शनिवार, 22 जुलाई 2017

किसान

पानी बादर गिरत नइहे,
मरना होगे किसान के.
कइसे मनाही बने हरेली,
चिंता होगे बिहान के.

धरती के बेटा हमला कइथे.
सबके भरे पोसइया कइथे.
पेट हमरे बड़ भूखन मरथे,
लइका हमर बड़ दुख सहिथे.
पढ़तिस लिखतिस मोरो लइका,
जरुवत हवे गियान के...१

खेत म धान छिताय परेहे.
पानी बर एकठन आस धरेहे.
सुरुज कका बिहान ले साँझे,
नटेर के आँखी ल खड़ेहे.
लोंदी खवाबोन हम कइसे
रोना हे गँहू पिसान के....२

करजा के चद्दर ओढ़त हन.
गदहा बने सब ढोवत हन.
नइ छुटावय करजा कोनों,
नरी म डोरी अँरोवत हन.
का थोरको सुध नइ लामे,
हमर देश के सियान के....३

कब तक अइसने मर-मर जीबो.
शंखर नोहन जेन जहर ल पीबो.
हलधर हम किसान हरन गा
अपन हक ल लेके ही रहिबो.
दाम अनाज के बने मिले,
रखले बात फरमान के.....४

तोषण कुमार चुरेन्द्र

शनिवार, 8 जुलाई 2017

दोहालरी

*गुरु पुन्नी बिशेष*

*दोहालरी*

जस कुम्हार  के  हाथ हे, चकिया मटका संग।
अइसन गुरु किरपा मिले,खिल जाए सब अंग।।१।।

परव  पाँव  गुरु गोड़ के, देव दरस दिखलाय।
सही गलत के पाठ ला,सब झन ला समझाय।।२।।

पावन गुरु पुन्नी परब,ध्यान करव कर जोर।
गुरु ले  रिश्ता  जोड़ ले,बाँधय  जइसे डोर।।३।।

पहिली गुरु दाई ददा, जग में होत महान।
दूसरा गूढ़ गियान दे,जग मा पावय मान।।४।।

बरसय  गंगा  ज्ञान  के, गुरु  चरनन  के तीर।
आवव सब गुरु के शरण,मिटय भरम के पीर।।५।।

आवय गुरु के तीर मा,कतको दरसन पाय।
बेटा जोहर लाल के, तोषण माँथ नवाय।।६।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

रविवार, 2 जुलाई 2017

तोषण के दोहा

पढ़े  लिखे  आवय नहीं,थोरिक नइहे ग्यान।
का तोला समझाँव मँय,लइका हवँव नदान।।१।।

जिनगी  मोर  उदास  हे, काला मँयह बताँव।
मनवा कहीं सुझय नही,कोन डगर मँय जाँव।।२।।

पइसा कउड़ी हे नहीं, रुके रुके हे साँस।
बहिनी के शादी बचे,पड़गे टोटा फाँस।।३।।

पानी झन बिरथा करव,पानी अमरित जान।
पानी ले जिनगी बचय,बोलय सन्त सुजान।।४।।

मुखिया बढ़िहा हे जिहाँ, राखय सबके ध्यान।
मान करय सब छोट के,पावय सबके मान।।५।।

मानँव बात सियान के,करथे सबला पोठ।
राखय सबला संघेर के,कंचन जस हे गोठ।।६।।

माटी के  काया  बने,पानी  मिल घुर जाय।
सुमरन कर हरिनाम के,जाबे नाम कमाय।।७।।

बड़  भागी  मानुस जनम, जपले तँय हरिनाम।
मोर-मोर तँय झन समझ,आवय नइ कछु काम।।८।।

सजे  राम  दरबार हे, सिया  राम  हनुमान।
लखन चँवर डोलात हे,लगे सरग सम जान।।९।।

माया  हे  ठगनी बड़े, सबला नाच नचाय।
का छोटे अउ का बड़े,कोनों बाँच न पाय।।१०।।

गुरुजी घसियादास के,चेला हम सब आन।
जेकर चरनन तीर मा, पावँन सबहा ग्यान।।११।।

फूलवरिया के फूल कस,सबला रखे सकेल।
गुरुजी अइसन ताय जी,हमरो विजय पटेल।।१२।।

बाबा तुलसी दास के,कहनी सबला भाय।
रामचरित मानस लिखे,भव ले पार लगाय।।१३।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मोर परचय

*परिचय*
लोहारा के तीर मा,बसे हवय धनगाँव।
बोहावत हे खरखरा, बर पीपर के छाँव।।१।।

बेटा जोहर लाल के,तोषण हावय नाँव।
जुरमिल सब आशीष दव,परथँव सबके पाँव।।२।।

तोषण मँय तो लेड़गा,हावँव बड़ मतिमंद।
किरपा बरसय राम के,सुग्घर गढ़िहँव छंद।।३।।

शाला जाथँव रोज मँय,करँव ग्यान के दान।
का छोटे अउ का बड़े,पाथँव सबके मान।।४।।

भाई बहिनी चार हम,सबले बड़का आँव।
नइहे दाई संग में,जोहर ददा मनाँव।।५।।

चितरेखा हे संगिनी,बेटा मोर डुमेश।
हँसी खुशी दिन हा चले,नइहे कोनों क्लेश।।६।।

भूल चूक ला दव क्षमा,माँगत हँव कर जोर।
हावँव गा मतिमंद मँय,धीरज नइहे थोर।।७।।

"तोषण कुमार चुरेन्द्र "

गुरुवार, 29 जून 2017

सुविचार

I m the best in the world.

मैं अपने आपको दुनिया में अच्छा मानता हूँ।

ये मेरी सोच है....

लेकिन दुनिया मुझे क्या कहती है कोई फर्क नहीं पड़ता....

क्योकि आगे बढ़ता वही है जो खुद की सुनता है गैरों की नहीं.....

शुक्रवार, 2 जून 2017

तोषण

*तोषण आरुग लेड़गा, हावय गा मतिमंद।*
*नइये जेकर बस सखा,जेन गढ़े वो छन्द।।*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

ठेलहा राम

*ठेलहा राम*

*किहिस एक दिन मोला कोई,*
*का तोर बर कहुं  नइये काम।*
*खाथस पीथस घूमत रहिथस,*
*बने बात नोहे जी ठेलहा राम।*

*केहेंव महु घलो गोठ बने जी,*
*मोरो करा हे  अब्बड़ काम।*
*काम करहु फेर रहा ले ले गा,*
*करन देना थोरिकन  अराम।*

*काम  बुता  बर  संसो नइये,*
*हस कोढिहा तै कथे सियान।*
*पाछु  झन पसताये ल परय,*
*काम  बुता बर दिहा धियान।*

*सियान के गोठ मान लेहेंव,*
*अब जाथँव महुँ कमाय बर।*
*खुद भविस के संसो करके,*
*सुग्घर जिनगी सिघयाय बर।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

गुरुवार, 1 जून 2017

हाइकु

धन्य हुआ मैं
काम आया आपके
दुआ आपकी

डोंगा

*जिनगी डोंगा धार में,नंइ  हाथ पतवार।*
*राम भजन कर सार हे,राम लगाही पार।।*

*हावय डोंगा काठ के, कइसे पार लगाँव।*
*पखरा हर नारी बने, धोवन  देदव पाँव।।*

*देखे केंवट राम जी,डोंगा लगे मँगाय।*
*भइया केंवट सुन बने,गंगा दे नहकाय।।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

बुधवार, 31 मई 2017

कुम्हार

*माटी सान कुम्हार तय, दीया अजब बनाय।*
*रहिके तय अँधियार मा,जग अँजोर पहुँचाय।।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

मंगलवार, 30 मई 2017

पानी तैं पियादे...

पानी तैं पियादे मोला सुन भइय्या मोर.
मिटा जाही बने बाबू पियास तइहा मोर...

बड़ धुर ले आवत हावंवमोर बेटी के गाँव ले
सुरता लेतेंव बरतरीबइठ  थोरिक छाँव में
जीवरा मोर जुड़ा जातिस माढ़े मनमोर
मिटा जाही बने बाबू  पियास तइहा मोर..

हावय बड़धुरिहा संगी मोर गाँव धनगाँव
कोयली जिंहा गावय गाना कंऊवा करे काँव
खरखरा के तीर परथे लेले थोरिक शोर
मिटा जाही बने बाबू पियास तइहा मोर....

सेवा करले पुन कमाले जिनगी के सार हे
जिनगी के नंइहे ठिकाना सार उपकार हे
काहत हावय तोषण ह बात मान मोर
मिटा जाही बने बाबू पियास तइहा मोर.....

तोषण कुमार चुरेन्द्र

शुक्रवार, 19 मई 2017

हंसऊला

क्या जमाना हैं

मुद्दतों बाद खुदा ने हमसे पूछा-बेटा !

जमीं पे आके कर क्या रहे हो ?

हमने कहा -या खुदाया ! जो आप

करते हैं ऊपर से .....

वही कर रहे हैं हम नीचे से ...

भला क्या?खुदा ने हमसे पूछा।

हमने कहा- जहाँ के लोगों को देखने का........

तोषण कुमार चुरेन्द्र

शनिवार, 25 मार्च 2017

कइसे मनावंव जी होली

कइसे मनावंव जी होली

मोर छत्तीसगढ के बस्तर म,
दिन रात चलत हे गोली..

तिही बताना संगवारी मोर ,
कइसे मनावंव जी होली..

डर डर जिंहा जिनगी जियतहे,
हमर सगा सोदर मन.

काबर हमर सरकार नंइ देखे,
दुख पीरा भरे ओखर मन.

लगत हे जेकर माथा म,
छिन छिन लहु के रोली..

तिही बताना संगवारी मोर,
कइसे मनावंव जी होली...
 
ढर ढर आँखी ले आँसू निकले,
मोर छत्तीसगढ महतारी के,

जेकर लइका प्रान ल त्यागे,
अब मोह का रंग पिचकारी के

कहां ले पाही अपन अंगना म,
फेरले हंसी ठिठोली

तिही बताना संगवारी मोर,
कइसे मनावंव जी होली...

फूलबगिया ल उजडत देख,
करेजा चानी होवत हे

बेटा के आस ल देख के ,
घर घर महतारी रोवत हे

नक्सलवाद ल खतम करव,
सुनव "तोषण" के बोली

तिही बताना संगवारी मोर,
कइसे मनावंव जी होली.....

रचनाकार
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडी लोहारा
बालोद छ.ग.
९६१७५८९६६७
रचना दिनाँक १२/०३/१७

अक्षय कुमार

रियल लाइफ हीरो अक्षय कुमार के सुकमा के शहीदों को 1 करोड़ 8 लाख देने पर उनकी देशभक्ति को नमन करती मेरी ताजा 
=====================
           "अक्षय कुमार"

=====================
खिलाडी कुमार जिनका नाम है
कर. दिखालाया  नेक  काम  है
सबकी  दुआ  ले रहा "बॉस को
छत्तीसगढ   कर रहा सलाम है.
=====================
कभी न इनकी भणडार क्षय हो
नही किसी का  कदापि भय हो
नील गगन में   बन  चमके तारे
हे !  अक्षय  सदा  तेरी जय हो..
=====================
दीन  दुखियों  की  सेवा करके
स्नेह भावना  जो मन में भरके
किया  बडा  उपकार आज ये
नही भुला पायेंगे हम भी मरके
=====================
हुई ताजा फिर आज कहानी
सुनी कभी  दादा की जुबानी
हुए महान शिवि, रंन्तिदेव भी
परहित  जीवन  दिये कुर्बानी
=====================
मान बांटते चल सम्मान मिलेगा
खुशियों  भरा  ब़ागान  मिलेगा
करले "तोषण" कुछ  नेक काम
तेरी मुट्ठी में सारा जहान मिलेगा
=====================

रचना:-©®
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ
९६१७५८९६६७
=====================
                टीप
=====================
रचना को बिना कांट छांट किए
मूल रुप में साझा करें!

हमर धनगाँव के बजार

पडथे हमर गाँव रे संगी बजार दिन बुधवारी
आथे जिंहा बेंचाय बर आनी बानी तरकारी

आके तैहा लेले संगी लेना हे तोला जोभी
कुंदरु करेला मुनगा भांटा हावय फूल गोभी

चना मुर्रा मिरची भजिया अउ बरा समोसा
खाबोन बइठके होटल म संगी मसाला धोसा

टिकली फुंदरी इस्नु पावडर आके तै बिसाले
मयारू के मया बर किसम किसम के नपाले

घुमंव न बजार कभू अकेला कहीं मैं चुपचुप
आबे संगी घुमेबर तोला खवाहू पानी गुपचुप

तोषण कुमार चुरेन्द्र

विश्वास

मन को है विश्वास अगर
                  मंजिल मिल ही जाएगी..
करते रहें पग -पग मेहनत
                  इक दिन रंग ये लाएगी.
तोषण कुमार चुरेन्द्र ९६१७५८९६६७

देख

देखना तोर बनाए रंग बिधाता,आज बेरंग होवत हे
नक्सली करिया रंग के कारन, रंग में भंग होवत हे

कोख उजडय महतारी मन के,अउ टुरा रोवत हे
सजनी अपन छंइया बर,छाती चिर के रोवत हे...
तोर बिंदराबन धाम म ,मथुरा कस हुडदंग होवत हे
नक्सली करिया रंग के......

सतयुग त्रेता द्वापर म कान्हा,राकछत के संघार करे
कलजुगी दानव ल मारेबर, कहीं कोनों उपाय करे
हमर सुघर फुलवारी के ,बड नास सरभंग होवत हे.
नक्सली करिया रंग के......

का रंग लगाहु अब मैं तोला,सब रंग ह लाल होगे
नक्सली दानव कारन ,छत्तीसगढ के जंजाल होगे
इंखर समूल बिनास बर,फेर ले जबर लेवव तरंग
नक्सली करिया रंग के.......

✒तोषण कुमार चुरेन्द्र✒
      ९६१७५८९६६७

गुरुवार, 7 जुलाई 2016

सफलता की सीढ़ी

सफलता की सीढ़ी
चींटी जैसे दाना लेकर
पर्वत हमको चढ़ना है।
आंधी और तूफान में
दीपक जैसे जलना है।
चलना है साथ एक हो
हाथ सबका पकडना है।
हो सुगंधित सारा चमन
बन पुष्प ऐसे महकना है।

कितनी भी आए कठिनाई
स्वयं हमको लडना है।
नमन करे दुनिया हमको
गढ़ हमको गढ़ना है।
छोड़ दुनिया को पीछे
हमको आगे बढ़ना है।
सफलता की सीढियों पर
हमें निरंतर चढ़ना है।।

 

सुसंस्कार/सुसंस्कृति

सुसंस्कार/सुसंस्कृति
^^^^^^^^^^^^^^
कभू फूल त कभू कांटा
झोरा म लेल परही।
मझधार म फंसे डोंगा ल
पतवार म खे ल परही।।
देश,आघू बढाना हे त
अवइयय्या पीढ़ही ल
सुसंस्कार दे ल परही।।
^^^^^^^^^^^^^^
बदलगेहे परिवेश देश के
बदलत हे नैतिक अधार।
खवइ-पियइ घलो बदलगे
बदलगेहे अचार बिचार।।
सत अहिंसा क्षमा दया
रिहिस संस्कृति मूलाधार
आज के चकाचउंध में
बनगेहे जइसे निराधार।।
^^^^^^^^^^^^^^^^
भरत भुंइया म जनम धरिन
राम लछमन बीर हनुमान हे
पबरित भुंइया के भाग जगाके
बढाइस निरंतर एखर मान हे।
प्रहलाद हमर संस्कृति के शान हे
सुसंस्कारिता जिनगी के परान हे
सुसंस्कृत लइका भविस देश के
संस्कृति पुरखउती के मुसकान हे।।
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
-आचार्य तोषण

हेलमेट

वाह! का सुन्दर
समसामयिक चित्रण
बिना हेलमेट पहिरे
पेटरोल झन डलाबे।
नी पहिरबे
हेलमेट
डंडा म मार खाबे।।

  ।।जय छत्तीसगढ़।।

ॐॐ॥शीतला दाई॥ॐॐ

*****************
ॐॐ॥शीतला दाई॥ॐॐ
*****************
मोर गांव के तरिया तीर मा
शीतला दाई ह बिराजे हे।
छंऊनी बनाके लीम छंईहा मा
दाई ह आसन साजे हे।।
*****************
चइत कुंवार मेला भराए
भक्तन सब सकलाए हे।
मांगे मनौती पाए सुघर
दाई आशीष बरसाए हे।।
चंपा चमेली फूल मोंगरा के
दसमत फूल ह साजे हे
मोर गांव के तरिया तीर मा
शीतला दाई ह बिराजे हे।।
******************
नाक म नथनी कान म बाली
हांथ म चुरी लाली हे।
नांव आनी बानी हे दाई के
शैलपुत्री कुष्मांडा काली हे।
लाली लाली करे सिंगार
चुनरी लाली साजे हे।
मोर गांव के तरिया तीर मा
शीतला दाई ह बिराजे हे।।
मोर गांव के तरिया तीर मा
शीतला दाई ह बिराजे हे।।
*****************
शीतला माता की जय
*****************
आचार्य तोषण
*****************

आजकाल

आजकाल
अनुष्का संन चुटकुला म
विराट घुंस्सा होवत हे।
शरम करव इंसान हो
अपन कमेंट म बोलत हे।।

हमर देश के बेटी लइका
सफलता म बढत जात हे।
महामहिम राष्ट्रपति के हांथ ले
नेहवाल सम्मान पात हे।।
पेटरोल अगर डलाना हे
हेलमेट पहिर के जाबे।
बिना हेलमेट पहिरे भैय्या
मोटर सायकिल झन चलाबे।।
हमर देश के सियान ह
स्वच्छ भारत बनात हे।
गांव सुधरे देश सुधरही
घर घर शौचालय बनवात हे।।
बेटी पढ़ाव बेटी बचाव
सब झन ह गोहरात हे।
बेटी पढही बिकास गढही
पूरा देश ह सोरियात हे।
-आचार्य तोषण

चेहरा

चेहरा अइसने झन बनाए कर।
हांस के सबझन सन गोठियाए कर।
जीथे तोला देख के कोई संगवारी
बने मुच मुच ले मुसकुराए कर।।
आचार्य तोषण

tk

सबला हंसात रबो।।

ए मया के पिंजरा मा एकेझन, तड़पे बर छोड़ देस।
दगा दे देस मोला बैरी ,रटले मोर दिल टोर देस।।

 एक एक रोज हर रोज के लिए।
जिन्दगी की नई खोज के लिए।
नीत करते रहना नेक कर्तव्य
��������������
खुशी के बेरा ल खुशनसीब बनाबो।
��������������
खुशी के बरत दीया हिरदे मा जलाबो।
��������������
भले जमाना म हमन रोवत राहन
��������������
लेख अइसन लिख के सबला हंसात रबो।।
��������������



 हाय टुरी तोर आंखी के कजरा।
खोपा मा झुले मोंगरा के गजरा।
घायल करदेहस जम्मो टुरा ल
मार डरही तोर कातिल ए नखरा।

��������������
खुशी के बेरा ल खुशनसीब बनाबो।
��������������
खुशी के बरत दीया हिरदे मा जलाबो।
��������������
भले जमाना म हमन रोवत राहन
��������������
लेख अइसन लिख के सबला हंसात रबो।।
��������������


चिरई के चींव चींव सही चहकत रहिथे बेटी।

चिरई के चींव चींव सही चहकत रहिथे बेटी।
बगिया म हजारों फूल सही महकत रहिथे बेटी।
बेटा ह एक्के कुल ला करे उजागर भइय्या
दुनो कुल ला सूरूज बन उजागर करत रहिथे बेटी।
आचार्य तोषण

."गोलू के बिहाव "

ए रचना ह मोर गोलू कका ल समर्पित हे
जेहा भारत माता के सेवा करत हे
।ओखर फोटू संग मा...
."गोलू के बिहाव "
******************
नांव हावय नूतन गोलू
लइका हमर बबा के।
मडवा म जमके नाचबो
बिहाव हे गोलू कका के।।
******************
संगे बाढेन संगे खेलेन
खाएन अरम पपइय्या।
मैं बनगेंव गुरूजी संगी
गोलू बनगे सिपईहा।।
करे देश के रक्षा संगी
बन्दुक गोली चलाके।
मडवा म जम के नाचबो
बिहाव हे गोलू कका के.॥१॥
******************
दंता श्री ला नेवता देके
मडवा ल परघाबोन।
ढेड़हीन ढेडहा मीलके
सुघर चूलमाटी लाबोन
मडवा बने सजाबो संगी
करसा दीया जलाके
मडवा म जम के नाचबो
बिहाव हे गोलू कका के.॥२॥
******************
हरदी चढही हमर कका के
मंगल गीत ल गाबोन।
मैन नाचा झुमरही संगी
बनेच हरदाही मताबोन।
पिंवराही गोलू के काया
तेल हरदी मा सनाके
मडवा म जम के नाचबो
बिहाव हे गोलू कका के.॥३॥
******************
बाजा बाजही आचार्य जी के
केंवरा ददरिया गाबोन।
दोहा परही नूतिश भाई के
मोहरी निशान गदकाबोन।।
डमउ डफरा बेन्जो तासा
सरगम सबे जमाके
मडवा म जम के नाचबो
बिहाव हे गोलू कका के.॥४॥
******************
गोलू बनही दूल्हा राजा
सुट बूट पहिराबो जी।
महर महर ममहावै कका ह
फॉग परफ्यूम लगाबोन जी।।
नइ राहंव महूं हा पाछू
जाहूं सफारी चमकाके
मडवा म जम के नाचबो
बिहाव हे गोलू कका के.॥५॥
******************
दरबारी नवागांव मा
जाबोन जी बरतिया।
कोनो जाही मारशल मा
कोनो जाही फटफटिया।।
हम तो जाबोन रे भैय्या
याद के बोलेरो लगाके
मडवा म जम के नाचबो
बिहाव हे गोलू कका के.॥६॥
******************
लगन परही गोधुली बेरा मा
सब के मन हरसाही गा।
होही कन्यादान रे भैय्या
करजा जम्मो छुट जाही गा।।
आही काकी हमर अंगना
दाई ददा ल रोवाके
मडवा म जम के नाचबो
बिहाव हे गोलू कका के.॥७॥
******************
होही धरम टीकावन घर मा
बबा, डोकरी दाई के हांथ ले।
आही गोलू के ममा मामी
सब परिवार ल साथ ले।।
रावटे परिवार आशीष दिही
हजारों हाथ लमाके
मडवा म जम के नाचबो
बिहाव हे गोलू कका के.॥८॥
******************
लाडू बरा खाबोन संगी
संग मा सबला खवाबो।
जुग जोड़ी सलामत रहे
अइसन दुआ मनाबो।।
ग्रुपिंग फोटो खिचाबो सबे
एक जगा जुरियाके
मडवा म जम के नाचबो
बिहाव हे गोलू कका के.॥९॥
******************
रचनाकार-आचार्य तोषण
ग्राम-धनगांव, डौंडीलोहारा
जिला-बालोद, छ. ग.
४९१७७१
मुहूबाईल:९६१७५८९६६७

बन जाए अनेक।।

मड़वा म मिलबो संगी मोर।
आश पूरा करहूं बलम तोर।
तोर संन जीए मरे के कबले
मन मा समाय आस हे मोर।
तोर मोर के चक्कर मा परे हे संसार ह।
हमर कब कही गुनथो माया के बजार ह।।
 बन जाए कतको बैरी दुश्मन जमाना हमर।
चमकही बिदिंया बरोबर छत्तीसगढ़ हमर।
 मोला मया मिलत नइहे ,मोर बर सब बेकार।
दवा मया के खाए बिन, चोला मोर बीमार।।
 राख बिवेक चालिए,सदा राह नेक।
एक-एक जोड़िए, बन जाए अनेक।।

बाबा समागम

बाबा समागम
भक्त: बहुत दिन ले बेरोजगार हों ,नौकरी नी मिलत हे ,का करो?
बाबा: ऐखर पहिली तंदूरी चिकन कब खाए रेहे?
भक्त: आज तक नी चखे हो।
बाबा: तभे किरपा कम होवत हे।पहिली कोनहो फाइव स्टार होटल मे बइठके चिकन तंदूरी खा किरपा दौड़ के आही नौकरी घलो लग जाही।
भक्त:बाबा होटल के बिल ल का किरपा भरही?
बाबा: बिल भरे के पैसा नइहे त इंहा आए काबर?
भक्त: जतिक रिहिस ओला एन्ट्री फीश मे जमा करदेंव अब पैसा कहां ले लांव।
बाबा: अच्छा आहनचो किरपा कम होवत हे। अच्छा बता चना कब ले नी खाहस ?
भक्त: रोजेच तो चना खाके गुजारा करत हंव।
बाबा: आज ले चना खाएबर बंद करदे। किरपा आए के शुरू होजही। चना के पैसा बांचही तेकर चिकन तंदुरी खालेबे। सब बने हो जही।
भक्त: अरे चना ल नी खाहूं त जीहूं कइसे?
बाबा: ए मोर समस्या नोहे।
भक्त:मोर दोनो किडनी खराब हे लीवर सड़ गेहे डाक्टर मन जवाब दे डरे हे कुछु करव बाबा।
बाबा: ठर्रा कब ले नी पीएहस?
भक्त: का बात करथस बाबा मे तो चाय काफी ल घलो हाथ निलगांव।
बाबा: ईही तो बात हे एकरे पाएसे किरपा कम होवत हे। जिनगी मे ठर्रा नीपीबे त किडनी लीवर सब खराब होही। जा पहिली ठर्रा पीके आ।
भक्त:मोर बिहाव नी होत हे बाबा।
बाबा: बिहाव मे लाडू कबले नी खाहस?
भक्त:काली परनदिन नरनदिन त खाए रेहेव बाबा।
बाबा: दुसर के बिहाव मे रोज रोज लाडु खाबे त किरपा कहां ले आही। अब बरफी खा जलदी बिहाव होजही।
भक्त: बाबा मेहा बड पढथौ फेर परीक्षा मे पास नी होवव।
बाबा: अच्छा कामा पढाई करतहस।
भक्त:बी एस सी करतहंव।
बाबा: कोन कोन से सबजेक्ट हे ?
भक्त: फिजिक्स कैमेस्ट्री मैथ्स बाबा।
बाबा: एखरे सेती किरपा नी आत हे। काली ले राजनीति अउ दर्शन शास्त्र के पढाई कर अउ बी एस सी के पेपर देवा पास हो जबे।
तथास्तु॥

tk

भरे गरमी मंझनिया बबा,चटले भोंभरा जनाय।
पटवा भाजी जिर्रा चटनी कोदइ बासी सुहाय।।

गरब गुमान न कीजै, सकल मान घट जाय।
शीश सबन को दीजै, अपन मान बढ़ जाय।।
आचार्य तोषण

दारू

नानकून प्रयास
समारू आरूग मंदहा।समारू के बिहाव होय चार पांच साल बितगे राहय। एको झन दीया जलइय्या नी राहय। बिचारा ह अपन दुनो झन मंदिर मंदिर जेती नी तेती लइका पाए बर चक्कर कांटत राहय। बइगा गुनिया झारा फूंका आनी बानी के उदीम करत रिहीस। गोसइनिन थोरकून पढे लिखे रिहीस त कथे-"हस्पीटल मा जातेन का चेक करातेन ।सब समस्या के हल हो जतीस।" समारू मानबे नइ करे। तभोले ओखर गोसइनिन ह एक दिन हस्पीटल लेग जथे। त चेकिंग मा पता चलथे कि समारू के ददा बने के कोई चारा नइहे। समारू सन्न खागे। कारन पुछिस त डाक्टर बतइस एखर मूल कारन तोर दारू पियइ हरे। तब ओला समझ मा आइस ।अउ उही दिन ले कसम खइस आज के बाद अब कभू दारू नइ पियो। अउ सबझन ला घलक चेताहूं। कि दारू कभू झन पीना।
॥नशा नाश के जड॥
आचार्य तोषण
धनगांव, डौंडीलोहारा

मया के गोठ ल का कहांव

मया के गोठ ल का कहांव
आथे मोला गजब रोवासी।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
सुरता ह तोर लामे रहिथे
हेराय बासी ह माढे रहिथे
सुध मा तोरे होगेंव दीवाना
जहुरिया उड़ावय हांसी।।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
काम बूता म मन नइ लागे
कोन जनी आके का झपागे
किंजरौ जंगल झारी बैरी
तन मन मा भरगे थकासी।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
आजा रे बैरी तोला गोहरांव
रात अउ दिन तुहिला बलांव
आजा पिरोही मोर तीर मा
खिल जही चेहरा मा हांसी।।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
-आचार्य तोषण
धनगांव, डौंडीलोहारा
बालोद, छ. ग. ४९१७७१
मुहबाइल ९६१७५८९६६७
मया के गोठ ल का कहांव
आथे मोला गजब रोवासी।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
सुरता ह तोर लामे रहिथे
हेराय बासी ह माढे रहिथे
सुध मा तोरे होगेंव दीवाना
जहुरिया उड़ावय हांसी।।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
काम बूता म मन नइ लागे
कोन जनी आके का झपागे
किंजरौ जंगल झारी बैरी
तन मन मा भरगे थकासी।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
आजा रे बैरी तोला गोहरांव
रात अउ दिन तुहिला बलांव
आजा पिरोही मोर तीर मा
खिल जही चेहरा मा हांसी।।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
-आचार्य तोषण
धनगांव, डौंडीलोहारा
बालोद, छ. ग. ४९१७७१
मुहबाइल ९६१७५८९६६७
मया के गोठ ल का कहांव
आथे मोला गजब रोवासी।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
सुरता ह तोर लामे रहिथे
हेराय बासी ह माढे रहिथे
सुध मा तोरे होगेंव दीवाना
जहुरिया उड़ावय हांसी।।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
काम बूता म मन नइ लागे
कोन जनी आके का झपागे
किंजरौ जंगल झारी बैरी
तन मन मा भरगे थकासी।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
आजा रे बैरी तोला गोहरांव
रात अउ दिन तुहिला बलांव
आजा पिरोही मोर तीर मा
खिल जही चेहरा मा हांसी।।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
-आचार्य तोषण
धनगांव, डौंडीलोहारा
बालोद, छ. ग. ४९१७७१
मुहबाइल ९६१७५८९६६७

आना

उनका आना जाना अजब इत्फाक था
हम बैठे थे इंतजार में बैठे ही रह गए।।

नसीब

मुझे अपने नसीब से, कोई गिला नहीं।
लिखा है जो रब ने ,मुझको मिला वही।।
-आचार्य तोषण

हाल-ए-दिल

हाल-ए-दिल का कांहव मुंहू ले कुछु फूटय नही ।
आंखी सबला कहि डारे ओला कुछु सुझय नही।।
-आचार्य तोषण

लाली गाल

लाली गाल दिखत हे।
चेहरा तोर कमाल दिखत हे।
बने मनाय होहू आप मन होरी
मुच मुच ले मुसकान दिखत हे।।
-आचार्य तोषण

होत बिहनिया भुंइया मा

होत बिहनिया भुंइया मा
सुरूज ह अंजोर बगरात हे।
एखर सेवा म जुट जावव
सुघर संदेसा पहुंचात हे।।
धरले बासी पताल चटनी
भुंइया के सेवा करेबर।
हरिहर सोनहा बाली के
निंदई कोड़ई करेबर।
हरियाय सुघर धान खेत मा
लहर लहर लहरावय।
झुमै नाचय मन हा संगी
खुसी के गीत ला गावय।
करिया बादर सुख के गागर
रिमझिम बरसय पानी।
फागून के रंग मा सनाय
जइसे लागय जिनगानी।
सबो डाहर छाहे हरियारी
भुंइहा भाग संवरात हे।
इही खुशी मा मोरो मन हा
फूलय नही समात हे।।

दीपक हूँ मैं

दीपक हूँ मैं तो सदा जलूँगा ही।
आंधी और तूफां से लडूँगा ही ।
आगे रहूं मैं या पीछे तुम्हारे
राह पे तेरे साथ साथ चलूँगा ही।
-आचार्य तोषण

सपना


सपना कभू रोवाथे अऊ कभू हंसाथे।
सपना ह मोर मयारू संन भेंट कराथे।
झन बना तै कभू सपना ल शमशान,
सपना,एक दुसर ल जीएबर सिखाथे।।
-आचार्य तोषण

कोन रंग लगावंव तोला

कोन रंग लगावंव तोला
मोला समझ नी आत हे।
देख मया के रंग लगे
सब रंग मन शरमात हे।।
-आचार्य तोषण

सौभाग्य

अपने विचारों को प्रकट करना अपने हाथ की बात है।
आपको पसंद करना या ना करना बात की बात है।
जो आपका सम्मान करे नतमस्तक होके
उनका सम्मान करना सौभाग्य की बात है।।
आचार्य तोषण

नमन है

नमन है शत शत नमन है
जिनके रक्त से सिचिंत चमन है।
आओ जरा याद करे वीरों को
अर्पित किया अपना तन मन है
आचार्य तोषण

पथरा ह

पथरा ह मारय ,अऊ पथरा ह टोरय।
पथरा ह एक दुसर ल, मया म जोरय।
पिसय मेंहदी अपन , हाथ हमर रंगाय।
हथौड़ी के मार ले,मंदिर रहय पूजाय।।
आचार्य तोषण

सुघर एसो होरी में।

अबीर गुलाल लगाबो सबला
सुघर एसो होरी में।
एक दुसर ल बांध के चलबो
मया पीरीत के डोरी में।।

आस अऊ बिसवास के
भाव सुघर बने रहय।
रंग भरे संसार म सब
सरभर ले रंगे रहय।।

झन रहय कोनो बैरी दुश्मन
एक दुसर के मितान बनय।
अमन शांति संदेश देवइय्या
एक घांव हिन्दुस्थान बनय।।

भेदभाव के खोचका पाटव
होरी के हे अतरी शोर।
कहत हवय आचार्य तोषण
बधई शुभकामना लेलव मोर।।
-आचार्य तोषण
ग्राम-धनगांव, डौंडीलोहारा
बालोद छ. ग.४९१७७१
मो.९६१७५८९६६७

होरी तिहार

सबोझन ल होरी तिहार
अरकरहाचकन ले बधाई

आज हावय होलिका दहन
मिलके आज सब इही कहन ।
मिटय जर मूल ले सब बुरई
एकता भाव के सांथ रहन।।

बुराई ऊप्पर अच्छाई के
सुघ्घर अकन ले जीत हे।
मनखे,मनखे के काम आवै
एखर ले बढ़िहा का रीत हे।।

आज होलिका दहन में
सब कुरीति ल जलाबो।
मया भरे परब मा संगी
मया के दीया जलाबो।।

-आचार्य तोषण
ग्राम-धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद, छ. ग.
९६१७५८९६६७

नकल करे बर अकल लगाएल परही।


॥श्री गरूवे नम:॥
नकल करे बर अकल लगाएल परही।
गलती करबे त घलो सुधराएल परही।
बिन गुरू के गलती नइ सुधरै संगी,
सुधरे अऊ सुधारे बर गुरू बनाएल परही।


छत्तीसगढ़ के माटी जइसने बनाबे तइसने बनहूं।
मैं ओ पानी अंव जे रंग ला डारबे ओइसने रंगहूं।।

काम कर कुछ ऐसा तब नाम हो पाएगा।
इसके बिना पगले दिल क्या जीत पाएगा।

 पल पल रंग बदलना गिरगिट का काम है
हम तो इंसान है इंसान बन कर रहे तो अच्छा है।

 का कांहंव कछु कहे नही जाए।
बोली अंतस मा रहे नही जाए।
मोर तो मन अभी रिहिस नही
वाह वाह कहे बिन रहे नही जाए।।



तिरछी नजरों से यूं न देखिये
डर... हमें लगता बहुत है।
आपको देखकर हमारी नजरें
कहीं कोई खता तो न कर बैठा।

-आचार्य तोषण

-आचार्य तोषण

होरी हे।

देदनादन शराररा होरी हे।
फागुन मे माते छोरा छोरी हे।
माते कृष्ण कन्हैया संग मा
बृज के राधा गोरी हे।।
-आचार्य तोषण

धनगांव भुइंय्या के घुर घुरहा माटी

मय तो धनगांव भुइंय्या के घुर घुरहा माटी अंव गा।
हंथ्थी जेला रमंज के रेंगय अइसन छोटकु चांटी अंव गा।
नाननान लइका जेला खेले अइसन फुटहा बांटी अंव गा।।
नोनी के गोड़ मा बाजै छुनछुन अइसन हटहा छांटी अंव गा।।
-आचार्य तोषण

मया के पीरा

मया के पीरा काखर कर गोहरांव
कोन ला सोरियांव कोन ला बतांव।
खुदे त मे रोवत हावंव जिनगी मा
कोन ला गुदगुदांव कोन ला हंसांव।।
-आचार्य तोषण

॥नरसिंह अवतार कथा॥

॥नरसिंह अवतार कथा॥

जय बिजय है दोऊ भाई
हरि के है पहरेदार।
प्रभु दरश को आए जब
चार झन रिषी कुमार।।

रोक कहा जाना मना
हरि आराम फरमाए।
कहे रिषी कुमार तब
हमें कोऊ रोक न पाए।।

तुम जो हमको रोके हो
तुरंत दानव हो जाओगे।
जनम तीन के बाद में
हरि से मुक्ति पाओगे।।

पहली जनम धरे दोऊ भाई
हिरण्यकश्यपु हिरण्याक्ष।
देवता पर अत्याचार करे
करे रिषीन पर कटाक्ष।।

हिरण्याक्ष ने जब धरा को
समुंद्र के अंदर डुबाया ।
तब हरि वराह रूप में
समूचा जगत बचाया।।

हिरण्यकश्यपु के घर सुंदर
भक्त प्रहलाद ने जन्म लिया।
भक्त नारद के मान बात
नारायण की भक्ति किया।

करे अत्याचार हिरण्यकश्यपु
प्रहलाद समुद्र में फेंक दिया।
भक्त का मान बचाने हेतु
हरि ने उनको गोद लिया।।

नाना भांति अत्याचार करे
भक्ति में लीन भक्त रहे।
ईश्वर इच्छा मान भक्त
नारायण नारायण जाप कहे।।

थी होलिका जिसकी बुआ
प्रहलाद ले आग में बैठ गई।
बाल न बांका हुआ भक्त का
होलिका जलकर ऐंठ गई।।

घड़ा भरा पापात्याचार का
नरसिंह ने अवतार लिया।
गोद उठा कर तब हरि ने
हिरण्यकश्यपु संहार किया।।

पुष्प वर्षा हुई स्वर्ग से
देवता करे जय जयकार।
पहला जनम सफल किया
दो रहा अभी उधार।।

॥ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:॥

-आचार्य तोषण

विशिष्ट पोस्ट

शिवनाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...