्व हाथ में।
आओ जयकार करे देश की,
हिल मिल कर एक साथ में।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौं.लोहारा

शनिवार, 16 जनवरी 2021

तैहा दीया देखाये गा



*मुखड़ा*
तैहा दीया देखाये गा तुलसी
रामायण सिरजाई के
तैहा गंगा नँहवाये गा तुलसी
राम भजन ल गाई के..

*अंतरा*
अवघड़ दानी शंकखर भोला
सती ल कथा सुनाये~~~
कँऊवा तरगे गिधवा तरगे
राम के ध्यान लगाये~~~
नारद बीना बजाये गा तुलसी
हरि भजन ल गाई के.......1

*अंतरा*
गोड़ ल धोके केवट तरगे
पुरखा ल पार लगाये~~~
नवधा सुनके शभरी उबरगे
हरि के धाम ल पाये~~~
हनुमत चुटकी बजाये गा तुलसी
भक्ति के धुन ल गाई के....2

*अंतरा*
राम नाम के अमरित धारा
गाँव गली म बोहाये~~~
आवय संगी दीदी भइय्या
मिल जयकारा लगाये~~~
तोषण खुशी मनाये गा तुलसी
हरि भजन ल गाई के.....3

©®
तोषण चुरेन्द्र{दिनकर}
धनगाँव डौंडी लोहारा

बुधवार, 13 जनवरी 2021

राम नाम




*आल्हा छंद*
*राम नाम*

आये हावस जग मा संगी,भजले राम नाम तँय थोर।
नइ भजबे ता बिरथा जाही,बात मानले थोरिक मोर।।
बेटा बेटी काम न आही,धन दौलत नइ जावय साथ।
आही यमराजा लेगेबर,मलते रहिबे तैहर हाथ।।

द्रोणा जइसे गुरु हे चलदिस,चलदिस बाली बलवान।
आही आरी पारी इकदिन,अतका संगी सबके जान।।
कोनों बाँचे रहय नही गा,जाए बर परही शमशान।
जीयत भरले तैहर भइया,राम नाम करले गुणगान।।

जपत जपत रत्नाकर तरगे,राम नाम हे लिखदिस सार।
चढ़जा दीदी चढ़जा भइया,हो जाबे ये भव ले पार।
तोषण दिनकर काहत हावय,गाले तैहा हरि के नाम।
नइ गाबे ता तँय पछताबे,बन जाही सब बिगड़े काम।।

©opy®ight
तोषण चुरेन्द्र 'दिनकर'
सरपंच/साहित्यकार
धनगाँव डौ.लोहारा

सोमवार, 11 जनवरी 2021

मोर छत्तीसगढ महातारी

मोर छत्तीसगढ़ महातारी 
तोर महिमा हावय भारी
धान के कटोरा भावय
भारत माँ के दुलारी....

नदिया नरवा डोंगरी पहाड़ी
कोरा म तोर इतरावय
हरियर हरियर खेती डोली
पुरवइय्या संग लहरावय
अमरइय्या म कुहकत हे
मनमोहनी कोयलिया कारी
मोर छत्तीसगढ़ महातारी 
तोर महिमा हावय भारी....

सुवा करमा पंथी ददरिया
मान ल तोर बढ़ावय
छत्तीसगढ़ मोर छंइहा भुंइया
मया के अचरा ओढ़ावय
तोर कोरा म गुँजत रहिथे
लइका के किलकारी
मोर छत्तीसगढ़ महातारी 
तोर महिमा हावय भारी

हलधर बेटा सुत उठ के
तोरे सेवा बजावय
महिनत करके दिन रतिहा
सोनहा धान उपजावय
खाँध म नाँगर हाथ तुतारी
बइला जेकर संगवारी
मोर छत्तीसगढ़ महातारी 
तोर महिमा हावय भारी

बीर नरायण गैंदसिंह नायक
जस कतरो बलिदानी हे
महातारी तोर रक्षा खातिर
लिखदिस अमर कहानी हे
दिनकर संग म गावत हे
छत्तीसगढ़िहा ओरी पारी
मोर छत्तीसगढ़ महातारी 
तोर महिमा हावय भारी...


तोषण कुमार चुरेन्द्र "दिनकर"
धनगाँव, डौंडी लोहारा
बालोद छ.ग

मंगलवार, 5 जनवरी 2021

बिनती तोर करत हँव रामा

बिनती तोर करत हँव रामा आजा भरे दरबार 
दीन दुखिया के लाज रखदे गावय जग संसार

सरयु नदी मा नहाखोर के अगर कपूर जलावँव
पान फूल अऊ नरिहर धरके दंडा पाँव पखारँव
मोर मुड़ी मा हाथ रखदे करदे मोर उदधार
दीन दुखिया के लाज रखदे गावय जग संसार

केंवट भैय्या के पुरखा तरगे गोड़ धोके सुख पाय
राम लखन माता जानकी गंगा ले पार लगाय
लहरा लेवय गंगा मैय्या बीच भँवर मझधार
दीन दुखिया के लाज रखदे गावय जग संसार

पक्षी राज जटायु ल तारे शबरी के बोईर खावय
भवसागर ले पार करेबर नवधा भगति सुनावय
अमृत असन लागे रामा तोर नवधा के धार
दीन दुखिया के लाज रखदे गावय जग संसार

बैरी बर तै बनथस बैरी दुखिया के मीत मितान
अन्यायी बाली ल रामा खींच के मारे बान
तोर दया ले आज गावत हँव मैं रमायन सार
दीन दुखिया के लाज रखदे गावय जग संसार

©opy®ight
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

रविवार, 3 जनवरी 2021

छत्तीसगढ़िहा युवा

विषय-छत्तीसगढ़ी युवा
======================

छत्तीसगढ़ के युवा जागव।
सुग्घर भुंइया सिरजावव।।1 

खांध  मा  नांगर धरलव।
धान के कटोरा भरलव।।2

छत्तीसगढ़ के बेटा रतन।
करले एखर बने जतन।।3

जोर  युवा  के  हाथ मा।
सरकार हे तोर साथ मा।।4

जम्मो युवा छत्तीसगढ़ के।
हाथ बढ़ावव  बढ़-बढ़ के।।5

छत्तीसगढ़ के युवा किसान।
जुरमिल करव करम महान।।6

छत्तीसगढ़ी  युवा के जोर हे।
जग मा जेकर करम शोर हे।।7

बेटा छत्तीसगढ़ महातारी के।
फूलवा जइसे  फूलवारी के।।8

शेर जइसे युवा के दहाड़ हे।
कांपे डोंगरी अऊ पहाड़ हे।।9

छत्तीसगढ़िहा युवा तलवार हे।
थरथरावय  जग  संसार हे।।10

दिनकर जइसे युवा दमके।
रात मा चंदा कस चमके।।11

तोषण कुमार चुरेन्द्र " दिनकर"
धनगाँव ,डौंडी लोहारा
जिला बालोद छ.ग.
पिन:-491771
 मो:-9617589667

गुरुवार, 10 दिसंबर 2020

सावन के महीना मा

सादर समीक्षार्थ

सावन के महीना मा...

सावन के महीना मा, 
मन मोर मँजूर कस नाचय।
सनन-सनन चलय पुरवइय्या, 
गीत मया के गावय। 

होत बिहनिया सुरूज नरायण,
नवा अंजोर बगराथे।
दंडाशरन पाँव पँइय्या परके, 
मिलजुल सब परघाथे।
संगी जँहुरिया सुआ करमा, 
पंथी ददरिया सुनावय।.....

डोंगरी पहाड़ी चिरई चिरगुन,
देख मोला मुसकाथे।
कारी बदरा गरजे घन-घन, 
भुँइया के तन हरियाथे।
बरसय पानी झूमे रूख राई, 
नदिया नरवा इतरावय।....

पिंयर-पिंयर परसा फूलवा, 
संग फगुआ के राग हे।
सात सुर के धुनी छेड़य, 
सतरंगी संगी फाग हे। 
रहिबो एक डोरी बंधाके, 
तोषण अतरी गोहरावय।...

©opy®ight
तोषण कुमार चुरेन्द्र 'दिनकर'
सरपंच/साहित्यकार
धनगाँव, डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

शनिवार, 21 नवंबर 2020

कोरोना की हार(तोषण चुरेन्द्र दिनकर)

*प्रतियोगिता का विषय*
*त्योहार पर कोरोना की हार*

कोरोना संक्रमण के बचाव तथा जनजागरूकता हेतु स्लोगन
---------------------------------------------
1.
दो गज की दूरी सदा,पल-पल धोएँ हाथ।
मास्क हमेशा हो लगा,कभी न घूमें साथ।।

2.
सेनेटाईजर रखें,हरदम अपने पास।
भीड़ भाड़ से सब बचें,बातें मानों खास।।

3.
सर्दी खाँसी हो अगर,करें त्वरित उपचार।
अस्पताल में जाँच से,मिटते रोग हजार।।

4.
आओ इस त्योहार में,दे कोरोना मार।
मानवता की जीत हो,कोरोना की हार।।

5.
जागरूक हम सब बनें,करें देश हित काज।
कोरोना जड़ से मिटे,करें कर्म ये आज।।

6.
जायें जब बाजार हम,या फिर चलें दुकान।
बिन मास्क लेना नहीं,कोई भी सामान।।

7.
बाल युवा बूढ़े-बड़े , रखना सब ये ध्यान ।
मास्क का उपयोग हो,तभी बचेगी जान ।।

8.
कोरोना के काल में , मिलकर ठानें आज ।
जीतेगा अपना वतन , सबको होगा नाज ।।

9.
दीवाली त्यौहार में , दमके मोती शीप ।
कोरोना तम दूर हो , घर-घर चमके दीप ।।

10.

मिलकर कर लें फैसला,कोरोना हो दूर।
सर से लेकर पॉव तक , होवे चकनाचूर।।

11.
स्वच्छ रहे संसार में,खुशियाँ मिले हजार।
खुशियों की दीपावली,कोरोना की हार।।


नाम - भैय्या डुमेश कुमार चुरेन्द्र
पिता - श्री तोषण कुमार चुरेन्द्र
कक्षा - आठवीं
विद्यालय - सरस्वती शिशु मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय डौंडी लोहारा
जिला - बालोद (छ.ग.)491771
मोबाइल - 9617589667

सोमवार, 16 नवंबर 2020

हाय रे कोरोना काल(तोषण चुरेन्द्र दिनकर)

हाय रे कोरोना काल तै कइसन दिन देखाय
छोटे बड़े ला जाने नही अलकर नाच नचाय
हाय रे कोरोना काल......

आय कहाँ ले तैहर बइरी,दुनिया होगे हलाकान
सुतत जागत तोरेच चर्चा,करथे लइका सियान
तीर के मनखे दूरिहा भागे,मुँह मा मास्क लगाय
हाय रे कोरोना काल....

सर्दी खाँसी ह बनगे कोरोना,मन मा डर हे समागे
अस्पताल मा कोई नंइ जावै,कइसन दिन हा आगे
फिरत हावय मनखे देखव,सर्दी खाँसी लुकाय
हाय रे कोरोना काल...

विनती हावय सरकार ले,जल्दी दवा बनादे
हटे कोरोना सगरो जगत ले,नवा अंजोर बगरादे
हाँसय खेलय धरती डोली,रूख रई खुशी मनाय
हाय रे कोरोना काल....


रचनाकार
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020

शरद पूर्णिमा


शरद पूर्णिमा की हार्दिक बधाई व शुभकामनाओं के एक रचना....

*शरद की अमृत धार*

चाँदनी रात में आज चाँद खिलखिलाया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।

शरद की रातें जुगनू की तरह चाँदनी चमकती है।
बूँदे  ओस की धरा पर फैली कोहिनूर दमकती है।
देख - देख नजारा गगन से दिनकर भी शर्माया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।1।

शरद की सर्द  रातें शीतलता बरसाती मन भीतर।
बगिया मुस्कुराती फूलों की खुश्बू बिखराती ईतर।
नवरसों में मदमाता भँवरा चहूँ दिक में मंडराया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।2।

मधुबन बहकने लगी आज श्याम दर्श जो होना है।
प्रेम बहार सोलह श्रृंगार लिये एक दूजे में खोना है।
राधेकृष्ण की रासलीला स्वयं शिव देखने आया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।3।

सप्त सुरों का राग लिए सतरंगी फाग महीना है।
इंद्रधनुषी रंगों की जैसी दुनिया और कहीं ना है।
शरद की अमृत धार से "दिनकर" आज नहाया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।4।

©®
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगांव, डौ.लोहारा
बालोद,छत्तीसगढ़
30/10/20

शनिवार, 24 अक्टूबर 2020

माता पचरा

शुभ नवरात्रि
माता पचरा
 
मैया जी के अंगना मा सजे दरबार हो...
चलो जाबो मैया ला मनाबो हो माया मोर....

मैया जी के बरनन ला बरनी नंइ तो जाय हो...
लीला हे अगम अपार हो माया मोर....

मैया जी सेवा बर भगतन आये हो...
लाली फूल चुनरी चढ़ाये हो माया मोर...

एक्कीस बहिनिया संग पांच भाई पंडवा हो...
ब्रह्मा बिषनु शंखर आय हो माया मोर...

दया मया के मैया आशीष देबे हो...
दंडाओशरन पंइया लागँव हो माया मोर...

ढोल नंगारा मैया ढम ढम बाजे हो...
तोषण हा पचरा सुनाय हो माया मोर...


तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगांव, डौंडी लोहारा
बालोद, छत्तीसगढ़

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2020

बेटी

एक प्रयास सादर समीक्षार्थ

अरविंद सवैया[ सगण ११२ x ८ +लघु ] 
सरल मापनी --- 112/112/112/112/112/112/112/112/1

अपनी बिटिया चहकी बगिया चिड़िया बनके अँगना मनुहार।
पढ़ने गढ़ने बढ़ने चलती विपदा हरती करती सुविचार।
सजती धजती तितली छम सी गिरती फिरती उड़ती गुलनार।
दुरगा कलिका रुप नौ जननी हरलो हमरी मइया दुखसार।


तोषण चुरेन्द्र दिनकर

रविवार, 18 अक्टूबर 2020

दाई के नवरात


दोहा गीत
======================
लाज सभा मा राखले,राहँव सबके मीत।
तोर दया ले आज मैं,गावत हावँव गीत।।
======================
आगे दिन नवरात के,रिगबिग चमके जोत।
हाँसत घर मा जात हे,आथे जेहर रोत।।
रखबे मुड़ मा हाथ तै,दया मया पीरीत।
तोर दया ले आज मैं,गावत हावँव गीत।।
======================
करे भगत गोहार सुन,बाढ़त हावय पाप।
छलकत गघरी देख तै,आजा लेबर नाप।।
पीरा हरले भगत के,सत के होवय जीत।
तोर दया ले आज मैं,गावत हावँव गीत।
======================
दुर्गा दाई रूप नौ,सबके मनला भाय।
जय माता की संग मा,जय जयकार लगाय।।
तोषण दिनकर हे भजे,साँझ बिहान सुखीत।
तोर दया ले आज मैं,गावत हावँव गीत।।
======================
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगांव, डौंडी लोहारा
बालोद छ.ग.
======================

रविवार, 27 सितंबर 2020

बेटी

बेटी दिवस की बहुत बहुत शुभकामना और बधाई के संग एक रचना सादर समीक्षार्थ

बेटी ल सूरुज बनावव...

करत हवँव गोहार मँय, 
नवा अँजोर बगरावव।
चंदा उइथे रातकून, 
बेटी ल सूरुज बनावव।

एक कुल बेटा सम्हाले, 
बेटी दूकुल सँवारत हे।
बनके दाई इही बेटी, 
ममता अपन लुटावत हे।
परिवार रुप ये बगिया म, 
फूल सही ममहावव।
चंदा उइथे रातकून, बेटी ल सूरुज बनावव।१।

पढ़ही लिखही इसकुल म, 
नाँव देश के करही।
दाई ददा गाँव समाज के, 
मान एकर ले बढ़ही।
देवारी के दीया बनाके, 
घर अंगना सजावव।
चंदा उइथे रातकून, बेटी ल सूरुज बनावव।२।

चिरई बन चहकन दव, 
ए खुला आसमान म।
बेटी ल घलो सिखावव, 
कइसे जिथे जहान म।
उड़त रहय चारो मुड़ा, 
अइसन पतंग बनावव।
चंदा उइथे रातकून, बेटी ल सूरुज बनावव।३।

कोख प पलत बेटी ल, 
ये दुनिया आन दव।
करन देवव सपना पूरा, 
संगी हो पहिचान दव।
बेटा-बेटी के भेदभाव, 
मन ले दूरिहा भगावव।
चंदा उइथे रातकून, बेटी ल सूरुज बनावव।४।

तोषण चुरेन्द्र "दिनकर"
सरपंच ग्राम पंचायत धनगाँव
डौंडी लोहारा
जिला बालोद छ.ग.४९१७७१
मो.९६१७५८९६६७

साहस (तोषण चुरेन्द्र दिनकर)


बाधा आये लाख चाहे,
मन नहीं घबराये,
आये जो तूफान कभी,
लड़ भीड़ जाइये।

डट जा पहाड़ सम,
बाजुओं में भर दम,
काँप ऊठे बादल भी,
दहाड़ लगाइये।

हाथ ले मशाल सारे,
सबके हो एक नारे,
जगमग धरती हो,
दीपक जलाइये।

हार कभी मानों नहीं,
बिना जानें तानें नहीं,
सोच लें समझकर,
कदम उठाइये।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगांव डौंडी लोहारा
बालोद छ.ग.

शनिवार, 26 सितंबर 2020

नरवा गरवा घुरवा बाड़ी

एक प्रयास सादर समीक्षार्थ

भाखा:- छत्तीसगढ़िही

नरवा गरवा घुरवा बाड़ी

योजना सरकारी हे,मिले हे कीमत तगड़ा।
देख टूरी गोबर बर,मताबे ओ झन झगड़ा।।

बिनव जी नंगत गोबर, नेवता झारा झारा।
दाम गा मिलही जब्बर,सुनव सब आरा पारा।।

योजना नरवा गरवा,हवय अउ घुरवा बाड़ी।
बिनव ओ दाई बहिनी,नवा लेवाही साड़ी।।

मिले हे दाना पानी,पिये अब खावय गरवा।
पोठ हे खातू गोबर,भरे सब नदिया नरवा।।

रोज तुम जावव बाड़ी,ध्यान ला बने लमाके।
गरीबी मिटही मानो,बने तँय देख कमाके।।

सोरियावत हे तोषण ,बात ला सबझन मानव।
नीति हे ये सरकारी,सबोझन बढ़िहा जानव।।  

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
सरपंच धनगांव डौं. लोहारा

बुधवार, 9 सितंबर 2020

जतन अपन गाँव के

*_जतन अपन गाँव के_...*
*************●***********
करलव दीदी ओ करलव भैया गा,
जतन अपन गाँव के।
कोयली बोली चिंहूँर माते,
बर पीपर के ठाँव के।
करलव दीदी ओ.....
*************●***********
नदियाँ नरवा खेती डोली के,
करलव गा तियारी।
नाँगर बइला चेत करलव,
धनहा अउ बियारी।
छुनुर-छुनुर बाजय पइरी, 
धरती दाई के पाँव के।
करलव दीदी ओ....
*************●***********
कातिक आईस कोठी भरगे,
भाग हा लहरागे।
ओढ़े कमरा डोकरी दाई,
हाँड़ा कपकपागे।
सगा के संदेश देवय,
सुनव कँऊवा काँव काँव के।
करलव दीदी ओ....
*************●***********
लाली पिंवरी  फूल फूले,
भुँइया के फूलवारी मा।
सतरंगी फगुवा माते,
लइका के किलकारी मा।
नंगारा कस बादर गरजे,
दनदनादन दाँव के।
करलव दीदी ओ....
*************●***********
भुँइया के सिंगार करव,
रूख राई लगावव।
भारत माता के दुलौरिन,
छत्तीसगढ़ ला बचावव।
बघवा कस हूंकार देवव,
दगदगले हाँव के।
करलव दीदी ओ.....
*************●***********
रचनाकार:-
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगांव, डौंडी लोहारा
बालोद,छत्तीसगढ़
08/09/20

गुरुवार, 27 अगस्त 2020

गणेश वंदना

गणेश वंदना

मोर गउरी के गणराजा
तोला सुमरत हँव मँय आजा
शंकर सुवन तँय बुद्धि देवइय्या
अरजी हमरो पाजा.......मोर...

दाई ददा हे सबले बड़का 
सगरो जगत ल बताए
तीन लोक तँय माने देवा
चक्कर सात लगाए
पान फूल अउ नरिहर भेला
लड्डू भोग लगाजा....मोर ...

रिद्धि सिद्धि संग मा बिराजे
शुभ लाभ बड़ सोहे
गजमुख चारभुज हे लंबोदर
माँथ मा सेंदुर मोहे
सबले पहिली तोर मनौती
दरसन हमुला देखाजा....मोर

भादो महिना तैह तोर पूजा
भगत ह आशीष पावय
जेन मनावय तोला गजानन
भर भर झोली जावय
संझा बिहना "तोषण" भजत हे
लेके घंटी बाजा....मोर...

तोषण चुरेन्द्र "दिनकर"
धनगांव,डौंडी लोहारा
बालोद, छ.ग.

सोमवार, 22 जून 2020

दिनकर के दोहे

★दोहा पंच★

राख राख तैं राख ले,
                बने जतन के राख।
राखत राखत एक दिन,
                जिनगी होही राख।।

आवत बदरा देखि के,
                झूमय नाचय मोर।
सरसर सरसर हे पवन,
                मारय हिया हिलोर।।

जइसे बदरा आत हे,
                भुँइया करय बिचार।
नाँगर जूँड़ा बाँधले,
                बइला धर तइयार।।

टरर टरर मंडुक करे,
                झिंगुर मारय चीख।
धनहा भुँइया देख ले,
                निकले बढ़िहा पीख।।

छानी परवा हे चुहत ,
                जोरा करलौ थोर।
बोनी होगे हे शुरू,
                नाँगर बइला जोर।।

भुँइया के भगवान मैं,
               दिनकर हावय संग।
खेती मोरो पहिचान हे,
               भगवा हावय रंग।।

आज मोर मन हे मघन,
               उमड़त हवय बिचार।
देखव पढ़लव मिल सबो,
               लेवव छाँट निमार।।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर

मंगलवार, 9 जून 2020

तोर मया मोर जीव के

विषम मात्रिक गजल
बहर /मात्रा /मापनी
२११ २२१ २१२ २१२ २

तोर मया मोर जीव के काल होगे।
देख देख फेर समय जंजाल होगे।

सोच रहिस दुनो मया कुरिया बसाबो,
कोन जनी कते तीर में चाल होगे।

रुसा झनी कभू मोर ले रूप रानी,
फूल सही देह कोयली ढाल होगे।

बात मान मोर संग मा जिबो मरबो,
जरे भले जमाना ह अड़ियाल होगे।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर

राम नाम हे सार

राम नाम हे सार रे,जपले तै हरि नाम।
जाती बेरा थोरकिन,करले बढ़िहा काम।।
करले बढ़िहा काम तै,होवय जग मा शोर।
दया मया ला बाँट ले, बात मान ले  मोर।।
बात मान ले मोर सुन,राम भजन मा झूम।
तोर मोर के फेर मा,ऐती ओत न घूम।।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर

रविवार, 17 मई 2020

भाईचारा

भाईचारा छोड़कर , 
रखे कपट का रोग।
एक दुजे के आँकने , 
पैर खीचते लोग।
पैर खीचते लोग , 
बोलते मीठा सामने।
मर्यादा का पाठ , 
दिया था भगवन राम ने ।
कह दिनकर कविराज , 
आज ये सब कुछ हारा।
पीछे भरते कान , 
छोड़कर भाईचारा।

तोषण दिनकर
डौंडी लोहारा

शुक्रवार, 24 अप्रैल 2020

इंसान बनादे..(मुक्त गजल तोषण दिनकर)

सुन मेरे भगवान सुन मेरी पहचान बनादे।
आदमी हूँ आदमी मुझे बस इंसान बनादे।

नफरत न हो किसी से जब तक है जिंदगी ,
जान बीते खातिरदारी में मेजबान बनादे।

सहारा बेसहारों का भूखे का निवाला बनूँ,
बढ़ाता चलूँ सबकी कद कदरदान बनादे।

रखूँ समेट कर ये सारे गुलशन जहाँ का,
मुस्कुराते गुलों का मियाँ बागबान बनादे।

फक्र करे तुझ पर दिनकर ए आसमान,
खुशियों से भरा एक हिन्दुस्तान बनादे।

तोषण कुमार चुरेन्द्र " दिनकर"

गुरुवार, 23 अप्रैल 2020

किताब

विश्व किताब दिवस म नानकुन कुण्डलियाँ
बाँटे सगरो बात सुन,जेकर निही हिसाब।
हवय ज्ञान के कोठरी,कहिथे सखा किताब।
कहिथे सखा किताब,सुनव गा संगी भइया।
बने गोठ सब राख,गलत ला देवव तिरिया।
कह तोषण कविराज,गजब के बतिया छाँटे।
बानी रोठ किताब ,ज्ञान के सागर बाँटे।

-तोषण दिनकर

बाकी है...

*बाकी है...*

मुश्किलों के दौर में एक आस बाकी है।
दूर तुम भी दूर हम भी एहसास बाकी है।

सम्हाले रख्खा है अब तलक ये दिल को,
आने को अभी नया मधुमास बाकी है।

जल्द मिटेंगे गिले शिकवे बुरे वक्त सारे,
दिन नव किरण का पल खास बाकी है।

सुनी पड़ी मधुबन ओ कान्हा रसिया की,
सुर्ख हुए वृंदावन की महारास बाकी है।

चाहत "दिनकर" को मिलने की तुझसे,
करने को बस रब से अरदास बाकी है।

-तोषण कुमार "दिनकर"

मंगलवार, 21 अप्रैल 2020

कुण्डलियाँ दिनकर की


1.
गुंगे बहरे हो चले,माने कभी न बात।
अपनी धुन में हाँकते,दिन हो चाहे रात।
दिन हो चाहे रात,रहो करते मनमानी।
मिलकर अपना देश,बात ये सबने ठानी।
लगी चाल पर रोक,लगे है लाखों पहरे।
गाँव ठाँव में लोग,फिरे है गुंगे बहरे।

2.
रहती जिसमें है अकड़,सुखे वृक्ष वो जान।
निन्दा उसके भाग में,पाये कभी न मान।
पाये कभी न मान,लाख जो ठोकर खाते।
खोते अपने लोग,छुटे हैं सारे नाते।
कह दिनकर कविराज,मीठ जो मधुरस बहती।
बोल बड़े अनमोल, हिया के भीतर रहती।

-तोषण दिनकर

रंग जीवन के

कलम की सुगंध छंदशाला
नमन मंच
19/04/20
घनाक्षरी
-रंग जीवन के

अंग अंग भीगे रंग लेकर नई उमंग,
दिन रहे होली रात दिवाली मनाइये।

सरसो के रंग लिए हियरा जो भंग पिए,
आम बन डाल पर मन को लुभाइये।

हरी-हरी धरती ये शीतल जो करती है,
झरझर नदियों सा,तरंग जगाइये।

सुख दुख संग लिये,जीवन में रंग लिये,
बांट चले भाईचारा रंग ये चढ़ाइये।

-तोषण दिनकर

रविवार, 19 अप्रैल 2020

घनाक्षरी विधान

नमस्कार
आज एक सुंदर गेय छन्द के बारे में जानते हैं ।
*छन्द : मनहरण घनाक्षरी*
*लक्षण*
मनहरण घनाक्षरी छन्द एक वार्णिक वृत्त है, जिसमें *कुल 4 पद* होते हैं तथा प्रत्येक पद में *4 चरण* होते हैं तथा 16 - 15 वर्णों पर यति, चारों पद समतुकांत, तथा अंत गुरु होने का प्रावधान है ।
इसे अन्य रूप में 8, 8, 8, 7 वर्णों पर क्रमशः यति के स्वरूप में पढ़ा एवं रचा जाता है ।

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*विशेष - घनाक्षरी, दो शब्दों 'घन' और 'अक्षरी' से बना है । यहाँ 'घन' शब्द के अनेक अर्थ हैं -
*पहला अर्थ -* सघन : अर्थात् इस छन्द में शब्दों का सघन बुनाव ही इसकी गेयता को श्रेष्ठ बनाता है । चूँकि यह वार्णिक छन्द है, इस हेतु 'लघु' अथवा 'गुरु' मात्रा पर पृथक् भार दिया जाना आवश्यक नहीं, दोनों मात्राओं पर समान ही बल दिया जाना चाहिए ।
*दूसरा अर्थ -* मेघ : अर्थात् गेयता में मेघ की गर्जना के समान ध्वनि उत्पन्न हो । इसका अत्यधिक प्रयोग वीर रस की रचनाओं में दृष्टिगोचर होता है ।
*तीसरा अर्थ -* बड़ा हथौड़ा : अर्थात् रचना की गेयता और प्रवाह  इस प्रकार हो जैसे कि रचनाकार अपनी रचना से हथौड़े से प्रहार करने के बराबर प्रभाव उत्पन्न कर रहा हो ।
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आइए एक उदाहरण द्वारा इसके वर्ण विधान को समझने का प्रयास करते हैं ।

*विषय - गाँव*
*छन्द - मनहरण घनाक्षरी*

माटी वाले घर रहें, पद्म सरोवर रहें,
कोयल की कुहू-कुहू, कौआ काँव-काँव जी ।
वट लता झूल-झूल, बाग सजें फूल-फूल,
शांति भरी अनुभूति, पीपल की छाँव जी ।
आधुनिक बन भले, गाँव नगरों को चले,
धरोहर मुनियों की, लगी काहे दाँव जी ।
सोंधी गंध माटी रहे, वन नदी घाटी रहे,
सपना यही है मेरा, गाँव रहे गाँव जी ।।


*1. पद विधान*

कुल पदों की संख्या - 4 पद
प्रत्येक पद में चरणों की संख्या - 4 चरण
*1 चरण , 2 चरण*
*3 चरण , 4 चरण*


*2. वर्णक्रम/वर्ण विधान*

*प्रथम पद*
1 चरण (8 वर्ण), 2 चरण (8 वर्ण)
3 चरण (8 वर्ण), 4 चरण (7 वर्ण)

माटी वाले घर रहें (8 वर्ण)
I  I    I  I  I I  I I 

पद्म सरोवर रहें, (8 वर्ण)
I  I  I  I  I I I I

कोयल की कुहू-कुहू, (8 वर्ण)
I   I  I   I   I   I  I  I

कौआ काँव-काँव जी (7 वर्ण)
 I    I    I  I  I   I  I

इसी प्रकार
*द्वितीय पद*
1 चरण (8 वर्ण), 2 चरण (8 वर्ण)
3 चरण (8 वर्ण), 4 चरण (7 वर्ण)

वट लता झूल-झूल (8वर्ण), बाग सजें फूल-फूल, (8वर्ण)

शांति भरी अनुभूति(8वर्ण), पीपल की छाँव जी (7वर्ण) ।

इसी प्रकार
*तृतीय पद*
1 चरण (8 वर्ण), 2 चरण (8 वर्ण)
3 चरण (8 वर्ण), 4 चरण (7 वर्ण)

आधुनिक बन भले (8वर्ण), गाँव नगरों को चले (8वर्ण),
धरोहर मुनियों की (8वर्ण),  लगी काहे दाँव जी (7वर्ण)

इसी प्रकार
*चतुर्थ पद*
1 चरण (8 वर्ण), 2 चरण (8 वर्ण)
3 चरण (8 वर्ण), 4 चरण (7 वर्ण)

सोंधी गंध माटी रहे (8वर्ण), वन नदी घाटी रहे (8वर्ण),
सपना यही है मेरा (8वर्ण), गाँव रहे गाँव जी (7वर्ण) ।।

*3. कुल वर्ण विचार*
प्रत्येक *पद* में 

(प्रथम + द्वितीय) चरण = 8 + 8 = 16 वर्ण
(तृतीय + चतुर्थ) चरण = 8 + 7 = 15 वर्ण

*4. मात्रा विचार*

प्रत्येक पद के अंतिम चरण में *गुरु* का विधान अर्थात् गुरु मात्रा वाले वर्ण का स्थान होना ।
*(विशेष - प्रवाह की सुगमता हेतु इसे क्रमशः "लघु - गुरु" के क्रम में रखा जाता है )*
अवलोकन करें - 

काँव जी ■ छाँव जी ■ दाँव जी ■ गाँव जी
S  I   S      S  I   S    S  I  S         S  I   S

*5. समतुकांत*
चारों पदों में समतुकांत का होना अनिवार्य

काँव जी ।
छाँव जी ।।
दाँव जी ।
गाँव जी ।।

*6. अन्य ध्यातव्य बिंदु*

 # प्रवाह की उत्कृष्टता एवं नाद सौंदर्य को बढ़ाने के लिए, प्रथम एवं द्वितीय तथा तृतीय चरणों में भी सम तुकान्त /अन्त्यानुप्रास रखे जा सकते हैं ।
 # संयुक्त शब्दों का कम प्रयोग ।
 # जोड़ी वाले शब्दों का प्रयोग, यथा
   2 वर्णों वाली जोड़ी (2, 2, 2, 2)
     (माटी वाले घर रहें)
   2 एवं 4 वर्णों वाली जोड़ी (2, 2, 4) (2, 4, 2) (4, 2, 2)
      आधुनिक बन भले (4, 2, 2)
      शांति भरी अनुभूति (2, 2, 4)
       पद्म सरोवर रहें (2, 4, 2)
 # इसके अतिरिक्त विषम पदों के प्रयोग में ध्यातव्य - 
    सभी सम पद ( (2, 2, 4) (2, 4, 2) (4, 2, 2) (2, 2, 2, 2) (4, 4) ) - उत्तम

    विषम-विषम-सम पद (3, 3, 2) - उत्तम
    सम-विषम-विषम पद (2, 3, 3) - पचनीय
    विषम-सम-विषम पद (3, 2, 3) - वर्जित


गुरुओं द्वारा अर्जित ज्ञान एवं अल्प अनुभव के अनुसार मनहरण घनाक्षरी छन्द विधान को एक उदाहरण द्वारा समझाने का प्रयत्न किया गया । उम्मीद है यह ज्ञान आपको किसी नए छन्द के विधान के साथ, उसकी रचना को प्रेरित करे ।

साखी गोपाल पण्डा
बरमकेला, रायगढ़
7828163183

बुधवार, 15 अप्रैल 2020

विज्ञात छंद की बधाई

परम आदरणीय गुरुदेव संजय कौशिक 'विज्ञात' जी को नवनिर्मित छंद *विज्ञात छंद* की सृजन करने पर बहुत-बहुत बधाई और ढेर सारी शुभकामनाएं एवं सभी रचनाकारों को मैं साधुवाद ज्ञापित करता हूं धन्यवाद ज्ञापित करता हूं कि आप हम सब ने मिलकर साक्षी बने और एक नए छंद के निर्माण में हम सब ने अपनी सहभागिता प्रदान की और एक नए छंद की उत्पत्ति दिनांक 10/ 4 /2020 को विज्ञात छंद के रूप में हुई ।एक बार पुनः परम आदरणीय गुरुदेव संजय कौशिक 'विज्ञात' जी को बहुत-बहुत बधाई कलम की सौगंध छंद साला की संचालिका दीदी अनीता मंदिलवार 'सपना' जी को भी बहुत-बहुत बधाई व शुभकामनाएं
💐💐💐💐💐💐💐💐
तोषन कुमार चुरेन्द्र 'दिनकर' 
डौंडीलोहारा बालोद छ.ग.

दिनकर

दिनाँक -15/04/2020
वार- बुधवार
विषय - चित्राभिव्यक्ति
विधा- मुक्त छंद

संचालक -पूनम दुबे वीणा
समीक्षक-अर्चना पाठक 'निरंतर'

संचालक मण्डल  ✒ कलम की सुगंध

##################

कनक प्रभा लिए दिनकर देखो
धरा पे निखरी किरणों संग
पवन प्रभाती जग को जगाती
भरती अंग-अंग नित्य उमंग

देख जिनको कीच अंतर से
खिलखिलाती सर पे कमल
मोती रूप धर ओस की बूंदे
बरसी चांदनी धरा धवल
मेघा देखकर संग पवन
लेकर आती नयी तरंग
पवन प्रभाती जग को जगाती
भरती अंग-अंग नित्य उमंग

चिड़िया चहके देखके जिनको
वन उपवन पुष्प मुस्काते
पर्वतमाला से झरने झरझर
गतिशील की गीत गाते
लेकर नव उन्वान बढ़ता
भरकर सपने सप्त रंग
पवन प्रभाती जग को जगाती
भरती अंग अंग नित्य उमंग

खेतों में धान इतराते
भीनी महक की धार लिये
कोयल कुके आम की डाली
बसंत राग मल्हार दिये
कृष्ण की बंशी जा पड़ती
झूमते सुर सप्त स्वर संग
पवन प्रभाती जग को जगाती
भरती अंग-अंग नित्य उमंग

दिनकर तेरे रूप अनेक
नव ऊर्जा संचार करे
दैहिक दैविक भौतिकता के
सारे दुख संताप हरे
रोम रोम होता पुलकित
खिल उठता सर्वंग
पवन प्रभाती जग को जगाती
भरती अंग अंग नित्य उमंग

तोषण कुमार "दिनकर"
डौंडी लोहारा बालोद 
छत्तीसगढ़

प्रतिक्रिया:-
आज चित्र अभिव्यक्ति पर सृजित रचनाओं की समीक्षा समीक्षक अर्चना पाठक निरंतर

1आदरणीय तोषण कुमार चुरेंद्र सुरेंद्र जी- आपने दिनकर ,पुष्प और पूरी प्रकृति को समेटती अति सुंदर रचना सृजित की है आप की भाषा शैली बहुत ही उत्तम है शिल्प सधा हुआ सुंदर कृति बधाइयाँ👏👏👏

2 वंदना सोलंकी जी- दिनकर की ढलती *लालिमा रक्तिम आभा मानो* एक अल्हड़ बाला की बहुत ही सुंदर सृजन आपका अनुपम कल्पनाशीलता शिल्प अति उत्तम बधाइयांँ अनंत शुभकामनाएँ👏👏👏
3- आशा भारद्वाज जी बहुत सुंदर पंक्तियाँ आपकी *पवन उठाए हैं खुशियां* क्या कहने भाव पक्ष बहुत सुंदर अद्भुत सृजनशीलता बधाइयाँ👏👏

4-कुसुम कोठारी जी - *नव विहान  भोर* की लालिमा और आदित्य के आगमन का बहुत सुंदर  सृजन किया ।आपकी रचना शैली अनुपम है भाषा सुगम, सुबोध शत-शत बधाइयाँ

👏👏
आप की दूसरी रचना सुरमई शैया से उषा के सिंदूरी पाँव गजब की कल्पनाशीलता। पायल छन की सुनहरी किरणों के घुंघरू बिखरे वाह वाह 👏बहुत उत्कृष्ट 👌अनुपम कल्पनाशीलता की दाद देनी पड़ेगी सुंदर उपमान और अलंकारों से सुसज्जित बेहतरीन सृजन बधाइयाँ👏👏

5 अनीता सुधीर जी -अनीता सुधीर जी आपने बहुत ही सुंदर कुंडलियाँ  सृजित की है ।अनुपम छटा बिखेरती प्रकृति की सुंदर छवि ।अति उत्तम शिल्प, भाषा शैली सुबोध ,बधाइयाँ👏👏

6- सुनील बाजपेई शिवम जी 

आपने चित्र अभिव्यक्ति पर बहुत ही सुंदर प्रकृति का चित्रण किया है कल्पनाशीलता अनुपम और सरल भाषा का प्रयोग उत्तम सृजन बधाइयाँ👏👏

7- प्रतिभा प्रसाद जी -चित्र अभिव्यक्ति पर प्रकृति का सुंदर चित्र उकेरती सरल भाषा से आपने अभिव्यक्ति को सजाया है झूम-झूम धरा का यूँ इठलाना वाह बहुत सुंदर पंक्तियां अनुपम सृजन बधाइयाँ👏👏

8- चंद्र किरण शर्मा जी 

आपने चित्र पर बहुत ही सुंदर सृजन किया भौंरा गुन गुन करें पुष्प नया रूप धरे ।अतुल प्रकाश पर्व नव रूप भाये है क्या सुंदर पंक्तियाँ है आपकी  बहुत-बहुत बधाइयाँ👏👏👏
9- पूनम दुबे वीणा जी -आपने श्रृंगार में डूबी वसुधा जो चारों ओर हरी भरी दिख रही, बहुत बहुत ही सुंदर भावपूर्ण पंक्तियां आपने लिखी हैं और एक सुंदर गीत लिख डाला आपने चित्र पर बहुत-बहुत बधाइयाँ👏👏👏

10 डॉ कमल वर्मा जी 

 आपने सुहानी भोर पर चौपाई छंद में बहुत ही सुंदर *पूर्व में है लाली* छाई रंग बिखेरे उषा आई सुंदर पंक्तियाँ अद्भुत सृजन 👌मनमोहक बधाईयाँ👏👏

11 महेंद्र सिंह भाटी जी 

आपने पुष्प पर बहुत ही सुंदर कविता लिखी हैं और भंवरा फूल इनको प्रेमी जोड़ों के साथ जोड़कर बहुत ही सुंदर भावपूर्ण सुजन दिया है इससे पूरी धरती में खुशियाँ ही खुशियाँ फैली हैं सुंदर
👏👏👏

12 सरोज साहू जी आपने मुक्त छोड़ो बहुत ही सुंदर रचना की है
नव आभा और उमंग ले सुंदर सृजन👏👏

13 इन्द्राणी साहू साँची जी

ताटंक छंद में गीत सृजन 
अति उत्तम 👏👏👏
बधाई, शुभकामनाएँ

14 अनुराधा चौहान सुधी जी
अंतर्मन में उल्लास लिए मन खुशियों की आस लिए सुंदर पंक्तियाँ अनुपम से बधाइयाँ👏👏
15 कृष्णा पटेल जी 

आपने बहुत सुंदर भाव  पर सृजन किया बेहतरीन 👌👌बहुत-बहुत बधाइयाँ👏👏

16 धनेश्वरी धरा जी

 आपने सुंदर दो कुंडलियाँ रच डाली और भाव पक्ष उत्तम, शिल्प सधा हुआ बेहतरीन सृजन चित्र पर बधाइयाँ👏👏


आज चित्र पर आप सभी ने बहुत ही सुंदर सृजन किया आप सभी को बधाइयाँ ,अनंत शुभकामनाएँ।🙏







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सोमवार, 13 अप्रैल 2020

मोर मन पंछी परेवना रे...

मोर मन पंछी परेवना रे...

मोर मन पंछी परेवना रे 
उड़ँव फिरँव असमान मा
मोर बर काहीं नाका नंइहे
किजरँव पूरा जहान मा...

नदिया नरवा पहाड़ मा किंजरँव
संग लेके पुरवाई
रूख राई बन नाचँव गावँव
बनके हवा हवाई
होत संझनिया लहुटँव मँयहर
निकलँव तुरते बिहान मा
मोर बर काहीं नाका नंइहे
किजरँव पूरा जहान मा....

नहाके आथँव गंगा धार ले
भोला ल भांथ नवाथँव
चारों धाम के तीरथ करथँव
धरती के गुन ला गाथँव
करथे मन नंइ सुरतावँव संगी
बइठके रूखवा टिपान मा
मोर बर काहीं नाका नंइहे
किजरँव पूरा जहान मा.....

भेद भाव ला जाने नाहीं
राग मल्हरिहा गाथे
बनके कोयली कुहके बन मा
सबके मन ला भाथे
खेत खार का भर्री भांठा
भाथे मोला दइहान मा
मोर बर काहीं नाका नंइहे
किजरँव पूरा जहान मा...

दोहा पंथी करमा ददरिया
बाँस गीत के तारी
बंदन करथे रात दिन सब
छत्तीसगढ़ महतारी
हरियर हरिय रुख राई के
चले पवन खलिहान मा
मोर बर काहीं नाका नंइहे
किजरँव पूरा जहान मा...

कहिथे दिनकर सबला संगी
मन ला टन्नक राखव
सुमता के दीया जला के
सुख दुख मिलके बाँटव
इही रीत हे जग जीव जगत के
राखव बिधि बिधान मा
मोर बर काहीं नाका नंइहे
किजरँव पूरा जहान मा


-तोषण कुमार चुरेन्द्र "दिनकर"
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.





पानी का मोल

दिनाँक :- १३/०४/२०
दिन :- सोमवार
विधा :- दोहा 
विषय :- पानी का मोल 
एक प्रयास संस्कृत शब्द वनम के प्रयोग के साथ ....

मरु में जाकर देख ले, 
                वनम वनम अंकाल।
प्यासी धरती ताकती,
                जीवन है बेहाल।।१।।

पंछी तरसे है वनम,
                नहीं ताल का शोर।
सूखती रोती है नदी,
                देखे मेघा मोर।।२।।

पेड़ बिना संसार में,
                नहीं वनम की चाल।
पेड़ से है जिन्दगी, 
                जीवन है खुशहाल।।३।।

पानी के उपयोग का, 
                रखें सभी ये ध्यान।
जनम वनम अनमोल है,
                कहते संत सुजान।।४।।


बिना वनम जग जीव सब,
                कहते एक ही बोल।
'दिनकर' रक्षा अब करो , 
                पानी है अनमोल।।५।।


-तोषण कुमार चुरेन्द्र "दिनकर"
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.

रविवार, 12 अप्रैल 2020

अपील

हमारे देश प्रदेश की सरकार हम सबके लिए वृहद रूप से राहत पहुंचाने का कार्य कर रही है जनधन खाता में ₹500 नगद भुगतान किया जा रहा है 2 महीने का चावल बीपीएल के तहत निशुल्क दिया जा रहा है। और तो और उज्जवला गैस योजना के तहत मार्च अप्रैल और मई माह तक सिलेंडर रिफिलिंग मुफ्त । तो क्या हम अपने घर से 1 किलो चावल ₹100 पैसा नहीं दे सकते आइए अपनी सोच को ऊंचा करें और देश के हित में कार्य करें।
                 कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी के चलते हमारे भारतवासी और प्रदेश वासी बड़े ही गंभीर समस्या का सामना कर रहा है। ऐसे में हम सबका फर्ज बनता है कि हम सब देशवासियों प्रदेशवासियों के सहयोग के लिए यथाशक्ति तथा भक्ति के अनुसार 4 आना 8 आना किलो डेढ़ किलो या उससे अधिक दान कर सकें। यह हम सबके लिए बड़े ही गर्व की बात होगी। सरकार जब हमारे लिए इतना सोच रही है तो हमारा फर्ज भी बनता है कि हम भी कुछ अपने देश के लिए अपने प्रदेश के लिए करें ।तो आइए हम सब मिलकर देश के हित में नेक कार्य करें और अपनी यथाशक्ति अनुसार देश को दान दे। 
                  कहा गया है ...देश हमें देता है सब कुछ हम भी तो कुछ देना सीखे... तो आइए इस गीत को चरितार्थ करते हुए हम एक दूसरे के सहयोगी बने जिससे कि किसी का कल्याण हो सके। आइए हम सब मिलकर माननीय प्रधानमंत्री जी का और माननीय मुख्यमंत्री जी का साथ दें । 
                   गीत कहता है ....नदिया न पिए कभी अपना जल, वृक्ष न खाए कभी अपना फल ,अपने तन को मन को धन को, देश को दे जो दान रे वह सच्चा इंसान रे वह सच्चा इंसान रे....
                   भारत माता की जय, जय छत्तीसगढ़,जय जवान, जय किसान ,जय विज्ञान, जय हिंदुस्तान, स्वास्थ्य कर्मी जिंदाबाद, पुलिस विभाग जिंदाबाद,जय हिंद...
बहुत-बहुत धन्यवाद।

शनिवार, 11 अप्रैल 2020

कोरोना


विषय :- कोरोना

कोरोना देख ले, रोवात हावय जानले।
छोड़व कुकरी झनी खावव, बात यहु मानले।
आहे कहिथे बिदेशी, वायरस समझव बने।
मिलके सब मार डालव, पेलत छाती तने।

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तोषण कुमार दिनकर
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.

मंगलवार, 17 मार्च 2020

कोरोना का डर

 कुण्डलियाँ छंद..

कोरोना का डर...

कोरोना का डर यहाँ,
            फैला चारों ओर।
कैसा है यह वायरस,
            नहीं दवा का शोर।।
नहीं दवा का शोर,
            करें नव उपचार सभी।
चिन्ता का यह फेर,
            कटे जल्दी रोग अभी।
कह तोषण कर जोड़,
            हाथ को प्रतिदिन धोना।
करना सभी विरोध,
            डरे भागे कोरोना।


चौपाल गली चौक को,
            बंद करे सरकार।
पता दवा की है नहीं, 
            जनता है लाचार।।
जनता है लाचार,
            सोचते बैठे सारे।
कोई तो उपचार,
            ढूँढ लो मोदी प्यारे।
कह तोषण कर जोड़,
            भीड़ जाओ महाबली।
दें कोरोना फेंक ,
             झुमें हर चौपाल गली।

कवि तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
सरपंच, ग्राम पंचायत धनगांव डौं.लोहारा

सोमवार, 17 फ़रवरी 2020

बड़े दिनों बाद

बड़े दिनों बाद...

समीक्षा हेतू

बड़े दिनों बाद एक बात दिल में आई है।
अपनों के भीड़ में भी कितनी तन्हाई है।

गुजारा हुआ हर पल आज कहता है मुझसे,
अब तेरी वफा में न जाने ये कैसी रूसवाई है।

बहती ये हवाएँ भी सदाएँ देती है हमको,
पहले की वफा हँस कर फिर क्यूँ बेवफाई है।

लौटकर न आना कभी जा अब दूर कहीं,
मेरे दिल की गली से सब दिन की बिदाई है।

ये फिजायें ये गुलशन भी बातें नहीं करते,
कहते ही रहते हमें ये "धनगंइहा" हरजाई है।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
उपाध्यक्ष, मधुर साहित्य परिषद
ईकाई डौंडी लोहारा

रविवार, 1 दिसंबर 2019

मानवता

एक प्रयास

*विधा-मनहरण घनाक्षरी* 

*विषय - मानवता*


मानवता ध्यान रहे,
                जरा न गुमान रहे,
तालियां मिलेगी सदा,
                सारे हिन्दुस्तान में।।१।।

नेकी कर आगे बढ़,
               बाधाओं से नित लड़,
डर भर जाये सारे, 
               जागते शैतान में।।२।।

नरेन्द्र विवेक बने,
              शिकागो मे जाके तने,
पाठ दिया मानवता,
              जाकर जहान में।।३।।

हम सब मिल साथी,
              बाँध चले परिपाटी,
कुसुम अनेक खिले,
              नेह के बागान में।।४।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

मानवता

हास होती मानवता,जाग उठी दानवता,
कैसी ये विडंबना है,मेरे हिन्दुस्तान मे।

बेटी बहू जाए कहाँ,पुकार लगाये कहाँ,
घिरे हुये इत उत,कलयुगी हैवान में।

न्याय कुछ ऐसा मिले,हैवानों के पग हिले,
कुछ नहीं रहाअब,बातों के कृपाण में।

तोषन अब नही सहे ,मिलकर सब कहें,
लाओ कुछ अब नया,विधि के विधान में।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

शनिवार, 30 नवंबर 2019

बेटी की शिक्षा

खूब पढ़ायें हम सभी,कर बेटी पर नाज।
उड़ने दें फिर व्योम में,लेकर नव परवाज।।

लेकर नव परवाज,दोष मिथ्या दूर हटायें।
सख्त बड़ा कानून,सभी को यह समझायें।


कह तोषन कविराज,पढ़े सबकी बालायें।।
बेटी होती नाज,जान के खूब पढ़ायें।।

मानवता

मानवता ध्यान रहे,
                जरा न गुमान रहे,
तालियां मिलेगी सदा,
                सारे हिन्दुस्तान में।।१।।

नेकी कर आगे बढ़,
               बाधाओं से नित लड़,
डर भर जाये सारे, 
               जागते शैतान में।।२।।

नरेन्द्र विवेक बने,
              शिकागो मे जाके तने,
पाठ दिया मानवता,
              जाकर जहान में।।३।।

हम सब मिल साथी,
              बाँध चले परिपाटी,
कुसुम अनेक खिले,
              नेह के बागान में।।४।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

आसुरी प्रवृत्ति


समसामयिक रचना

अपने भारत  देश मे  देखो,
कानून भले कितने भी बड़े।
कैसे  बचेंगी  बेटी भँवर से ,
दानव पग -पग जो है खड़े।।१।।

देख  तेरे  संसार  में  दाता,
दुखदायिनी है घटना घटती।
शील संरक्षण खातिर औरत,
कहाँ कहाँ  रहती भटकती।।२।।

दारू गाँजा के नशेड़ी सारे,
बेटी की अस्मत लगे लूटने।
लगता ऐसा अब न्याय की,
तर तर लगे है पछीने छुटने।।३।।

कितनी बेटियां है झौंकी गई,
बुराईयों की भड़की आग में।
कब तक आतंकित रहे यहाँ,
लगे मरहम  कब  ये दाग में।।४।।

बेटी  माता बहू  रक्षा  खातिर,
आखिर जायें तो जायें कहाँ।
अंत कब होगा अत्याचार का,
तोषन का हृदय थर्राये  यहाँ।।५।।

✒✒✒✒✒
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

विशिष्ट पोस्ट

शिवनाम

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